जोइ वृषभानुनन्दिनी राधे, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे | युगल माधुरी (कीर्तन) | Ft.Akhileshwari Didi

जोइ वृषभानुनन्दिनी राधे, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको नित्य धाम बरसानो, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको रासस्थल वृंदावन, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जोइ कीरति की रति की मूरति, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी तनु छवि चम्पक वरनी, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके कनक मुकुट सिर सोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके मुकु मणिन दुति दमकति, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके शीश चन्द्रिका सोहति, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि सिर चूनरि झलमल झलकति, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके शीशफूल भल सोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके कच कारे घुघरारे, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी वेणी फुलन अलंकृत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके सिर सिन्दूर सुशोभित, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि कानन कुंडल भल सोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके भाल लाल बिंदी छवि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जा नासा नथ बेसर हलकति, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके सरस रसीले नैना, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके नैन सहज कजरारे, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके दृग रतनारे कारे, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके नैन सैन पिय घायल, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके दोउ कर कंकन सोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके कर चूरिन बहुरंगी, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके कर पत्र सुशोभित, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके कर अंगुरिन मुंदरिन दुति, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके पाणि रची मेंहँदी भल, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके नील वसन तन सोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके गर मणि मुक्तमाल भल, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके उर कंचुकि नवरंगी, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी कटि किंकिनि धुनि रुनझुन, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके पग पायल भल सोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके पद अँगुरिन बिछुवनि छवि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके चरण मिहावर सोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जोइ है सदा सुहागिनि श्यामा, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी छवि रस नित नव नव, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि तनु क्षण क्षण वर्धमान रस, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जा तनु छवि लखि छविहूँ लाजत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जो आपुन छवि आपुहिं मोहत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी भोरे मुख की मुसकनि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि भोरेपन पर बलि बलि पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी चितवनि लखि पिय मुर्छित, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी गवनि गयंद लजावनि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जा छवि सुख कहँ सहि न सकत पय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी ‘हा हा' खात रहत पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जो कर मान छिनहिं छिन पिय सन, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके सम या बड़ नहिं कोउ रस, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको कहत रसिक रासेश्वरि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी ब्रह्म करत अगवानी, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके रोम रोम रस टपकत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके चरण पलोटत प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी पदरज धरत शीश पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके पद चिह्नन चूमत पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके चरण मुकुट धर प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी छवि लखि गिरत धरणि पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके पाछे जय बोलत पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको नाम गाव मुरलिहिं पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी करत चाकरी प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी भृकुटि विलोकत प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको लाड़ लड़ावत नित पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि रिझवत मनिहारिन बनि पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि रिझवत लिलिहारिन बनि पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको रिझवत मालिनि बनि पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी कर मनुहार नित्य पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि खोजत रोवत कुंजन पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको चँवर दुरावत प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको व्यजन करत नित प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी डगर बुहारत प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी लेत बलैया प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी कृपा मनावत प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी दासिन पग पकरत पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि लखि हा हा खात सखिन सों सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि लखि भूलत भगवत्ता पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि लखि षडैश्वर्य भूलत पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि लखि लखत रहत पिय इकटक, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि छायाहुँ लखि हरि मूर्छित, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि लखि भूलत पिय चंचलता, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जो जगमोहनहूँ मन मोहिनि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके आगे भिक्षुक बन पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जो हैं महाभाव मादन तनु, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जो हैं जगदीश्वरहूँ ईश्वरि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी कृपा रसिकवर पिय भये, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जासु कृपा लहि कृपा करत पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जोइ परमात्मा की हैं आत्मा, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि राधे बिनु श्यामहुँ आधे, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि बिनु पलक कलप सम लग पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि संग कलप पलक सम लग पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जोइ जग स्वामिहुँ श्यामहुँ स्वामिनि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जोइ श्री वृन्दाविपिन विहारिणि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाको पार न पायो प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी नख दुति ब्रह्म कहावत, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी उमा रमा है किंकरि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाकी महल टहल चह प्रियतम, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जाके सँग सँग अष्ट महासखि, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे। जेहि गुन गावत नहिं अघात पिय, सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

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