ध्रुवरूप अहो! मम अंतर में | Dhruvroop Aho Mam Antar Men | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

(स्वरूप स्मरण) ध्रुव रूप अहो! मम अंतर में ध्रुव रूप अहो ! मम अन्तर में, उत्पाद-व्ययों का क्या होगा। मैं परम पारिणामिक चिन्मय, भावान्तरों का क्या होगा ।।1।। निज सुख का मुझको भान न था, निज ज्ञान मूर्ति का ज्ञान न था। मैं पूर्ण तृप्त आनंद धाम, परमात्म दशा का क्या होगा ।। 2 ।। हैं सभी द्रव्य स्वाधीन सदा, अन्यथा परिणमन हो न कदा। होनी ही होती है निश्चित्, रे ! आकुलता से क्या होगा।। 3।। ज्ञेयों का तो ज्ञायक नहीं है, ज्ञायक का ज्ञायक भी नहीं है। ज्ञायक ज्ञायक ही है निश्चय, अब व्यवहारों का क्या होगा।4।। मैं स्वयं पूर्ण निश्चिंत अहो, जो कुछ भी होना हो सो हो। मैं अक्षय चिन्मय सहज प्रभु, प्रभुता प्रगटे तो क्या होगा ।5।। मैं ही कृतार्थ कर्तृत्व शून्य, हूँ ज्ञानघनं रागादि शून्य। हूँ अकृत्रिम भगवान स्वयं, अब आराधन का क्या होगा।।6।। मेरा दर्शन सम्यग्दर्शन, मम ज्ञान अहो ! सम्यक् ज्ञान । मुझमें थिरता सम्यक् चारित्र, रत्नत्रय का अब क्या होगा।7।। मैं हूँ स्वभाव से मुक्त सहज, दृष्टि में आया पूर्ण सहज । मुक्ति जब आना हो आये, मुक्ति का मुझमें क्या होगा।। 8 ।। श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’ _____________________________________ Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji ‘Aatman’ Singer – Vandana Parakh, Rajnandgaon Backing Vocal– Anamika Bardiya, Rajnandgaon Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon Special thanks - ​⁠​⁠​⁠ ​⁠​⁠ Guru kahan art museum. ध्रुव रूप अहो! मम अंतर में, प्रवचन, अहमदाबाद    • ध्रुव रूप अहो मम अन्तर में  

अपने में सावधान | आध्यात्मिक भजन | ब्र. श्री रवींद्रजी 'आत्मन्' | सहजपाठ संग्रह | Apne Me Savdhan
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अपने में सावधान | आध्यात्मिक भजन | ब्र. श्री रवींद्रजी 'आत्मन्' | सहजपाठ संग्रह | Apne Me Savdhan

आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह
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आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह

460. Samaysar Gatha 217 (हम 2 की वस्तु 20 में नहीं लेते पर अपध्यान से अनंतपाप बाँध लेते हैं) 4/6/26
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460. Samaysar Gatha 217 (हम 2 की वस्तु 20 में नहीं लेते पर अपध्यान से अनंतपाप बाँध लेते हैं) 4/6/26

#518. Nature of Vishuddhi Labdhi / 06.06 Afternoon / Chhindwara
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#518. Nature of Vishuddhi Labdhi / 06.06 Afternoon / Chhindwara

कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill
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कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill

मुझे है स्वामी, उस बल की दरकरार | पं. नाथुरामजी | Mujhe Hai Swami Us Bal Ki Darkaar | Jain Bhajan
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मुझे है स्वामी, उस बल की दरकरार | पं. नाथुरामजी | Mujhe Hai Swami Us Bal Ki Darkaar | Jain Bhajan

||धन्य-धन्य वो क्षण|| Dhanya Dhanya wo Kshan||
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||धन्य-धन्य वो क्षण|| Dhanya Dhanya wo Kshan||

अब हम सहज भये न रुलेंगे | - बा. ब्र. पं. सुमतप्रकाश जी | Ab Hum Sahaj Bhaye Na Rulenge
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अब हम सहज भये न रुलेंगे | - बा. ब्र. पं. सुमतप्रकाश जी | Ab Hum Sahaj Bhaye Na Rulenge

०११४०  बाहर के सब कार्यों की मर्यादा होती है,एक आत्मा की शक्ति अमर्यादित है 👍🏻मै पूर्ण अमर्यादित हूँ
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०११४० बाहर के सब कार्यों की मर्यादा होती है,एक आत्मा की शक्ति अमर्यादित है 👍🏻मै पूर्ण अमर्यादित हूँ

खुद को ऐसा बनाओ लोग तुमको पाने के लिए तरसें//BK Shivani Hindi Best motivation//
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खुद को ऐसा बनाओ लोग तुमको पाने के लिए तरसें//BK Shivani Hindi Best motivation//

निर्भय स्वभाव चिंतन | आध्यात्मिक भजन | सहज पाठ संग्रह | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
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निर्भय स्वभाव चिंतन | आध्यात्मिक भजन | सहज पाठ संग्रह | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna
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बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna

निरावरण स्वभाव NIRAVARAN SWABHAV | आध्यात्मिक भजन | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
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०११४२ राग अकुलतारुप है और दुःखरुप है,आत्मा की शांति का खून करता है👍🏻🧘‍♀️स्वरूप वीतराग है 🙏🏻
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०११४२ राग अकुलतारुप है और दुःखरुप है,आत्मा की शांति का खून करता है👍🏻🧘‍♀️स्वरूप वीतराग है 🙏🏻

प्रभु महावीर ने सुनाई वासना की भयानक घटना 🤯 | Updeshmala Granth : Ep 25
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Path Sangrah : #10laxan : #JainPath : #stuti
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क्रमनियमित पर्याय।kram niyamit paryay।जैन आध्यात्मिक सिद्धांत।dr. hukum chand bharill ji।
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क्रमनियमित पर्याय।kram niyamit paryay।जैन आध्यात्मिक सिद्धांत।dr. hukum chand bharill ji।

पार्श्व प्रभु तव दर्शन से | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Parsva Prabhu Tav Darshan Se
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पार्श्व प्रभु तव दर्शन से | ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | Parsva Prabhu Tav Darshan Se

एक बार बस एक बार जरूर सुनना#moun saadhakar nij me jhanko#avinashjain#ravibothrasiliguri#jainism
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एक बार बस एक बार जरूर सुनना#moun saadhakar nij me jhanko#avinashjain#ravibothrasiliguri#jainism

#03. वस्तु व्यवस्था का परिणमन चाहने से नहीं होता | स्वाध्याय मंदिर,अमायन,प्रातः 08.10.16
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#03. वस्तु व्यवस्था का परिणमन चाहने से नहीं होता | स्वाध्याय मंदिर,अमायन,प्रातः 08.10.16