निरावरण स्वभाव NIRAVARAN SWABHAV | आध्यात्मिक भजन | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

(सहज पाठ संग्रह) निरावरण स्वभाव आवरण होते हुए भी, निरावरण स्वभाव है। बंधन अरे पर्याय में, निर्बंध शाश्वत भाव है।। 1।। ओट कण की दृष्टि पर, पर्वत नजर आता नहीं। तिनके से ढक सकता नहीं, शाश्वत प्रगट गिरिराज है ।। 2 ।। त्यों आवरण है मोह का, रे मात्र तेरी दृष्टि पर। शाश्वत प्रकाशमयी सु चिन्मय, परम निर्मल भाव है ।। 3 ।। अब मोड़कर निज दृष्टि, अन्तर माँहि ध्रुव प्रभुता लखो। मैं सदा सुख सम्पन्न प्रभु, अनुभव करो, श्रद्धा करो ।। 4 ।। मैं मूढ़ पामर दीन दुखिया, भ्रान्ति अब तज दीजिए। त्रैलोक्य की प्रभुता अरे, निज में ही तुम लख लीजिए ।। 5 ।। श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’ _____________________________________ Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji ‘Aatman’ Singer – Vandana Parakh, Rajnandgaon Backing Vocal– Anamika Bardiya, Rajnandgaon Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon Special thanks - ​⁠​⁠​⁠ ​⁠​⁠ Guru kahan art museum. निरावरण स्वभाव प्रवचन-    • निरावरण स्वभाव (सहज पाठ संग्रह) वाशी, 2025  

आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह
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आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह

ध्रुवरूप अहो! मम अंतर में | Dhruvroop Aho Mam Antar Men | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
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ध्रुवरूप अहो! मम अंतर में | Dhruvroop Aho Mam Antar Men | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

#49. Special seminar on “Stress-free life”; A Carefree Joyful Life | Chhatrapati Sambhajinagar, N...
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#49. Special seminar on “Stress-free life”; A Carefree Joyful Life | Chhatrapati Sambhajinagar, N...

अब हम सहज भये न रुलेंगे | - बा. ब्र. पं. सुमतप्रकाश जी | Ab Hum Sahaj Bhaye Na Rulenge
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अब हम सहज भये न रुलेंगे | - बा. ब्र. पं. सुमतप्रकाश जी | Ab Hum Sahaj Bhaye Na Rulenge

मुझे है स्वामी, उस बल की दरकरार | पं. नाथुरामजी | Mujhe Hai Swami Us Bal Ki Darkaar | Jain Bhajan
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मुझे है स्वामी, उस बल की दरकरार | पं. नाथुरामजी | Mujhe Hai Swami Us Bal Ki Darkaar | Jain Bhajan

कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill
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कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill

अपने में सावधान | आध्यात्मिक भजन | ब्र. श्री रवींद्रजी 'आत्मन्' | सहजपाठ संग्रह | Apne Me Savdhan
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अपने में सावधान | आध्यात्मिक भजन | ब्र. श्री रवींद्रजी 'आत्मन्' | सहजपाठ संग्रह | Apne Me Savdhan

भगवान महावीर के प्रति |Bhagwan Mahavir Ke Prati | तुम्हें जानकर जग तुमसे अनजान रह गया -Babu Yugal Ji
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भगवान महावीर के प्रति |Bhagwan Mahavir Ke Prati | तुम्हें जानकर जग तुमसे अनजान रह गया -Babu Yugal Ji

बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna
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बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna

पार्श्व प्रभु तव दर्शन से | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Parsva Prabhu Tav Darshan Se
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पार्श्व प्रभु तव दर्शन से | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Parsva Prabhu Tav Darshan Se

०११४०  बाहर के सब कार्यों की मर्यादा होती है,एक आत्मा की शक्ति अमर्यादित है 👍🏻मै पूर्ण अमर्यादित हूँ
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०११४० बाहर के सब कार्यों की मर्यादा होती है,एक आत्मा की शक्ति अमर्यादित है 👍🏻मै पूर्ण अमर्यादित हूँ

प्रभु स्वाश्रित जीवन हो | आध्यात्मिक जिनेंद्र भक्ति | जिनभक्ति सिंधु, रचयिता - ब्र. रवींद्रजी आत्मन्
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प्रभु स्वाश्रित जीवन हो | आध्यात्मिक जिनेंद्र भक्ति | जिनभक्ति सिंधु, रचयिता - ब्र. रवींद्रजी आत्मन्

03 ध्यान - आर्त ध्यान, रौद्र ध्यान आदि Minneapolis Minnesota USA 🇺🇸
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03 ध्यान - आर्त ध्यान, रौद्र ध्यान आदि Minneapolis Minnesota USA 🇺🇸

Path Sangrah : #10laxan : #JainPath : #stuti
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Path Sangrah : #10laxan : #JainPath : #stuti

निर्भय स्वभाव चिंतन | आध्यात्मिक भजन | सहज पाठ संग्रह | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
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निर्भय स्वभाव चिंतन | आध्यात्मिक भजन | सहज पाठ संग्रह | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

01 पुरुषार्थ सिद्धि उपाय Cleveland USA
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01 पुरुषार्थ सिद्धि उपाय Cleveland USA

क्रमनियमित पर्याय।kram niyamit paryay।जैन आध्यात्मिक सिद्धांत।dr. hukum chand bharill ji।
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क्रमनियमित पर्याय।kram niyamit paryay।जैन आध्यात्मिक सिद्धांत।dr. hukum chand bharill ji।

नगरी हो सिद्धों सी...., अन्तर्ध्वनि षष्ठम पुष्प, पंडित संजीव जैन
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नगरी हो सिद्धों सी...., अन्तर्ध्वनि षष्ठम पुष्प, पंडित संजीव जैन

सांत्वनाष्टक - बा.ब्र.रविन्द्रजी आत्मन Saantvaanshtaka - B.B.RavindraJi Aatman
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सांत्वनाष्टक - बा.ब्र.रविन्द्रजी आत्मन Saantvaanshtaka - B.B.RavindraJi Aatman