परमात्मा सगुण, निर्गुण या उससे भिन्न? | ईश्वर का वास्तविक स्वरूप |@shrirajanswami @SPJIN

परमात्मा का वास्तविक स्वरूप क्या है? क्या वह सगुण है, निर्गुण है, या फिर इन दोनों से भी भिन्न और परे? इस गहन आध्यात्मिक वीडियो में हम समझेंगे — • सगुण और निर्गुण का शास्त्रीय अर्थ • भक्ति मार्ग में सगुण उपासना का महत्व • ज्ञान मार्ग में निर्गुण की अनुभूति • क्यों संत और वेद कहते हैं कि परमात्मा सगुण-निर्गुण से परे है • साधक के जीवन में यह समझ क्यों आवश्यक है यह विषय केवल दर्शन नहीं, बल्कि अनुभव और आत्मबोध का मार्ग खोलता है। वीडियो आपको द्वैत से अद्वैत और धारणा से सत्य की ओर ले जाएगा। 🙏 अंत तक अवश्य देखें और अपने विचार कमेंट में साझा करें। #परमात्मा, #सगुण, #निर्गुण, #सगुणनिर्गुण, #ईश्वर, #ईश्वरकास्वरूप, #adhyatmikgyancharcha , #sanatandharma , #vedanta , #advaita , #bhaktiaurgyan , #spiritualwisdom , #selfrealization , #आत्मज्ञान, #spiritualhindisongs Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381) आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

आध्यात्मिक शिक्षा ही वह हथियार है जिससे धर्मरक्षा सम्भव है | @shrirajanswami @SPJIN
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एक परब्रह्म की पहचान व सच्चा अध्यात्म | परम सत्य क्या है? |@shrirajanswami @SPJIN
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Charcha-007 | Kaul, Fail, Haal: Divine Discourse by Jagni Ratan Shri Sarkar Saheb
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चेतन में "मन को" लीन कैसे करें ? ||Yug-Purush|| How to absorb the mind in consciousness?
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सनातन की सत्यता | Sanatan Dharma The Ultimate Truth | Hindu Philosophy Explained @shrirajanswami
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संगती का प्रभाव
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तारतम मंत्र के विवाद पर शांति और एकता का संदेश । #shrirajanswamiji #spjin @amanpranami633
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कौन है निर्भय? / वास्तविक धन क्या है? | पैसा या आत्मिक संपदा? /  @shrirajanswami @SPJIN
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BODY HEALING Science DETOX, BREATHWORK : ALPHA Triggering विधि बदल देगी जिंदगी @ANURAGRISHI
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जीवन बीत चला । डॉ. प्रवीण जी 🧘🍃🌿|#spjin #spjinmusic #shrirajanswamiji
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सब से बडी दार्शनिक बहस - अद्वैत vs द्वैत vs त्रैत
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सतगुरु किसे कहते हैं ?।।ब्रम्हवाणी चर्चा ।।प्रवक्ता:- श्री राजन स्वामीजी ।। #spjin @amanpranami633
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कैसे बनाएं ध्यान को अटूट | सुरता क्यों टूटती है?  @shrirajanswami @SPJIN
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||♥️Spjin||प्रेम ब्रह्म दो एक है ( अति सुंदरचर्चा ) आचार्य अशोक जी
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योग तपस्या भट्ठी E. V. गिरिश भाई जी देह-भान रूपी बीमारी से मुक्ति 24 मई 2026 प्रातः 10:00 बजे
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स्वयं को देखने की विधि क्या है ? | What is the method to see oneself?
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रास को संसार की विषयात्मक बुद्धि से नहीं समझा जा सकता | @shrirajanswami @SPJIN
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रास को संसार की विषयात्मक बुद्धि से नहीं समझा जा सकता | @shrirajanswami @SPJIN

घने जंगल में चट्टानों के बीच छुपकर तपस्या कर रहे बाल वैरागी संत
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वाणी समझने का तरीका । आचार्य अशोक जी   SPJIN 1080p, h264
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जीवन रूपी सुनहरे अवसर का सदुपयोग कैसे करें?@SPJIN  @shrirajanswami
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