किस्सा राजा गोपीचन्द (कवि लेखराज चौहान) गायक सत्ते फरमाणियां 01. के सुपने का जिक्र करूँ पिया
किस्सा राजा गोपीचन्द कहा जाता है कि एक समय राजा पदमसेन धौळागढ़ नामक रियासत में राज किया करते थे जिसकी राजधानी धारा नगरी में थी । उसकी राणी का नाम मैनावन्ती था जो उज्जैन के राजा गंधर्वसेन की पुत्री थी । राजा पदमसेन के पिता का नाम पृथ्वी तथा माताजी का नाम कमला बताया जाता है। जब उसके पिता श्री पृथ्वी का देहांत हुआ तो उसकी माता जी कमला भी अपने पति के साथ सती हो गई थी राजा पदमसेन की दो संतान थी ।एक पुत्र गोपीचन्द और दूसरी पुत्री चंद्रावळ । जब गोपीचन्द मात्र 12 वर्ष का तो उसके पिता का भी छोटी में उम्र में स्वर्गवास हो गया जिस कारण पुत्र गोपीचन्द का राजतिलक कर उसे राजसिंहासन पर बैठा दिया । गोपीचंद के लिए 16 राजकन्याओं के विवाह प्रस्ताव आए तो उसका विवाह 16 लड़कियों से करवा दिया गया । शादी होने के बाद 12 साल में उसके घर में 12 कन्याओं ने जन्म लिया लेकिन कोई पुत्र पैदा नहीं हुआ। एक रात गोपीचन्द की पटराणी पाटमदे को स्वप्न में गोपीचन्द एक योगी /भिक्षुक के रूप में दिखाई दिया तो उसे बहुत चिंता हुई क्योंकि उसने सुन रखा था कि 24 घंटो कि 64 घडियों में से एक घड़ी ऐसी भी होती है जब सपने में भविष्य की सच्ची घटना दिखाई दे जाती है । हां यह बात जरूर है कि अधिकतर वह घड़ी इंसान के जागते हुये ही गुजर जाती है । फिर भी वह अनिष्ट की आशंका जताते हुये अपने पति को क्या कहती है। गाणा न 1 पाटमदे राजा गोपीचन्द को के सुपने का जिक्र करूँ पिया सुपने में होग्या चाळा दरवाजे पै खड़ा हुआ तूं बण भिक्षा मांगण वाळा (टेक ) मैं छत कै ऊपर खड़ी हुई आवाज कान में आई थी पता लगा एक बाबाजी नै मेरे द्वारै अलख जगाई थी बाबा से वरदान मांग लूँ मैं मन में घणी उम्हाई थी भिक्षा घालण खातिर पूरे थाळ नै भर कै ल्याई थी एक हाथ में तुम्बी ले रहा दूसरे में ले रहा माळा (1) हाथ जोड़ कै भिक्षा घाली उसकी तरफ लखाई थी माथा उसका दम दम दमकै या चेहरे पै रुशनाई थी नीचे तक दाढ़ी लटकै घणी लांबी जटा बढाई थी एक बै तै मैं डर की मारी बहुत घणी घबराई थी हर की माया अजब निराळी था बोल कति तेरै ढाळा (2) इकतारा वो बजा रहा था अर कंधे पै लटकै झोळी तेरे में हुणियार मिलै और सूरत उसकी भोळी भोळी मनै लगा तनै जोगी बणकै लूट लई मैं दिन धोळी मन में पक्की जरगी भाजकै फेर मनै भरली कोळी तूं बोल्या मैं जोगी बणग्या,पास आण का कर टाळा (3) राजमहल में बेरा लाग्या हुई चिंता में तेरी सब राणी रो रो कै नै आँख सुजा ली ना थमी तेरी कन्या याणी सारी बात का पता लगा फेर हुआ अलग दूध पाणी लेखराज सुण बात ध्यान से तेरी माँ पाई बेटा खाणी सपना पूरा होग्या लागज्या तेरे घर कै एक दिन ताळा (4)

किस्सा राजा गोपीचंद (कवि लेखराज चौहान)गायक सत्ते फरमाणा 16 कति दिल लागै ना मेरा,कति दिल लागै ना मेरा

एक दूधवाला पति गली में अपमानित हुआ, 10 साल बाद कलेक्टर बनकर लौटा तो सच खुल गया

तेरी दुनिया में जो भी चला आता यह से नहीं जाना चाहता||हरियाणा की सुप्रसिद्ध रागनी||बिजेंदर बहादुरगढ़||

Live Gurudwara Sahib Shesh Ganj Sahib Chopehra Sahib Path Full |Chupehra Sahib | Chopehra Sahib #wmk

श्री राम कथा अत्यंत सुंदर प्रसंग न्यू लेटेस्ट कथा श्री राम भक्त एक बार जरूर सुने श्री राजेंद्र दास।

गोरखनाथ जी बाछल बागा में आए पीर बाबा बाल जती nath #smtemple #countrysideveer #Gorakhnath

Chichvarkin Saves Putin | Vitaly Portnikov

किस्सा राजा गोपीचंद (कवि लेखराज चौहान) गायक सत्ते फरमाणा 12.गोरखनाथ गुरुजी तेरी या महिमा अजब बताई

कमजोर सरकार और नाकारा विपक्ष #EP3349 #apkaakhbar #modi #cjp #delhipolice

किस्सा राजा गोपीचन्द(कवि लेखराज चौहान)गायक सत्ते फरमाना तूं बात मान ले बेटा मेरी या दुनिया आणी जाणी

किस्सा राजा गोपीचंद (लेखराज चौहान)गायक सत्ते फ़रमाना 04 मनै दे साची साच बता,तूं क्यूँ रोवै सै महतारी

Shaheed Ganj Sahib - Chopehra Sahib Path - Dhan Baba Deep Singh Ji - Model Town Ludhiana #chupehra

बेटा हो या बेटी हो मेरे बस/औरत की व्यथा/बेटे की आस /लेखक: कवि लेख राज चौहान/गायक: भाई राकेश किलोई

एक ब्रजवासी संत और महिला में कुटीया को लेकर हो गई लड़ाई सत्य घटना🙏#rajendradasjimaharaj #ramkatha

ਪ੍ਰਵਾਸੀ ਮਜ਼ਦੂਰ ਦੇ ਖ਼ੁਲਾਸੇ, ਪੰਜਾਬੀਓ ਦੇਖਿਓ ਆਹ VIDEO | Swarn Singh Tehna | Parvasi majdoor

किस्सा राजा गोपीचन्द (लेखराजचौहान)गायक सत्ते फरमाणा ,06 सदा कोए ना रहा जगत में कुदरत नै खेल रचाया सै

Rehasyamayi Kali Billi Aur Gareeb Ladke Ka Qissa | Hindi Urdu Islamic Moral Story #moralstory |

दरोगा साहब का गोल्डन जुबली रंग । रात बणा तबले आला। Haryanvi Competition Ragni @ATOZRAGNI

Hanuman Chalisa Bhajans ! श्री हनुमान चालीसा ! संकटमोचन हनुमान अष्टक ! गुलशन कुमार हनुमान चालीसा

