श्री कृष्ण भाग 75 - पाण्डव पहुँचे लाक्षागृह | पाण्डवों को बचाने की योजना । रामानंद सागर कृत

"Ramanand Sagar's Shree Krishna Episode 75 - Pandav Pohoche Lakshagraha. Pandavon Ko Bachane Ki Yojana. शकुनि की चाल सफल होती दिखती है। हस्तिनापुर नरेश धृतराष्ट्र कुन्ती और पांचों पाण्डव को वारणावत में होनी वाली शिव पूजा में सम्मिलित होने की आज्ञा दे देते हैं जहाँ शकुनि ने एक लाक्षागृह का निर्माण कराया हुआ है और उसका षड्यन्त्र यह है कि जब पाण्डव रात्रि विश्राम के लिये वहाँ जायेंगे तो वह लाख से बने उस महल में आग लगवा देगा, जिससे इस आग में कुन्ती और पांचों पाण्डुपुत्र जलकर मर जायें। शकुनि की इस चाल से अनभिज्ञ पाण्डव अपनी माता कुन्ती के साथ वारणावत को प्रस्थान करते हैं। द्वारिका में श्रीकृष्ण पाण्डवों की सुरक्षा को लेकर चिन्तन करते हैं। हस्तिनापुर में महामंत्री विदुर को एक साधु द्वारा प्रसाद स्वरूप भेजा गया एक फल मिलता है। विदुर उस फल को खोलते हैं तो उसके एक अन्दर एक पत्र था जिसमें लिखा था, ‘‘शिव मन्दिर के पीछे, वट वृक्ष के नीचे।’’ यह विदुर को उनके गुप्तचर द्वारा भेजा गया कूट सन्देश था। रात्रि में विदुर छद्मवेश में निर्धारित स्थान पर पहुँचते हैं। वहाँ उन्हें साधुवेश में अपना गुप्तचर वज्रदत्त मिलता है। वह उन्हें बताता है कि शकुनि ने पांचों पाण्डवों की सामूहिक हत्या का षड्यन्त्र रचा है और उसकी चाल इतनी सटीक पड़ी है कि पाण्डव स्वयं अपनी चिता की ओर बढ़े चले जा रहे हैं। विदुर सन्न रह जाते हैं। वज्रदत्त कहता है कि शकुनि अपनी चाल में सफल भी हो जाता किन्तु मुझे कहीं से यह सूचना मिल गयी कि कई टन लाख वारणावत में पहुँचायी जा रही है। तब मैं पीछा करते-करते इस षड्यन्त्र की तह तक पहुँच गया। विदुर पाण्डवों को बचाने की योजना निरूपित करते हैं। वह वज्रदत्त से कहते हैं कि पाण्डव अगले दिन संध्या तक वारणावत पहुँचेंगे किन्तु तुम तुरन्त तेज गति से दौड़ने वाले अश्व से प्रस्थान कर जाओ तो समय रहते उनसे पहले वारणावत पहुँच सकते हो। पाण्डव मार्ग में रात्रि विश्राम के पड़ाव डालते हैं। अर्जुन के मन में किसी अनहोनी की आशंका उपजती है। तब वह और भीम युवराज युधिष्ठिर की सुरक्षा के लिये हर पल उनके साथ रहने का संकल्प लेते हैं। लाक्षागृह में शकुनि के सैनिक दास दासियों के वेश में पाण्डवों के लिये तैनात कर दिये जाते हैं। उन्हें इस बात के निर्देश दिये जाते हैं कि खाने पीने की वस्तुओं में बेहोशी की दवा मिला दी जाये ताकि जब लाक्षागृह में आग लगे तो पाण्डव भागने की स्थिति में न रहें। विदुर अपने महल के मन्दिर में प्रभु के सामने पाण्डवों को बचाने की विनती कहते हैं। उधर द्वारिकाधीश उनके इस भाव पर हँसते हैं और बलराम से कहते हैं कि विदुर जैसा परम ज्ञानी भी इस समय विचलित है जबकि वह जानते हैं कि जिसके साथ मैं हूँ, उसका कभी अनर्थ नहीं हो सकता। वारणावत में लाक्षागृह से कुछ दूरी पर वज्रदत्त अपने आदमियों के साथ पहुँचता है। वह उनसे नदी के किनारे से लाक्षागृह तक एक सुरंग खोदने को कहता है। उसे आशंका है कि आग लगाने के बाद भी शकुनि के सैनिक लाक्षागृह को बाहर से घेरे रहेंगे ताकि अगर पाण्डव किसी तरह बाहर निकल आयें तो उन्हें मारकर वापस अन्दर फेंका जा सके। इसलिये वो लम्बी सुरंग बनाने की योजना बनाता है ताकि भागते समय पाण्डव शकुनि के सैनिकों की दृष्टि में न पड़े। वह अपने आदमियों से कहता है कि जैसे ही पाण्डव सुरंग से बाहर निकलें, उन्हें नाव में बैठाकर नदी के उस पार सुरक्षित ले जायें। कुछ देर बाद पाण्डवों के रथ लाक्षागृह आ पहुँचते हैं। वज्रदत्त और उसके कुछ साथी वेश बदलकर उन श्रमिकों के समूह में शामिल हो जाते हैं जो पाण्डवों का सामान उठाने के लिये बुलाये गये थे। इस तरह वे लोग भी लाक्षागृह के भीतर पहुँचने में सफल हो जाते हैं और अन्दर ही छिप जाते हैं। कुन्ती और पाण्डुपुत्र विश्राम कक्ष में जाने से पहले महल प्रभारी उन्हें बताता है कि पूजा का समय अगले दिन संध्याकाल का है। युधिष्ठिर उसे आदेश देते हैं कि अगले दिन प्रातः वन्दना के बाद प्रजा के जो लोग मुझसे मिलना चाहें, उन्हें आने दिया जाये। रात्रि में जब कुन्ती और पाण्डव अपने अपने शयन कक्ष में जाते हैं, वज्रदत्त और उसके साथी लाक्षागृह में छिपकर शकुनि के आदमियों पर दृष्टि रखते हैं। Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर Chief Asst. Director - Yogee Yogindar मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर Camera - Avinash Satoskar कैमरा - अविनाश सतोसकर Music - Ravindra Jain संगीत - रविंद्र जैन Lyrics - Ravindra Jain गीत - रविंद्र जैन Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव Cast / पात्र Sarvadaman D. Banerjee सर्वदमन डी. बनर्जी Swapnil Joshi स्वप्निल जोशी Ashok Kumar अशोक कुमार बालकृष्णन Deepak Deulkar दीपक डेओलकर Sanjeev Sharma संजीव शर्मा Pinky Parikh पिंकी पारिख Reshma Modi रेशमा मोदी Shweta Rastogi श्वेता रस्तोगी Paulomi Mukherjee पौलोमी मुखर्जी Sunil Pandey सुनील पांडेय Damini Kanwal दामिनी कँवल Sulakshana Khatri सूलक्षणा खत्री Shahnawaz Pradhan शाहनवाज़ प्रधान Vilas Raj विकास राज Sandeep Mohan संदीप मोहन In association with Divo - our YouTube Partner #shreekrishna #shreekrishnakatha #krishna"

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