परमात्मा के साक्षात्कार के लिए कौन सी तीन शर्ते पूरी करनी पड़ती हैं? @SPJIN @shrirajanswami

परमात्म के साक्षात्कार के लिए कौन सी तीन शर्ते पूरी करनी पड़ती हैं? ‪@SPJIN‬ ‪@shrirajanswami‬ वक्ता-श्री राजन स्वामी जी श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ 18वां वार्षिकोत्सव तलफे तारुनि रे, दूल्हे को दिल दे। संमंध मूल जानके रे, सेज सुरंगी पर ले। प्रकरण ७/१ सनंध की वाणी वेद कतेब के वास्तविक सत्य को दर्शाने और सबके ह्रदय में सत्य का प्रकाश करने के लिए अवतरित हुई है। श्री इंद्रावती सखी का विरह, वो प्रियतम अक्षरातीत से मिलने की तड़प हम सुन्दरसाथ के लिए एक प्रेरणादायी मार्ग तय करता है। हमारे समक्ष ३ शर्तें रखी गयी है। १ तारतम वाणी द्वारा अपने अखंड मूल संमंध की पहचान करना। २ प्रेममयी चितवनि द्वारा अपने ह्रदय में सुंदर सेज्या का निर्माण करना। ३ धनी जी को अपना दिल देना। हर प्रकार की सांसारिक इच्छाओं को त्याग कर ही मन की खटपट मिट सकती है। "जो मन की खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होये।" यदि हम ये कर सकते हैं तो विरह और प्रेम आना प्रारम्भ हो जायेगा। आत्मा दुल्हिन का सिंगार करेगी और जल बिन मछली के समान तड़पती हुई रूह को असीम सौंदर्य वाले दूल्हे का दीदार अवश्य होगा। Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

भगवान से प्रेम कैसे होगा ? | How to love God ? | Sri Rajan Swami | Vani Charcha | Jagni Yatra 2023
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परात्म की जागृति | (श्री राजन स्वामी जी)
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वाणी समझने का तरीका । आचार्य अशोक जी   SPJIN 1080p, h264
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शून्य बनते ही सब काम बनने लगेंगे? अष्टावक्र ने बताया असली रहस्य
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देखिये कैसे स्वामी जी ने इन के सारे सवालों का जवाब दिया है अब उन महाराज की बलि बंद होगई है
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क्या केवल शब्दों से परमसत्य का अनुभव संभव है? @shrirajanswami @SPJIN
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Amit Ji ने ऐसा क्यों कहा कि तुम परमहंस बन जाओगे ! छोटी अर्ज़ी Ch-3
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रास की वाणी । by shri rajan swamiji #spjin #shrirajanswamiji @amanpranami633 #krishna
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Introduction to Shriji Saheb Ji: Discussion on Shri Mukhvani from the mouth of Dharamveer Jagnira...
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SPJIN ❤️ चितवनी  कैसे होगी,और क्या करना पड़ेगा।  अपने आपको जाने और समझे,
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05 सर्व कर्मों के रोकने का परम उपाय ''भेदविज्ञान''
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रास को संसार की विषयात्मक बुद्धि से नहीं समझा जा सकता | @shrirajanswami @SPJIN
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सोहागिन आत्माओं की रहनी
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बिना तले तेरे कदम  : धर्मवीर जागनीरतन श्री सरकार साहेब के मुखारबिंद से श्री मुखवाणी चर्चा
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||♥️Spjin||प्रेम ब्रह्म दो एक है ( अति सुंदरचर्चा ) आचार्य अशोक जी
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जीवन का लक्ष्य क्या है।।वक्ता- राजन स्वामी जी।।@SPJIN
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Ep: 44  "हमारे जीवन में इतनी विपत्तियाँ, परीक्षाएँ और चुनौतियाँ क्यों आती हैं?”
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महाप्रलय कब और कैसे होगी श्री राजन स्वामी जी के मुखारविंद से ब्रह्मवाणी चर्चा
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दुख ही है परमात्मा से मिलने की सीढ़ी | आध्यात्मिक रहस्य जो जीवन बदल देगा! Shri Rajan Swami Ji SPJIN
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सुख और दुःख से मुक्ति। श्री राजन स्वामी जी
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