हक हैयड़ा और मोमिन का दिल | मारिफ़त का इल्म | श्री राजन स्वामी जी का | SPJIN | Pranam Ji
हक हैयड़ा और मोमिन का दिल | मारिफ़त का इल्म | श्री राजन स्वामी जी का | SPJIN | Pranam Ji "क्यों छूटे हक हैयड़ा, मोमिन के दिल से। अर्स मता जो मोमिन का, सब हक हैड़े में।।" का गहन अर्थ समझाया है। 👉 यहाँ हक हैयड़ा का अर्थ है अक्षरातीत परमात्मा का वक्षस्थल, जहाँ समस्त विज्ञान और मारिफ़त की निधियाँ विद्यमान हैं। 👉 मोमिन (सच्चे साधक) का हृदय सदा उसी सत्य से जुड़ा रहता है और उससे कभी अलग नहीं हो सकता। 👉 यह प्रवचन हमें बताता है कि जब साधक अपने दिल में अक्षरातीत की शोभा को बसा लेता है, तब उसे सर्वोच्च आत्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। ✨ इस प्रवचन के माध्यम से आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की अद्भुत प्रेरणा मिलती है। 📖 यह अमृतवाणी श्री कुल्जम स्वरूप साहिब और ब्रह्मसृष्टियों के अमर संदेशों पर आधारित है। क्यों छूटे हक हैयड़ा, मोमिन के दिलसें। अर्स मता जो मोमिन का, सब हक हैड़े में।। इस प्रकार ब्रह्ममुनियों के हृदय से श्री राज जी के वक्षस्थल की शोभा नहींं छूट सकती अर्थात् वे हमेशा ही उसमें डूबी रहती हैं। अक्षरातीत के हृदय में ही तो ज्ञान की वे सभी निधियां विद्यमान हैं, जिनसे ब्रह्मसृष्टियाँ आनन्द के सागर के रहस्यों को जान जाती हैं। भावार्थ- इस चौपाई में यह बात विशेष रूप से दर्शायी गयी है कि अक्षरातीत के वक्षस्थल (हृदय, छाती) की शोभा को बसा लेने पर सर्वोपरि विज्ञान (मारिफत के इल्म) की प्राप्ति हो जाती है। Go and Checkin Now - Instagram - / shriprannathji नोटः कृपया हमारे अधिकारिक युटयुब चैनल SPJIN को सब्सक्राइब जरूर करें - YouTube - / @spjin हमारे अन्य सामाजिक मीडिया जहां से आप हमसे आसानिसे जुड़ सकते हैं। Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook: / shri.prannath.jyanpeeth Facebook : / shri.rajan.swami Website: https://www.spjin.org/ Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये।

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परमात्मा को पाने का एकमात्र मार्ग - The only way to reach god By Shri Rajan Swami Ji | Jagni Yatra

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