Hukme Dekhaya Hukam Ko by Shri Rajan Swami Ji | SPJIN 16th Annual Function 2022
Hukme Dekhaya Hukam Ko by Shri Rajan Swami Ji | SPJIN 16th Annual Function 2022 Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook: / shri.rajan.swami Facebook: / shri.prannath.jyanpeeth Twitter: / raajanswami Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... 2. NIJANAND YOG (निजानन्द योग) - Collection of 60 Invaluable FAQs https://www.spjin.org/assets/files/ni... 3. CHITWANI MARGDARSHAN (चितवनि मार्गदर्शन) - Smallest and Best ever Pocket Guide to Meditation https://www.spjin.org/assets/files/ch... 4. DHYAN KI PUSHPANJALI (ध्यान की पुष्पाञ्जलि) - Detailed Question-Answer Sessions transcribed in this unique pearl of spiritual wisdom https://www.spjin.org/assets/files/dh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

सुख और दुःख से मुक्ति। श्री राजन स्वामी जी

Kirantan Granth - Shri Mukhvani Charcha by Shri Rajan Swami Ji | SPJIN 16th Annual Function 2022

In 9 Mauqoo Pe Hamesha Khamosh Raho Feroz Khan Motivation

ਜਪੁਜੀ ਸਾਹਿਬ ਵਿਚੋਂ ਸਮਝੋ ਕੀ ਸੱਚੀ ਦੁਨੀਆ ਖਤਮ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ? Will the world really end ?

देखिये कैसे स्वामी जी ने इन के सारे सवालों का जवाब दिया है अब उन महाराज की बलि बंद होगई है

Meher Sagar by Shri Rajan Swami Ji | SPJIN 16th Annual Function 2022 |

आम खाएं और Sugar घटाएं? प्रधानमंत्री के डॉक्टर की तो सुनो | Dr. Anoop Misra | Diabetes | SKT

Raas - Shri Prannath Ji - Shree Raas Prakaran वचन कह्या ते मन मां भरो | Shri Rajan Swami Ji

वरिष्ठ धर्मोंपदेशक श्री गाँधी पुजारी जी द्वारा वाणी चर्चा 🌹🌹 #shrirajshyama #वाणी #प्रणाम #youtube

जीवन में सतगुरु की आवश्यकता क्यों ? ।।ब्रम्हवाणी चर्चा ।।वक्ता:- श्री राजन स्वामीजी ।।@SPJIN

आत्माओं का दिल ही श्री राजजी का धाम होता हैं | श्री राजन स्वामी जी (Jamnagar)

श्री कृष्ण त्रिधा लीला | माहाकारण | Ep - 1 | 25 जून 2026 । ललित भगत । 191, श्री राज निवास, जयपुर

महाप्रलय कब और कैसे होगी श्री राजन स्वामी जी के मुखारविंद से ब्रह्मवाणी चर्चा

असली प्रेम कहाँ है? परमात्मा से जुड़ने का सरल मार्ग | @shrirajanswami @SPJIN

वरिष्ठ धर्मोंपदेशक श्री गाँधी पुजारी जी द्वारा मजलिस चर्चा #pranami_media #pranaam #paramdham

Man ki Chetna osho official

बिंद में सिंध समाया रे साधो | Vani Charcha | Sri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra 2023 | Aspur, Rajsthan

Mehar Sagar - Asha Pradeep ji & Amarjyoti ji

दो दिवसीय सत्संग समारोह

