बिंद में सिंध समाया रे साधो | Vani Charcha | Sri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2023 | Aspur, Rajsthan

बिंद में सिंध समाया रे साधो | Vani Charcha | Sri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2023 | Aspur, Rajsthan हम प्रस्तुत कर रहे हैं श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ, सरसावा का मोबाईल एप आप नीचे दी हुयी लिंक द्वारा डाउनलोड कर हमारे साथ जुड़ सकते हैं। एवं एप को इस्तेमाल कर अपनी राय हमारे साथ साझा करें। धन्यवाद! SPJIN Mobile App - https://play.google.com/store/apps/de... Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... 2. NIJANAND YOG (निजानन्द योग) - Collection of 60 Invaluable FAQs https://www.spjin.org/assets/files/ni... 3. CHITWANI MARGDARSHAN (चितवनि मार्गदर्शन) - Smallest and Best ever Pocket Guide to Meditation https://www.spjin.org/assets/files/ch... 4. DHYAN KI PUSHPANJALI (ध्यान की पुष्पाञ्जलि) - Detailed Question-Answer Sessions transcribed in this unique pearl of spiritual wisdom https://www.spjin.org/assets/files/dh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

भगवान से प्रेम कैसे होगा ? | How to love God ? | Sri Rajan Swami | Vani Charcha | Jagni Yatra 2023
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भगवान से प्रेम कैसे होगा ? | How to love God ? | Sri Rajan Swami | Vani Charcha | Jagni Yatra 2023

परमात्मा हमारे अंदर है या हम परमात्मा के अंदर हैं | Vani Charcha - Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra
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परमात्मा हमारे अंदर है या हम परमात्मा के अंदर हैं | Vani Charcha - Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra

Fer Fer Sarup Jo Nirkhiye | Vani Charcha | Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2022 | Surat
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Fer Fer Sarup Jo Nirkhiye | Vani Charcha | Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2022 | Surat

असली प्रेम कहाँ है? परमात्मा से जुड़ने का सरल मार्ग | @shrirajanswami @SPJIN
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KPS GILL ਨੇ ਨੱਚਦੀ Dancer ਦੇ ਸਿਰ 'ਚ ਸ਼ਰਾਬ ਰੋੜ੍ਹ'ਤੀ,SSP Ajit Sandhu ਦੀ ਧੌਣ ਕਿਸਨੇ ਲਾਹੀ ? ਪੀਲੇ ਪਰਨੇ...
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KPS GILL ਨੇ ਨੱਚਦੀ Dancer ਦੇ ਸਿਰ 'ਚ ਸ਼ਰਾਬ ਰੋੜ੍ਹ'ਤੀ,SSP Ajit Sandhu ਦੀ ਧੌਣ ਕਿਸਨੇ ਲਾਹੀ ? ਪੀਲੇ ਪਰਨੇ...

ब्रह्मात्माओं के लक्षण -  श्री प्राणनाथ जी वाणी चर्चा By Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2022
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ब्रह्मात्माओं के लक्षण - श्री प्राणनाथ जी वाणी चर्चा By Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2022

जीवन में सतगुरु की आवश्यकता क्यों ? ।।ब्रम्हवाणी चर्चा ।।वक्ता:- श्री राजन स्वामीजी ।।@SPJIN
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जीवन में सतगुरु की आवश्यकता क्यों ? ।।ब्रम्हवाणी चर्चा ।।वक्ता:- श्री राजन स्वामीजी ।।@SPJIN

ध्यान साधना में 'सात्विक आहार' का महत्व | क्या खाएं कि मन एकाग्र हो जाए? @shrirajanswami @SPJIN
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ध्यान साधना में 'सात्विक आहार' का महत्व | क्या खाएं कि मन एकाग्र हो जाए? @shrirajanswami @SPJIN

क्या स्थान और व्यक्तिवाद ने हमें सत्य से दूर कर दिया है? @shrirajanswami @SPJIN
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क्या स्थान और व्यक्तिवाद ने हमें सत्य से दूर कर दिया है? @shrirajanswami @SPJIN

विरह कैसा हो साथ का जीससे हो पिया सनमुख ।। प्रवक्ता: Sri Rajan Swamiji | Vaani Charcha
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विरह कैसा हो साथ का जीससे हो पिया सनमुख ।। प्रवक्ता: Sri Rajan Swamiji | Vaani Charcha

क्या आपकी आत्मा जागृत है? | भगवान प्राप्ति का मार्ग | Shri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji @SPJIN
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क्या आपकी आत्मा जागृत है? | भगवान प्राप्ति का मार्ग | Shri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji @SPJIN

बिंद में सिंध समाया रे साधो।। वक्ता:- श्री राजन स्वामी जी ।। @SPJIN
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बिंद में सिंध समाया रे साधो।। वक्ता:- श्री राजन स्वामी जी ।। @SPJIN

Message from the Supreme Soul - The Time Has Come to Return Home | Shri Rajan Swami Ji Discourse ...
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Message from the Supreme Soul - The Time Has Come to Return Home | Shri Rajan Swami Ji Discourse ...

Beetak Charcha 2025 Day - 17 Kateb Ki Kapital | Kalki 1638-1758 | Rajan Swami Ji | Pranam Ji @SPJIN
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Beetak Charcha 2025 Day - 17 Kateb Ki Kapital | Kalki 1638-1758 | Rajan Swami Ji | Pranam Ji @SPJIN

परमात्मा के साक्षात्कार के लिए कौन सी तीन शर्ते पूरी करनी पड़ती हैं? @SPJIN @shrirajanswami
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परमात्मा के साक्षात्कार के लिए कौन सी तीन शर्ते पूरी करनी पड़ती हैं? @SPJIN @shrirajanswami

आत्माओं का दिल ही श्री राजजी का धाम होता हैं  | श्री राजन स्वामी जी (Jamnagar)
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आत्माओं का दिल ही श्री राजजी का धाम होता हैं | श्री राजन स्वामी जी (Jamnagar)

Chitwani | Meditation ( चितवनि ) By Shri Rajan Swami At  Shri Prannath Jyanpeeth,Sarsawa
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Chitwani | Meditation ( चितवनि ) By Shri Rajan Swami At Shri Prannath Jyanpeeth,Sarsawa

सुख और दुःख से मुक्ति। श्री राजन स्वामी जी #spjin
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सुख और दुःख से मुक्ति। श्री राजन स्वामी जी #spjin

प्राणनाथ जी कौन है ? - Prannath Ji Kaun Hai ? | Shri Rajan Swami Ji | Jagni yatra 2022 | Surat
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प्राणनाथ जी कौन है ? - Prannath Ji Kaun Hai ? | Shri Rajan Swami Ji | Jagni yatra 2022 | Surat

तारतम वाणी (ब्रह्मसृष्टि) कौन, किसे कहते हैं ? By Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra Day - 12 | SPJIN
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तारतम वाणी (ब्रह्मसृष्टि) कौन, किसे कहते हैं ? By Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra Day - 12 | SPJIN