मंगलमय निर्वाण की बेला | श्रद्धेय ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | MangalMay Nirvaan ki bela
मंगलमय निर्वाण की बेला मंगलमय निर्वाण की बेला, छाया हर्ष महान रे। जयवन्तो भगवान आत्मा, जयवन्तो भगवान रे ।। टेक।। अशरीरी प्रभु ज्ञान शरीरी, जय-जय ज्ञानानंदमय, सकल कर्ममल शून्य महेश्वर हुए सु परमानंदमय। जगत विभव से रहित विभवमय पाया अविचल थान रे ।।1।। लोक शिखर पर जाय विराजे, जगत पूज्य होकर स्वामी, शुद्धातम सर्वोत्कृष्ट है सिद्ध हुआ त्रिभुवन नामी। ध्रुव मंगल भगवान आत्मा, हुआ सहज श्रद्धान रे ।।2।। अहो! आपके हो अनुगामी, निज आतम आराधें हम, बाह्य विभव को धूल समझकर अपरिग्रह व्रत धारें हम। निजानंद में तृप्त रहें प्रभु प्रगटे निश्चल ध्यान रे ।।3।। असत् विभाव सहज नाशेंगे, सकल कर्म विनशायेंगे, आप सरीखे गुण अनंत प्रभु, परिणति में विलसायेंगे। आवागमन मिटेगा निश्चय, पावें पद निर्वाण रे ।।4।। • श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी 'आत्मन्' __________________________________________ Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji 'Aatman' Singer - Swayam Jain, Sihor Bhopal Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon

आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह

आत्मन् पीयूष निर्झर-2 | द्वितीय कलश | श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी 'आत्मन्' | प्राण प्रतिष्ठा गीतांजलि

नन्दीश्वर द्वीप कहाँ है? जैन ब्रह्मांड का सबसे रहस्यमयी तीर्थ#Jainism #NandishwarDweep #jain_wisdom

पार्श्व प्रभु तव दर्शन से | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Parsva Prabhu Tav Darshan Se

Shanka Samadhan 01 | Ashok Nagar, 2008 | Pt. Dr. Uttamchand Ji Jain, Seoni

नगरी हो सिद्धों सी...., अन्तर्ध्वनि षष्ठम पुष्प, पंडित संजीव जैन

निर्वाणकांड स्तोत्र | करोड़ों मुनियों की मोक्ष गाथा | Nirvan Kand Full Song With Meaning

मंगल विहार | श्रद्धेय ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Mangal Vihar

#03. वस्तु व्यवस्था का परिणमन चाहने से नहीं होता | स्वाध्याय मंदिर,अमायन,प्रातः 08.10.16

01 ध्यान - आर्त ध्यान, रौद्र ध्यान आदि Minneapolis Minnesota USA 🇺🇸 sorry for sound

आत्मन् पीयूष निर्झर | प्रथम कलश | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | प्राण प्रतिष्ठा गीतांजलि

#19. To Attain Ultimate Bliss, One Needs the Nectar of the Pure Soul, Not Water | Morning 03-02-17

अन्तर्ध्वनि "षष्टम् पुष्प", रचना एवं स्वर — पंडित संजीव जैन

प्रभुवर का निर्वाण दिवस | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Prabhuvar ka nirvan divas

कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill

Suno Chandaji Simandhar Parmatam

बहु पुण्य पुंज प्रसंग से | BAHU PUNYA PUNJ PRASANG SE | AMULYA TATTVA VICHAR | "SHRIMAD RAJCHANDRA"

बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna

श्री सकुनराज जी लोढ़ा विजयनगर - एक अनौपचारिक चर्चा

