किस्सा राजा गोपीचन्द(लेखराज चौहान )गायक सत्ते फरमाना 05 देखकै तेरा शरीर पूत मेरे वा याद पुराणी आई थी
पुत्र की बात सुणकर मैनावन्ती कहती है कि ऐसी कोई बात नहीं है बस तेरा शरीर देखकर मुझे तेरे पिता जी की याद आ गई थी क्योंकि उसका भी स्वर्ण जैसा शरीर था और क्या कहती है । गाणा न 5 मैनावन्ती पुत्र गोपीचन्द को देख कै तेरा शरीर पूत मेरे वा याद पुराणी आई थी तेरे पिता नै भी तेरे बरगी ही कंचन काया पाई थी (टेक) जो आया इस जग में बेटा पड़ै एक दिन जाणा सै कुदरत का कानून चलै ना किसै का धिंगताणा सै कर्मो के अनुसार जगत में अपणा नाम कमाणा सै भले बुरे जो कर्म करै उनै वैसा ही फळ पाणा सै तूं भी एक दिन चाल्या जागा मन में सोच घबराई थी (1) दुनिया पैदा होकै मर ली रहा बाकी कोई निशान नहीं महापुरुषों का जिक्रा चलता और किसे का ध्यान नहीं सिर पै काळ जब आवै यू देखै दीन और धनवान नहीं तेरा पिता भी राजा था रहा वो ज्यादा दिन महमान नहीं बारह साल की उम्र थी तेरी जब उसनै ज्यान गंवाई थी (2) दुनिया पैदा होकै मर ली बाकी रहा निशान नहीं महापुरुषों का जिक्रा चालै और किसे का ध्यान नहीं सिरपै काळ जब आवै देखै दीन और धनवान नहीं तेरा पिता भी राजा था रहा ज्यादा दिन महमान नहीं बारह साल की उम्र थी तेरी जब उसनै ज्यान गंवाई थी (2) जग तै मिटै ना नाम तेरा ईसा जतन बनाणा चाहूँ सूं महापुरुषों की ढाल तनै रे मैं अमर कराणा चाहूँ सूं गोरख नाथ गुरु तै तनै मैं यू जोग दिलाणा चाहूँ सूं जोग कै आगै काळ भी बेबस तनै समझाणा चाहूँ सूं क्यूकर जिक्र करूँ तेरे तै चिंता नै घणी सताई थी (3) बड़े बड़े कवियों की भूमि खुश मकड़ौली धाम रहै तेरे गुरु हरदेवा सिंह का यू बणा जगत में नाम रहै सदियों तक खुशहाली तै बसता तेरा बळी गाम रहै लेखराज तेरी कविताई का याद सभी को काम रहै धन धन सैं सतगुरु तेरे जिनै तुझको शिक्षा लाई थी (4)

किस्सा राजा गोपीचंद (कवि लेखराज चौहान) गायक सत्ते फरमाना,18.मेरै भीख घाल दे माई, तेरे दर पै अलख जगाई

किस्सा राजा गोपीचंद (लेखराज चौहान)गायक सत्ते फरमाणा 11यू सिर माथै आदेश तेरा सुण मैं बेटा तूं माँ सै

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किस्सा राजा गोपीचंद (लेखराज चौहान) गायक सत्ते फरमाना, 19 जोगी का बाणा करकै तनै खटकाया सै द्वार मेरा

किस्सा राजा गोपीचंद कवि लेखराज चौहान, गायक सत्ते फरमाना 03 ना बादळ का निशान, पूरा खुल रहा आशमान,

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किस्सा भगत पूर्णमल कवि लेखराज चौहान गायक सत्ते फरमाना 4 पियाजी बात तेरी या नही हो समझ में आई

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पुराणी रेडियो की हिट रागनी- Master Satbeer ,palleram dahiya ,rajender kaharakiya.

दो बाबा जी आमने-सामने#इसा रंगकाट मुकाबला कदे देखा नहीं होगा#बाबा पृथ्वी सिंह जी और बाबा जतीनाथ जी#NK

किस्सा राजा गोपीचंद (लेखराज चौहान)गायक सत्ते फ़रमाना 04 मनै दे साची साच बता,तूं क्यूँ रोवै सै महतारी

