आत्मा समझ परमात्मा को याद करो - आत्मा से परमात्मा तक Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2022| Vadodra

आत्मा समझ परमात्मा को याद करो - Yaad Kaise kare Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2022 | Vadodra आत्मा समझ परमात्मा को याद करो |Parmatma Ko Yaad Kaise kare परमात्मा को याद करने की सबसे सरल विधि I भगवान आपकी हर बात सुनेंगे परमात्मा को सहज याद कैसे करें? हर समय परमात्मा याद कैसे रहे? परमात्मा की याद हमेशा कैसे बनी रहे? आत्मा समझ परमात्मा को याद करो |Parmatma Ko Yaad Kaise kare Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... 2. NIJANAND YOG (निजानन्द योग) - Collection of 60 Invaluable FAQs https://www.spjin.org/assets/files/ni... 3. CHITWANI MARGDARSHAN (चितवनि मार्गदर्शन) - Smallest and Best ever Pocket Guide to Meditation https://www.spjin.org/assets/files/ch... 4. DHYAN KI PUSHPANJALI (ध्यान की पुष्पाञ्जलि) - Detailed Question-Answer Sessions transcribed in this unique pearl of spiritual wisdom https://www.spjin.org/assets/files/dh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

दुख ही है परमात्मा से मिलने की सीढ़ी | आध्यात्मिक रहस्य जो जीवन बदल देगा! Shri Rajan Swami Ji SPJIN
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परमात्मा, ईश्वर और भगवान में क्या फर्क है?
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Man pavitra kaise hoga ? Dharmik  Lakshan - Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra |  Ahmedabad, Gujarat
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सुख और दुःख से मुक्ति। श्री राजन स्वामी जी
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श्री कृष्ण त्रिधा लीला | माहाकारण | Ep - 1 | 25 जून 2026 । ललित भगत । 191, श्री राज निवास, जयपुर
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Shri Raj Shyama Ji with new pictures
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परमात्मा को पाने का एकमात्र मार्ग - The only way to reach god By Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra
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आत्मबोध कैसे सम्भव है? ।। ब्रह्मवाणी चर्चा। । वक्ता :- श्री राजन स्वामी जी।। @SPJIN
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भगवान से प्रेम कैसे होगा ? | How to love God ? | Sri Rajan Swami | Vani Charcha | Jagni Yatra 2023
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Very Special Session by Amit ji Don't Miss! " श्यामा श्याम को सदा प्रसन्न रखने का उपाय "
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परमात्मा, ईश्वर और भगवान में क्या फर्क है ? - आध्यात्मिक प्रश्न मंच | Ashok Raj | SPJIN- Jagni Yatra
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Diwali 2024 - मिलके साथ आवे दौड़ता - Vani Charcha by Sri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji
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सच्चा आनंद—कैसे पाएँ ?।।वक्ता: श्री राजन स्वामी जी।।@SPJIN @spritualsecrets @spjinmusic
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Amit ji Live Now Join Now 👌| जिनके जीवन में कष्ट हैं वो ये सुन लें जीवन बदल जाएगा |
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माया के कष्टों से कौन बचा सकता है ? ।। ब्रह्मवाणी चर्चा।। वक्ता :- श्री राजन स्वामी जी।। @SPJIN
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रास की वाणी । by shri rajan swamiji #spjin #shrirajanswamiji @amanpranami633 #krishna
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The Connection Between the Soul and the Divine, and Where to Find Eternal Bliss: Listen to Param ...
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ना कछू देखूं दरसन -Na Kachhu Dekhun Darsan - Vani Charcha - Sri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji
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The Home of Shri Dham and Shri Krishna || See and Open the Vani of Shri Prannath || Speaker: Sri ...
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