परमात्मा हमारे अंदर है या हम परमात्मा के अंदर हैं | Vani Charcha - Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra

परमात्मा हमारे अंदर है या हम परमात्मा के अंदर हैं | Vani Charcha - Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... 2. NIJANAND YOG (निजानन्द योग) - Collection of 60 Invaluable FAQs https://www.spjin.org/assets/files/ni... 3. CHITWANI MARGDARSHAN (चितवनि मार्गदर्शन) - Smallest and Best ever Pocket Guide to Meditation https://www.spjin.org/assets/files/ch... 4. DHYAN KI PUSHPANJALI (ध्यान की पुष्पाञ्जलि) - Detailed Question-Answer Sessions transcribed in this unique pearl of spiritual wisdom https://www.spjin.org/assets/files/dh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

परमात्मा, ईश्वर और भगवान में क्या फर्क है ? - आध्यात्मिक प्रश्न मंच | Ashok Raj | SPJIN- Jagni Yatra
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ब्रह्म ज्ञान से ही सारे संसार को अखंड होना है-- 🧘 सतगुरु श्री राजन जी
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आत्मा समझ परमात्मा को याद करो - आत्मा से परमात्मा तक Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2022| Vadodra
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रास की वाणी । by shri rajan swamiji #spjin #shrirajanswamiji @amanpranami633 #krishna
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20 Mins Deep Meditation First Bhoom of Rangmahal and Chitwani of Raj Ji Friday Parikrama by Amit Ji
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सुख और दुःख से मुक्ति। श्री राजन स्वामी जी #spjin
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सोहागिन आत्माओं की रहनी
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सोहागिन आत्माओं की रहनी

क्या है अखंड मुक्ति का असली मार्ग ?।"प्रवक्ताःश्री आचार्य विजयजी  #spjin @amanpranami633
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क्या है अखंड मुक्ति का असली मार्ग ?।"प्रवक्ताःश्री आचार्य विजयजी #spjin @amanpranami633

ना कछू देखूं दरसन -Na Kachhu Dekhun Darsan - Vani Charcha - Sri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji
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SPJIN ❤️ चितवनी  कैसे होगी,और क्या करता पड़ेगा।  अपने आपको जाने और समझे,
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SPJIN ❤️ चितवनी कैसे होगी,और क्या करता पड़ेगा। अपने आपको जाने और समझे,

सत्य का मार्ग कठिन क्यों होता है ? ।।वक्ता श्री राजन स्वामी जी।।@SPJIN @spritualsecrets
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परमात्मा, ईश्वर और भगवान में क्या फर्क है?
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Mere Andh Abhagi Jeev - Vani Charcha - Ashok Raj | Jagni Yatra 2023 | Sri Prannath Gyanpeeth Sarsawa
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Parmatma Ka Sandesh - घर वापसी का समय हो चुका है | Shri Rajan Swami Ji Pravachan | SPJIN - Paramdham
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What did Amit Ji show his friends from the Valley of Topaz? Find out! Ch. 2
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वाणी समझने का तरीका । आचार्य अशोक जी   SPJIN 1080p, h264
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SPJIN 💖 परम पूज्य राजन स्वामी जी के मध्यम से मोडासा गुजरात में प्रश्नों का समाधान
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ब्रह्मवाणी की अखण्ड धारा (भाग- 2)
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ब्रह्मवाणी की अखण्ड धारा (भाग- 2)

राज जी दर्शन अवश्य देंगे। RAJ JI KE DARSHAN #spjin #shrirajanswamiji @amanpranami633
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मांगत हो मेरे दुल्हा - Mangat Ho Mere Dulha - Vani Charcha - Sri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji
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