स्वसंवेद की शास्त्रीय विवेचना। @SPJIN @shrirajanswami

स्वसंवेद (पांचवें वेद) की शास्त्रीय विवेचना। वक्ता- श्री राजन स्वामी सृष्टि के आरम्भ से ही मनीषियों के हृदयपटल पर ये प्रश्न प्रस्फुटित हुए जिनके समाधान में सभी ऋषि-महर्षि प्रयासरत रहे हैं कि 1- मैं कौन हूं? 2 कहां से आया हूं? 3- मेरी आत्मा का प्रियतम कौन है? 4- कहां है? 5- कैसा है? 6- क्या करता है? 7- और उसको पाने का मार्ग क्या है? इन प्रश्नों के उत्तर की खोज में ही अध्यात्म की यात्रा प्रारंभ होती है और उत्तर प्राप्ति ही अध्यात्म का परम लक्ष्य है | इसी उत्तर की खोज में जब हम धर्मग्रंथों में दृष्टिपात करते हैं तो पता चलता है कि सभी ग्रन्थों में इनका केवल संकेतों में उत्तर दिया गया है | श्री प्राणनाथ जी की वाणी उन सभी संकेतों को खोलकर उनमें सामंजस्य स्थापित करती है इसीलिये इसे तारतम्य ज्ञान भी कहा जाता है| अपने आत्मस्वरूप की पहचान के लिये आवश्यक सम्पूर्ण ज्ञान निहित होने से इसे स्वसंवेद कहा जाता है | प्रस्तुत प्रवचन में शास्त्रोक्त उन्हीं कुछ बिन्दुओं पर प्रकाश डाला गया है जिससे यह जाना जा सके कि ऐसा क्या कारण है कि श्री प्राणनाथ जी की वाणी को ही स्वसंवेद कहा जाय? Please subscribe to our channel at: https://goo.gl/maqz3p PS: Please Don't Forget to SUBSCRIBE to our "SPJIN" channel for an abundant wealth of spiritual discourses, devotional music and thought-provoking discussions. Widen your knowledge on Supreme Truth God, True Master (Satguru), True purpose of life, Jeeva & Soul, Meditation, Moral ethics and more. New videos are added regularly. So Keep watching, learning and sharing. Pranam Ji. नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

निजानन्द समाज के प्रचलित प्रश्नों का समाधान भाग - 1/2| श्री प्राणनाथ जी की वाणी | @shrirajanswami
▶︎

निजानन्द समाज के प्रचलित प्रश्नों का समाधान भाग - 1/2| श्री प्राणनाथ जी की वाणी | @shrirajanswami

आत्म समर्पण कैसे किया जाता है?@श्री राजन स्वामी Aatm samarpan kaise kiya jata hai?@RAJANSWAMI @SPJIN
▶︎

आत्म समर्पण कैसे किया जाता है?@श्री राजन स्वामी Aatm samarpan kaise kiya jata hai?@RAJANSWAMI @SPJIN

राजजी को कैसे पुकारें By Shri Rajan Swami Ji | Shri Prannath Ji -  @SPJIN
▶︎

राजजी को कैसे पुकारें By Shri Rajan Swami Ji | Shri Prannath Ji - @SPJIN

ये बात है सच्चे दीवानों की | डॉ. प्रवीण बत्रा  | #spjin @amanpranami633  ​
▶︎

ये बात है सच्चे दीवानों की | डॉ. प्रवीण बत्रा | #spjin @amanpranami633 ​

जन्म से पहले 84 लाख योनियों में कैसे भटकती है आत्मा ? - Ashok Raaj | Shri Prannath Jyanpeeth | SPJIN
▶︎

जन्म से पहले 84 लाख योनियों में कैसे भटकती है आत्मा ? - Ashok Raaj | Shri Prannath Jyanpeeth | SPJIN

परमात्मा एक है: श्री प्राणनाथ जी की दिव्य वाणी | श्री राजन स्वामी जी | Shri Prannath Ji - @SPJIN
▶︎

परमात्मा एक है: श्री प्राणनाथ जी की दिव्य वाणी | श्री राजन स्वामी जी | Shri Prannath Ji - @SPJIN

आत्म विस्मरण से कैसे बचें ? | How to avoid self-forgetfulness ?
▶︎

आत्म विस्मरण से कैसे बचें ? | How to avoid self-forgetfulness ?

જાણો નિજાનંદ સંપ્રદાય વિશે,નિજાનંદ સંપ્રદાય શું છે? કેમ પોતાને બાકી કરતા અલગ માને છે? Rajan Swami
▶︎

જાણો નિજાનંદ સંપ્રદાય વિશે,નિજાનંદ સંપ્રદાય શું છે? કેમ પોતાને બાકી કરતા અલગ માને છે? Rajan Swami

SPJIN 💖 परम पूज्य राजन स्वामी जी के मध्यम से मोडासा गुजरात में प्रश्नों का समाधान
▶︎

SPJIN 💖 परम पूज्य राजन स्वामी जी के मध्यम से मोडासा गुजरात में प्रश्नों का समाधान

ईश्वर है या नहीं? दिमाग के पोर खोलने वाली बातचीत | Blasphemy | Kushal Mehra | Kitabwala
▶︎

ईश्वर है या नहीं? दिमाग के पोर खोलने वाली बातचीत | Blasphemy | Kushal Mehra | Kitabwala

ज्ञानपीठ के सचिव राजेन्द्र सिंह चौहान जी से सुनिये ‘पालीवाल’ जी के आरोपों का पूरा सच।
▶︎

ज्ञानपीठ के सचिव राजेन्द्र सिंह चौहान जी से सुनिये ‘पालीवाल’ जी के आरोपों का पूरा सच।

प्राणनाथ महिमा तथा निजानंद समाज की विश्व को देन । डॉ प्रवीण जी
▶︎

प्राणनाथ महिमा तथा निजानंद समाज की विश्व को देन । डॉ प्रवीण जी

तुम्हारी ‘मैं’ नश्वर में है या अविनाशी में ?  | your 'I' in the mortal or in the immortal ?
▶︎

तुम्हारी ‘मैं’ नश्वर में है या अविनाशी में ? | your 'I' in the mortal or in the immortal ?

आत्मा को जानने की विधि क्या है ? ||Yug-Purush || What is the method to know the soul?
▶︎

आत्मा को जानने की विधि क्या है ? ||Yug-Purush || What is the method to know the soul?

परिवार और परमात्मा। कैसे संतुलन साधे ? डॉ. प्रवीण जी @SPJIN  @shrirajanswami
▶︎

परिवार और परमात्मा। कैसे संतुलन साधे ? डॉ. प्रवीण जी @SPJIN @shrirajanswami

ऐसा क्या करे की हृदय में परमात्मा के लिए प्रेम पैदा हो? @shrirajanswami @SPJIN
▶︎

ऐसा क्या करे की हृदय में परमात्मा के लिए प्रेम पैदा हो? @shrirajanswami @SPJIN

वाणी समझने का तरीका । आचार्य अशोक जी   SPJIN 1080p, h264
▶︎

वाणी समझने का तरीका । आचार्य अशोक जी SPJIN 1080p, h264

प्रभु महावीर ने सुनाई वासना की भयानक घटना 🤯 | Updeshmala Granth : Ep 25
▶︎

प्रभु महावीर ने सुनाई वासना की भयानक घटना 🤯 | Updeshmala Granth : Ep 25

सब से बडी दार्शनिक बहस - अद्वैत vs द्वैत vs त्रैत
▶︎

सब से बडी दार्शनिक बहस - अद्वैत vs द्वैत vs त्रैत

भ्रामक तथ्यों का निराकरण (भाग - 2) ‘‘परमधाम में राधा कृष्ण!!!’’
▶︎

भ्रामक तथ्यों का निराकरण (भाग - 2) ‘‘परमधाम में राधा कृष्ण!!!’’