श्री जिनवर का मंगल शासन | श्रद्धेय ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Shri Jinvar Ka Mangal Shashan
श्री जिनवर का मंगल शासन श्री जिनवर का मंगल शासन, सहजपने स्वीकार हमें। श्री गुरुवर का शुभ अनुशासन, सहजपने स्वीकार हमें ।।टेक।। वस्तु स्वरूप समझना है, भेदज्ञान उर धरना है। देहादिक से भिन्न शुद्ध, आतम का अनुभव करना है।। रत्नत्रय ही सुख का साधन, सहजपने स्वीकार हमें ।।1।। पर द्रव्यों का दोष नहीं है, दुख का कारण मोह सही है। व्यर्थ भटकना है बाहर में, अपना सुख अपने में ही है।। ज्ञानानंदमयी निज आतम, सहजपने स्वीकार हमें ।।2।। सर्व विकल्प अकिंचित्कर हैं, मूढ़ व्यर्थ बोझा ढोता है। आर्त्तध्यान कितना ही कर लो, जो होना है वह होता है।। वस्तु का स्वधीन परिणमन, सहजपने स्वीकार हमें ।।3।। हो सम्यक् पुरुषार्थ जीव का, कारण सर्व सहज मिलते। भायें सम्यक् तत्त्व भावना, सुगुण प्रसून सभी खिलते।। उदासीनता ही आनंदमय, सहजपने स्वीकार हमें ।।4।। वीतरागता श्री जिनवर की, अब आदर्श हमारा है। अहो! अहो! समभावी गुरुवर, का ही हमें सहारा है।। मोही जग तो अशरण ही हैं, सहजपने स्वीकार हमें ।।5।। सदा विराजो हृदय हमारे, अहो! अहो! निर्ग्रन्थ गुरु। राग छुड़ाओ, मुक्ति मार्ग में हमें बढ़ाओ अहो गुरु।। सम्यक् आराधनमय जीवन, सहजपने स्वीकार हमें ।।6।। • श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी 'आत्मन्' __________________________________________ Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji 'Aatman' Singer - Anekant Jain, Rehli (Madhya Pradesh) Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon

आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह

पार्श्व प्रभु तव दर्शन से | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Parsva Prabhu Tav Darshan Se

🪔 जय जय आरती आदि जिनंदा | भगवान आदिनाथ प्रभु की मंगल आरती

जीवन सूत्र - 57 | जीतें अपनी बुराइयों को | 17 JULY 2026 | Motivation |Aadityasagar ji | Pravachan |

माता पुत्र तुम्हारा, नाथ हमारा जन्मकल्याणक भक्ति | ब्र. रवीन्द्रजी | Mata Putra Tumhara Nath Hamara

सुखी जीवन जीने का उपाय : सुखी जीवन पुस्तक से : परिचर्चा

Sahajata

कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill

बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna

आत्मन् पीयूष निर्झर | प्रथम कलश | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | प्राण प्रतिष्ठा गीतांजलि

नगरी हो सिद्धों सी...., अन्तर्ध्वनि षष्ठम पुष्प, पंडित संजीव जैन

आत्मन् पीयूष निर्झर-2 | द्वितीय कलश | श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी 'आत्मन्' | प्राण प्रतिष्ठा गीतांजलि

SAMTA SODASHI || समता षोडशी || B.B.Ravindra Aatman || SINGER ANUBHAV JAIN INDORE || 2025 || #song

भगवान ऋषभदेव के 13 भवों की दिव्य यात्रा | कैसे बने प्रथम तीर्थंकर ? Hindi

भगवान महावीर के प्रति |Bhagwan Mahavir Ke Prati | तुम्हें जानकर जग तुमसे अनजान रह गया -Babu Yugal Ji

15-07-2026 मंगल प्रवचन चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज गोयल नगर इंदौर

आनंद का दिन आयेगा आयेगा | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Aanand ka din aayega aayega| दीक्षा कल्याणक भजन

देह जाए तो भले... जिनधर्म रहना चाहिए।जैन आध्यात्मिक भजन।jain aadhyatmik Bhajan।Dr.Vivek chidwara।

पूजन रहस्य - ब्र. श्री रवीन्द्रजी 'आत्मन्' | जिनवर गुणगान |स्वर @divyanshjainbhajan PujanRahasya

