पाप, पुण्य, पूजा, भक्ति और मुक्ति | जीवन का वास्तविक सत्य |@shrirajanswami @SPJIN

पाप और पुण्य क्या हैं? क्या केवल पूजा से मुक्ति मिल सकती है? भक्ति का वास्तविक अर्थ क्या है और मुक्ति का मार्ग कौन सा है? इस गहन आध्यात्मिक वीडियो में हम समझेंगे — • पाप और पुण्य की शास्त्रीय परिभाषा • पूजा और भक्ति में वास्तविक अंतर • क्या कर्म से ही मुक्ति संभव है? • भक्ति और ज्ञान का संबंध • मुक्ति क्या है और वह कैसे प्राप्त होती है? यह वीडियो जीवन को देखने की आपकी दृष्टि बदल देगा और आपको कर्म से ऊपर उठकर भक्ति, ज्ञान और सत्य की ओर ले जाएगा। 🙏 अंत तक अवश्य देखें और अपने विचार कमेंट में साझा करें। #पाप, #पुण्य, #पूजा, #भक्ति, #मुक्ति, #मोक्ष, #कर्म, #भक्ति_मार्ग, #ज्ञान_मार्ग, #sanatandharma , #adhyatmikgyancharcha , #vedanta , #spiritualwisdom , #selfrealization , #spiritualhindisongs Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

आत्मा और परमात्मा के बीच का पर्दा | अज्ञान से ज्ञान की यात्रा |@shrirajanswami @SPJIN
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Introduction to Shriji Saheb Ji: Discussion on Shri Mukhvani from the mouth of Dharamveer Jagnira...
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परमात्मा सगुण, निर्गुण या उससे भिन्न? | ईश्वर का वास्तविक स्वरूप |@shrirajanswami @SPJIN
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प्रातः कालीन सेवा पूजा || प्रणामी सेवा पूजा
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श्रीजी साहेबजी महेरबान
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SPJIN ❤️ चितवनी  कैसे होगी,और क्या करता पड़ेगा।  अपने आपको जाने और समझे,
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बुरे लोगों को कर्मफल कब मिलता है? Law Of Karma। Soul Journey & Past Life। Swami Yatindranand Giri Ji
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माया के कष्टों से कौन बचा सकता है ? ।। ब्रह्मवाणी चर्चा।। वक्ता :- श्री राजन स्वामी जी।। @SPJIN
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*सूर्यनारायण जी के संशय का समाधान*श्री जी साहब जी ही अक्षरातीत हैं
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*सूर्यनारायण जी के संशय का समाधान*श्री जी साहब जी ही अक्षरातीत हैं

क्या आपकी आत्मा जागृत है? | भगवान प्राप्ति का मार्ग | Shri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji @SPJIN
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क्या आपकी आत्मा जागृत है? | भगवान प्राप्ति का मार्ग | Shri Rajan Swami Ji - Shri Prannath Ji @SPJIN

ब्रह्म ज्ञान से ही सारे संसार को अखंड होना है-- 🧘 सतगुरु श्री राजन जी
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ब्रह्म ज्ञान से ही सारे संसार को अखंड होना है-- 🧘 सतगुरु श्री राजन जी

सत्य का मार्ग कठिन क्यों होता है ? ।।वक्ता श्री राजन स्वामी जी।।@SPJIN @spritualsecrets
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सत्य का मार्ग कठिन क्यों होता है ? ।।वक्ता श्री राजन स्वामी जी।।@SPJIN @spritualsecrets

परमात्मा हमारे अंदर है या हम परमात्मा के अंदर हैं | Vani Charcha - Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra
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रास की वाणी । by shri rajan swamiji #spjin #shrirajanswamiji @amanpranami633 #krishna
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SPJIN 💖 परम पूज्य राजन स्वामी जी के मध्यम से मोडासा गुजरात में प्रश्नों का समाधान
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SPJIN 💖 परम पूज्य राजन स्वामी जी के मध्यम से मोडासा गुजरात में प्रश्नों का समाधान

सनातन की सत्यता | Sanatan Dharma The Ultimate Truth | Hindu Philosophy Explained @shrirajanswami
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||♥️Spjin||प्रेम ब्रह्म दो एक है ( अति सुंदरचर्चा ) आचार्य अशोक जी
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What did Amit Ji show his friends from the Valley of Topaz? Find out! Ch. 2
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तुम्हारी ‘मैं’ नश्वर में है या अविनाशी में ?  | your 'I' in the mortal or in the immortal ?
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अनमोल समय को कहाँ लगाये ? श्री राजन स्वामी जी
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