Skand 10 Adhyay 84 | श्रीमद्भागवत महापुराण | ऋषियों का आगमन, वसुदेव जी का यज्ञ और नन्दबाबा की विदाई
📜 Shrimad Bhagwat Mahapuran | Skandha 10, Chapter 84 | Arrival of the Sages, Vasudeva's Yajna, and Nanda Baba's Farewell इस अध्याय में कुरुक्षेत्र के महासम्मेलन में व्यास, नारद आदि महान ऋषियों का आगमन, भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा संत-महिमा का अद्भुत उपदेश, वसुदेव जी द्वारा ऋषियों के मार्गदर्शन में महान यज्ञ का अनुष्ठान, और अंततः नन्दबाबा व व्रजवासियों का भारी मन से गोकुल लौटना वर्णित है। कुरुक्षेत्र में जब यदुवंशी, पाण्डव और अन्य राजा उपस्थित थे, तब वहाँ वेदव्यास, देवर्षि नारद, विश्वामित्र, वसिष्ठ, भृगु, शुकदेव आदि महान ऋषि-मुनि पधारे। भगवान् श्रीकृष्ण, बलराम और सभी राजाओं ने उठकर उनका स्वागत किया और श्रद्धापूर्वक उनके चरण पखारे। साक्षात् परब्रह्म होते हुए भी श्रीकृष्ण ने लोक-शिक्षा के लिए ऋषियों की वंदना की और संत-महिमा बताते हुए कहा कि तीर्थों के जल और मिट्टी-पत्थर की मूर्तियों से मनुष्य धीरे-धीरे पवित्र होता है, किन्तु संतों के केवल दर्शन मात्र से ही अंतःकरण शुद्ध हो जाता है। जो व्यक्ति केवल इस हाड़-मांस के शरीर को ही आत्मा मानता है और संतों का संग नहीं करता, वह पशु के समान है। तदनन्तर वसुदेव जी ने ऋषियों के पास जाकर पूछा कि मनुष्य कर्मों के बंधन से कैसे मुक्त हो सकता है। देवर्षि नारद और अन्य ऋषियों ने उन्हें निष्काम भाव से भगवान् विष्णु की प्रसन्नता के लिए यज्ञ करने का उपदेश दिया। ऋषियों ने वसुदेव जी को यह भी स्मरण कराया कि साक्षात् परमेश्वर ही उनके पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए हैं, अतः वे मोह त्यागकर उनकी शरण लें। ऋषियों के निर्देश और पुरोहितत्त्व में वसुदेव जी ने कुरुक्षेत्र में एक विशाल और विधि-विधान पूर्ण यज्ञ का अनुष्ठान किया। यज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न होने के पश्चात् सभी राजा और संबंधी विदा होने लगे। किन्तु नन्दबाबा और माता यशोदा का श्रीकृष्ण से बिछुड़ने का मन नहीं कर रहा था। वे श्रीकृष्ण के प्रेम-पाश में बँधकर तीन महीने तक कुरुक्षेत्र में ही रुके रहे। अंततः श्रीकृष्ण और बलराम ने उन्हें बहुत समझाया और अपार प्रेम, वस्त्र व आभूषण देकर विदा किया। नन्दबाबा भारी मन और अश्रुपूर्ण नेत्रों से गोप-गोपियों के साथ व्रज लौट गए, और यदुवंशी भी द्वारका वापस आ गए। 🔲 इस अध्याय के मुख्य बिंदु: ऋषियों का आगमन: कुरुक्षेत्र में वेदव्यास, भृगु, नारद आदि महान मुनियों का पधारना और श्रीकृष्ण द्वारा उनका सत्कार। संत महिमा: श्रीकृष्ण द्वारा यह उपदेश देना कि संतों का दर्शन तीर्थों और मूर्तियों से भी अधिक पवित्र करने वाला और शीघ्र फलदायी होता है। वसुदेव जी का प्रश्न: वसुदेव जी द्वारा ऋषियों से कर्म-बंधन से मुक्ति का मार्ग पूछना। ऋषियों का उपदेश: ऋषियों द्वारा वसुदेव जी को निष्काम यज्ञ करने और श्रीकृष्ण को साक्षात् ईश्वर मानकर उनकी शरण लेने का बोध कराना। वसुदेव जी का यज्ञ: वसुदेव जी द्वारा ऋषियों के आचार्यत्व में कुरुक्षेत्र में महान यज्ञ का सफल अनुष्ठान करना। नन्दबाबा की विदाई: श्रीकृष्ण के विरह की आशंका से व्रजवासियों का महीनों तक रुकना और अंततः अश्रुपूर्ण नेत्रों से गोकुल लौटना। ✨ सार: यह अध्याय सत्संग और संत-समागम की अपार महिमा को स्थापित करता है। साक्षात् भगवान् होकर भी श्रीकृष्ण ने ऋषियों के चरण धोकर यह शिक्षा दी कि समाज में ज्ञानी महापुरुषों का सम्मान कैसे करना चाहिए। वसुदेव जी का यज्ञ यह बताता है कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए निष्काम कर्म ही मुक्ति का साधन है। अध्याय के अंत में नन्दबाबा की विदाई का प्रसंग एक बार फिर व्रजवासियों के उस निश्छल और सर्वोत्कृष्ट प्रेम को दर्शाता है, जिसके अधीन स्वयं त्रिलोकीनाथ रहते हैं। 🎙️ Narrated by: Pandit Dr. Kashinath Mishra Ji 📜 Presented by: Pandit Dr. Kashinath Mishra Ji 📖 फ़ॉर्मेट (Format): Shuddh Sanskrit recitation Line-by-line Hindi explanation Emotional visuals to bring ras and context Designed for both shravan and adhyayan 🔔 Subscribe for the next chapters: @panditkashinathmishraji 🌐 वेबसाइट (Website): https://www.bhavishyamalika.com Queries: Shrimad Bhagwat Mahapuran Skandha 10 Adhyay 84 explanation Sages visit Kurukshetra to meet Krishna Lord Krishna explains the glory of saints Sant Mahima Vasudeva performs Yajna at Kurukshetra Pandit Dr Kashinath Mishra Bhagwat Katha Skandha 10 Adhyay 84 Hashtags: #panditkashinathmishraji #shreemadbhagawat #bhagwatkatha #bhagwatkathalive #krishnaleela #kurukshetra #santmahima #vasudevayajna #dwarkadhish

Skand 10 Adhyay 88 | श्रीमद्भागवत महापुराण | महर्षि भृगु की त्रिदेव परीक्षा और पुत्र वापसी

Skand 10 Adhyay 86 | श्रीमद्भागवत महापुराण | अर्जुन द्वारा सुभद्रा हरण और श्रुतदेव बहुलाश्व पर कृपा

मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे | Pandit Dr. Kashinath Mishra Ji

Skand 10 Adhyay 85 | श्रीमद्भागवत महापुराण | वसुदेव को तत्त्वज्ञान और देवकी के छः पुत्रों की वापसी

भगवद गीता || अध्याय 2 सांख्य योग || श्लोक और अर्थ || गीता ज्ञान ||

When Does a Sinner's Bad Time Really Begin? | Adi Shankaracharya's Karma Theory That 99% Don't Know

क्या हुआ जब द्वारिकाधीश Shri Krishna मिलने पहुंचे राधा जी से? सुनिए Dr Kumar Vishwas के अंदाज में!

Morning Anxiety? 🌿 | Raag Bhairavi inspired Bansuri (Complete Version) for Calm & Clarity

2026 के अंतिम 6 महीनों से जुड़ी कभी न भुलाने वाली Shocking Predictions ! Acharya Reena Sharma

सम्पूर्ण रामायण चौपाई ~ मंगल भवन अमंगल हारी | रामायण ~ Ramayan Chaupai || #ram Katha 2025

Skand 10 Adhyay 87 | श्रीमद्भागवत महापुराण | वेद स्तुति (श्रुति गीता) और परब्रह्म की महिमाविवरण

Skand 10 Adhyay 83 | श्रीमद्भागवत महापुराण | द्रौपदी और श्रीकृष्ण की पटरानियों का संवाद

Skand 10 Adhyay 88 | श्रीमद्भागवत महापुराण | विष्णु-भक्त और शिव-भक्त का भेद

Vishnu Sahasranamam | विष्णु सहस्रनाम @AbhinavDuttMusic @ChetanGhodeshwar @Sonalduttamusic

Skand 10 Adhyay 78 | श्रीमद्भागवत महापुराण | दन्तवक्त्र-विदूरथ वध और बलराम जी द्वारा रोमहर्षण सूत वध

Vivekchudamani Complete Audiobook in Hindi | Adi Shankaracharya | Advaita Vedanta | Spiritual Spirit

सम्पूर्ण रामायण चौपाई ~ मंगल भवन अमंगल हारी | रामायण ~ Ramayan Chaupai || #ram Katha 2026

घर में चलाओ ये सुंदरकांड पाठ 🏡 सारी परेशानियां दूर होंगी | Full Path -Sampurn Sunderkand

Hearing, Chanting and Remembering (Part 1) | Amarendra Dāsa

