प्रवचनसार #059,060 | इन्द्रियाँ परद्रव्य हैं | Indriya Pardravya Hai | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
परदव्वं ते अक्खा णेव सहावो त्ति अप्पणो भणिदा । उवलद्धं तेहि कधं पच्चक्खं अप्पणो हवदि ॥५९ ॥ अन्वयार्थ - (ते अक्खा) वे इन्द्रियाँ (परदव्वं) पर द्रव्य हैं (अप्पणो सहावो त्ति) आत्मस्वभाव रूप (णेव भणिदा) नहीं कहा है, (तेहि) उनके द्वारा (उवलद्धं) ज्ञात (अप्पणी) आत्मा का (पच्चक्खं) प्रत्यक्ष (कधं हवदि) कैसे हो सकता है? जं परदो विण्णाणं तं तु परोक्ख त्ति भणिदमट्ठेसु । जदि केवलेण णादं हवदि हि जीवेण पच्चक्खं ॥ ६० ॥ अन्वयार्थ - (परदो) पर के द्वारा होने वाला (जं) जो (अट्ठेसु विण्णाणं) पदार्थ सम्बन्धी विज्ञान है, (तं तु) वह तो (परोक्ख त्ति भणिदं) परोक्ष कहा गया है, (जदि) यदि (केवलेण जीवेण) मात्र जीव के द्वारा ही (णादं हवदि हि) जाना जाये तो (पच्चक्खं) वह ज्ञान प्रत्यक्ष है। 🔳गाथा 59- इन्द्रियाँ पर द्रव्य हैं ,ये इन्द्रियाँ आत्मा का स्वभाव नही है ,आत्मा का स्वभाव ज्ञान औऱ दर्शन है ,इन्द्रियों के द्वारा जो ज्ञान आत्मा तक जाता हैं वह ज्ञान परोक्ष ज्ञान है ,,आत्मा जो ज्ञान स्व महसूस करे या अतीन्द्रिय ज्ञान ही प्रत्यक्ष ज्ञान हैं अर्थात सुख हैं 🔳गाथा-60 जो पर से ज्ञान हो रहा हैं वह परोक्ष है ,जो केवलज्ञान के द्वारा ज्ञान जाना जाता हैं वही जीव का प्रत्यक्ष ज्ञान है ,आत्मा के स्वभाव के अलावा सब पर हैं। 🔳सच्चा ज्ञान हमेशा सुख देता है,जब भी दुख आये तो समझना वह हमारी अज्ञानता के कारण आया है।इसलिए अज्ञान से दूर रहना चाहिए। Contributed by: Rakhi Jain, Delhi Date: 2018-08-30 Gatha: 059-060 Granth: Pravachansar Pravachan: Muni Shri Pranamya Sagar ji

प्रवचनसार #061,062 | दुख का कारण ज्ञान/मन की आकुलता | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी

Kedarnath Disaster 2013: उस दिन की पूरी कहानी।

1. प्रथम साप्ताहिक विचार गोष्ठी (मै और मेरा महाविद्यालय) || साप्ताहिक विचार गोष्ठी || 12/07/2026

पानी - कब, कितना, कैसे पिएं? कब्ज, शुगर, BP, IBS की जड़ पानी? | Dr Parmeshwar Arora Podcast

Baba Lal Das: Murdered for Exposing Ram Mandir Scams by Sangh Parivar | Madhu Kishwar

99% लोग Gut Health के बारे में गलत जानते हैं - Fix Your Gut Scientifically |G2G By Rahul Jain

जब गांधारी ने कृष्ण से पूछा— तुम चाहते तो महाभारत युद्ध रोक सकते थे! | 99% लोग नहीं जानते इसका उत्तर

अगर सुख पैसों में होता तो सबसे अमीर लोग कभी दुखी क्यों होते? Samaysagar Ji Maharaj Samaygurukul

नई छहढाला ढाल 03Revision Class 01- गुणस्थान: कितना चले, कितना चलना बाकी है छंद 01

प्रवचनसार #067,068 | क्या शरीर में सुख है? | Kya Shareer Me Sukh Hai? | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी

Diabetes वालों के लिए 3 Best मीठी चीजें। Walk कब करें। Dr. Anoop Misra Explains

OSHO – प्राण ऊर्जा का रहस्य | प्राण ऊर्जा से उपचार | OSHO HINDI SPEECH

ज्योतिषी की बड़ी भविष्यवाणी, चंदा चोरी ने मोदी को फंसा दिया! || Modi || Astrology

Health Meditation: How Bhramari & Neuroplasticity Change Lives | भ्रामरी प्राणायाम | Askganesha

Vishal Chaturvedi On Neem Karoli Baba, Hanuman Ji, Kainchi Dham, Hanuman Ansh & More | @RJRaunac

नई छहढाला ढाल 03 Class 3.37 छंद 16,17 आपको सिद्ध भगवान ही भगवान कहना चाहिए

मृत्यु से पहले अगर यह बात समझ आ जाए, तो जीवन सफल हो सकता है || Samaysagar Ji Maharaj Samaygurukul

प्रवचनसार #048,049 | क्षायिक ज्ञान और केवलज्ञान | Kshayik Gyan Aur Kewal Gyan | मुनि प्रणम्य सागर

साल 1975 फिरोजाबाद के चातुर्मास में एक ऐसी घटना हुई, जिसने जैन साहित्य का इतिहास बदल दिया..

