रामानंद सागर कृत श्री कृष्ण भाग 34 - बलराम और श्री कृष्ण का एक साथ मथुरा जाने का हठ

Watch This New Song Bhaj Govindam By Adi Shankaracharya :    • श्री आदि शंकराचार्य कृत भज गोविन्दम् | प्र...   तिलक की नवीन प्रस्तुति "श्री आदि शंकराचार्य कृत भज गोविन्दम्" अभी देखें :    • श्री आदि शंकराचार्य कृत भज गोविन्दम् | प्र...   _________________________________________________________________________________________________ कंस के बुलावे पर कृष्ण को मथुरा भेजने के लिये माता यशोदा तैयार नहीं होती हैं। अक्रूर उनसे कहते हैं कि ऐसा न करने पर कंस के सैनिक गोकुल में नरसंहार कर देंगे। आप सामान्य ढंग से कृष्ण को विदा करें अन्यथा कृष्ण बलराम अधीर होकर गलत कदम उठा सकते हैं। यशोदा नहीं मानती तब अक्रूर कहते हैं कि आप मुझपर भरोसा रखें। मैं राजभक्त हूँ और कृष्ण को अपने प्राण देकर भी बचाऊँगा। वह भरोसा देते हैं कि बलराम के प्राण बचाने के बाद मैं कृष्ण को बचाने की भी गुप्त योजना बना चुका हूँ परन्तु अभी इसका खुलासा नहीं कर सकता। अपनी योजना को सफल बनाने के लिये यादववीरों का एक बलिदानी जत्था भी तैयार है। यशोदा की दासी के माध्यम से कृष्ण जन्म से जुड़ी कथा घर - घर फैल जाती है। रहस्य, रहस्य नहीं रहता। गोकुल नगरवासी यशोदा के दुख से दुखी होते हैं। यशोदा कृष्ण के कक्ष में हैं। उनके नेत्रों से अश्रुओं की धार बह रही है। उन्हें कृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण होता है और हर स्मृति उन्हें और रुलाती है। मध्य रात्रि होने पर रोहणी बलराम को जगाती हैं और उन्हें अक्रूर के साथ जाने को कहती हैं। यह जानकर कि कृष्ण उसके साथ नहीं बल्कि अकेले मथुरा जा रहे हैं, बलराम चिन्तित होते हैं। बलराम कृष्ण को पुकराते हैं। अक्रूर वहाँ आ जाते हैं और तब बलराम को भी पता चल जाता है कि उनके व कृष्ण के असली माता पिता देवकी और वसुदेव हैं। कृष्ण और बलराम के भाई - भाई होने का भेद छिपाकर रखने की वजह भी अक्रूर बताते हैं। वह कहते हैं कि कंस को अब तक केवल कृष्ण के देवकी पुत्र होने का भेद पता चला है इसलिये बलराम को छिपाकर रखने की योजना बनायी गयी है। बलराम संकट की घड़ी में अपने भाई को यूँ छोड़कर जाने को तैयार नहीं होते हैं। अक्रूर जब यह कहते हैं कि कृष्ण को मथुरा बुलाने की आज्ञा उनके माता पिता ने दी है। बलराम के पास अपने तर्क हैं। वह कहते हैं कि मेरे पिता वसुदेव इस समय परतन्त्र हैं और कंस द्वारा उन्हें विवश किया गया होगा। अतएव मैं इसे स्वतन्त्र आज्ञा नहीं मानता हूँ और इसका पालन नहीं करूँगा। कृष्ण इस समस्त वार्तालाप को कक्ष के बाहर खड़े होकर सुनते हैं। कृष्ण बलराम के समक्ष आकर कहते हैं कि इस जनम में आप मेरे बड़े भाई हैं इसलिये यदि आपका निर्णय मेरे संग मथुरा जाने का है तो इसका पालन होगा। कृष्ण कहते हैं कि जन्म मृत्यु विधाता के हाथ है। कंस हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता है। इसके पश्चात कृष्ण अक्रूर की तरफ मुड़कर कहते हैं कि आपने इतना बड़ा झूठ कैसे बोल दिया कि मैं अपनी यशोदा मैया के पुत्र नहीं हूँ। कृष्ण कहते हैं कि मुझे किसने जन्म दिया, मैं नहीं जानता किन्तु जबसे मैंने आँखें खोली हैं, यशोदा मैया को ही दुलाते देखा है, दूध पिलाते देखा है, उनकी गोद में मैं लोरियां सुनकर सोया हूँ। कृष्ण की बातें सुनकर यशोदा और भी अधिक विह्वल होती हैं। कृष्ण बिस्तर पड़ी यशोदा के सिर पर हाथ फेर कर सांत्वना देते हैं और कहते हैं कि मैं संसार में कहीं चला जाऊँ, सदा आपका पुत्र रहूँगा। अक्रूर बलराम के हठ के कारण अपनी योजना बदलने पर विवश होते हैं। उधर हर गोकुलवासी कृष्ण के लिये अपनी जान देने की बात करता दिखायी पड़ता है। नन्द, यशोदा व कृष्ण कक्ष में हैं। यशोदा समझ रही हैं कि यह उनके पुत्र के साथ अन्तिम रात्रि है। कृष्ण उन्हें ईश्वरीय भक्ति और मोक्ष का ज्ञान देते हैं लेकिन यशोदा इस समय भक्ति नहीं, वात्सल्य के मोह में रहना चाहती हैं। विष्णु के अवतार कृष्ण भी अपनी माता के इस रूप पर मोहित होते हैं। वह माता यशोदा से अपने पीछे न रोने का वचन माँगते हैं। रात में गोपिकाऐं एक दूसरे घर का दरवाजा खटखटा कर अगले दिन कृष्ण के मथुरा जाने की सूचना देती हैं। उधर राधा अपने बिस्तर पर सोयी पड़ी हैं। उन्हें स्वप्न आता है कि कृष्ण से उनका हाथ छूट रहा है। कृष्ण उनसे दूर जा रहे हैं। राधा घबड़ाकर उठ बैठती हैं। तेज हवाएं वातावरण को और भी भयावह बनाती हैं। बरसाना में राधा और गोकुल में कृष्ण दोनों अपने-अपने झरोखे से चन्द्रमा को देखते हैं। वे चन्द्रमा के माध्यम से अपने हृदय की बात सम्प्रेषित करते हैं। कृष्ण कहते हैं कि अब मैं कभी गोकुल वापस नहीं आऊँगा तो क्या तुम मुझसे अन्तिम बार मिलने गोकुल नहीं आओगी। राधा इनकार करती हैं। कृष्ण कहते हैं कि मुझे अपनी राधा से एक बार मिलने की अभिलाषा है। इस पर राधारानी कहती हैं कि आप तो भगवान हैं। अभिलाषा और लालसा तो केवल मानवों को होती है। कृष्ण कहते हैं कि प्रेम की अभिलाषा तो भगवान को भी होती है। कृष्ण राधा से एकान्त में मिलने का वचन लेते हैं। In association with Divo - our YouTube Partner #SriKrishna #SriKrishnaonYouTube

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