सबसे बड़ा विकार क्या है ? ।। ब्रह्मवाणी चर्चा।। वक्ता :- श्री राजन स्वामी जी।।@SPJIN
श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... 2. NIJANAND YOG (निजानन्द योग) - Collection of 60 Invaluable FAQs https://www.spjin.org/assets/files/ni... 3. CHITWANI MARGDARSHAN (चितवनि मार्गदर्शन) - Smallest and Best ever Pocket Guide to Meditation https://www.spjin.org/assets/files/ch... 4. DHYAN KI PUSHPANJALI (ध्यान की पुष्पाञ्जलि) - Detailed Question-Answer Sessions transcribed in this unique pearl of spiritual wisdom https://www.spjin.org/assets/files/dh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

गुरु के प्रति सच्चा समर्पण ! वक्ता : राजन स्वामी जी। @SPJIN @spritualsecrets @spjinmusic

अक्षरातीत पूर्ण ब्रह्म की पहचान श्री राजन् स्वामी जी द्वारा विशेष चर्चा । @SPJIN @spjinmusic

हर सुबह एक नया संकल्प लेकर उठो ! @shrirajanswami @SPJIN

चलो सुंदरसाथ जी अब घर लौट चलें। 🍃🧘🍃# श्री राजन स्वामी जी

देखिये कैसे स्वामी जी ने इन के सारे सवालों का जवाब दिया है अब उन महाराज की बलि बंद होगई है

हर पल आनंदमयी जीवन कैसे जिएं? | आध्यात्मिक दृष्टिकोण से - Shri Rajan Swami Ji | Hindi Spiritual Talk

सुख और दुःख से मुक्ति। श्री राजन स्वामी जी #spjin

पूज्य श्री स्वामी जी के द्वारा परम तत्व के खोज की कठिन यात्रा और परम लक्ष्य तक पहुंच भी गए

रास की वाणी । by shri rajan swamiji #spjin #shrirajanswamiji @amanpranami633 #krishna

🧘"चितवन करते हैं,🥺 लेकिन धनी के लिए प्यार नहीं आता, क्या करें?" by Amit Ji🪷 20/4/25 Sunday Session

क्षर अक्षर से परे परमात्मा !!! जानें गीता में वर्णित उत्तम पुरुष का रहस्य ! वक्ता : राजन स्वामी जी।

जानें बाह्य और आतंरिक पवित्रता का रहस्य ! वक्ता : राजन स्वामी जी। @SPJIN @spritualsecrets

@SPJIN श्री तारतम मंत्र की वास्तविक पहचान- तारतम सागर # आचार्य अशोक जी #

आत्मजागृति संभव है #spjin

नश्वर संसार का कड़वा सच: 'पाव पलक का नहीं भरोसा @shrirajanswami @SPJIN

कहाँ और कैसा है परमात्मा जानें देवी देवता, भगवान और परमात्मा का रहस्य । वक्ता : राजन स्वामी जी।।

मुलमिलावा || सम्पूर्ण वर्णन चित्र सहित || ऐसा वीडियो आपने आजतक नहीं देखा होगा

નિજાનંદ સંપ્રદાયના રાજન સ્વામી સાથે સનાતનની સમસ્યાઓની વાત | કયા મુદ્દા પર આક્રમક? | Jamawat

बिचले नैन श्रवण मुख रसना - Sri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji Vani - SPJIN - Rajan Swami Charcha

