हे भारत के राम जगो मैं तुम्हें जगाने आया हूं | Ashutosh Rana | Hey Bharat Ke Ram Jago | Sahitya Tak
#HeyBharatKeRamJago #AshutoshRana #AshutoshRanaPoem #ShwetaSingh #SahityaAajTak #SahityaTak हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हें जगाने आया हूं, सौ धर्मों का धर्म एक, बलिदान बताने आया हूं सुनो हिमालय कैद हुआ है, दुश्मन की जंजीरों में आज बता दो कितना पानी, है भारत के वीरो में, खड़ी शत्रु की फौज द्वार पर, आज तुम्हें ललकार रही, सोये सिंह जगो भारत के, माता तुम्हें पुकार रही. रण की भेरी बज रही, उठो मोह निद्रा त्यागो, पहला शीष चढाने वाले, मां के वीर पुत्र जागो. बलिदानों के वज्रदंड पर, देशभक्त की ध्वजा जगे, और रण के कंकण पहने है, वो राष्ट्रभक्त की भुजा जगे... अग्नि पंथ के पंथी जागो, शीष हथेली पर धरकर, जागो रक्त के भक्त लाडले, जागो सिर के सौदागर, खप्पर वाली काली जागे, जागे दुर्गा बर्बंडा, और रक्त बीज का रक्त चाटने, वाली जागे चामुंडा. नर मुंडों की माला वाला, जगे कपाली कैलाशी, रण की चंडी घर- घर नाचे, मौत कहे प्यासी-प्यासी, रावण का वध स्वयं करूंगा, कहने वाला राम जगे, और कौरव शेष न एक बचेगा, कहने वाला श्याम जगे. परशुराम का परशु जगे, रघुनन्दन का बाण जगे, यदुनंदन का चक्र जगे, अर्जुन का धनुष महान जगे, चोटी वाला चाणक्य जागे, पौरुष का पुरष महान जगे और सेल्यूकस को कसने वाला, चन्द्रगुप्त बलवान जगे. हठी हमीर जगे जिसने, झुकना कभी नहीं जाना, जगे पद्मिनी का जौहर, जागे केसरिया बाना, देशभक्ति का जीवित झंडा, आजादी का दीवाना, और वह प्रताप का सिंह जगे, वो हल्दी घाटी का राणा. दक्खिन वाला जगे शिवाजी, खून शाहजी का ताजा, मरने की हठ ठाना करते, विकट मराठो के राजा, छत्रसाल बुंदेला जागे, पंजाबी कृपाण जगे, दो दिन जिया शेर के माफिक, वो टीपू सुल्तान जगे. कनवाहे का जगे मोर्चा, पानीपत मैदान जगे, जगे भगत सिंह की फांसी, राजगुरु के प्राण जगे. जिसकी छोटी सी लकुटी से, संगीने भी हार गयी, हिटलर को जीता वे फौजें, सात समुन्दर पार गयी, मानवता का प्राण जगे, और भारत का अभिमान जगे, उस लकुटि और लंगोटी वाले, बापू का बलिदान जगे. आजादी की दुल्हन को जो, सबसे पहले चूम गया, स्वयं कफ़न की गाँठ बाँधकर, सातों भांवर घूम गया, उस सुभाष की शान जगे, उस सुभाष की आन जगे, ये भारत देश महान जगे, ये भारत की संतान जगे. क्या कहते हो मेरे भारत से चीनी टकराएंगे? अरे चीनी को तो हम पानी में घोल-घोल पी जाएंगे, वह बर्बर था वह अशुद्ध था, हमने उनको शुद्ध किया, हमने उनको बुद्ध दिया था, उसने हमको युद्ध दिया. आज बंधा है कफ़न शीष पर, जिसको आना है आ जाओ, चाओ-माओ चीनी-मीनी, जिसमें दम हो टकराओ जिसके रण से बनता है, रण का केसरिया बाना, ओ कश्मीर हड़पने वालों, कान खोल सुनते जाना... भारत के केसर की कीमत तो केवल सर है कोहिनूर की कीमत जूते पांच अजर अमर हैं रण के खेतो में जब छायेगा, अमर मृत्यु का सन्नाटा, लाशो की जब रोटी होंगी, और बारूदों का आटा, सन-सन करते वीर चलेंगे, जो बामी से फन वाला, फिर चाहे रावलपिंडी वाले हो, या हो पेकिंग वाला. जो हमसे टकराएगा, वो चूर चूर हो जायेगा, इस मिटटी को छूने वाला, मिटटी में मिल जायेगा, मैं घर घर में इन्कलाब की, आग लगाने आया हूं, हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूं.....फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का मानना है कि इस धरती पर जन्म लिए राम, कृष्ण, गांधी, काली, ऐसे कालजयी पात्र हैं जो केवल अपने दौर और मान्यताओं में ही प्रासंगिक नहीं थे, बल्कि विचारों में भी युगों, युगों तक अमर रहेंगे. देश की जानी मानी एंकर श्वेता सिंह के आग्रह पर उन्होंने साहित्य आजतक के मंच पर यह कविता सुनाई थी...साहित्य तक पर एक बार फिर सुनिए. ............................ About the Channel Sahitya Tak आपके पास शब्दों की दुनिया की हर धड़कन के साथ I शब्द जब बनता है साहित्य I वाक्य करते हैं सरगोशियां I जब बन जाती हैं किताबें, रच जाती हैं कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, निबंध, लेख, किस्से व उपन्यास I Sahitya Tak अपने दर्शकों के लिये लेकर आ रहा साहित्य के क्षेत्र की हर हलचल I सूरदास, कबीर, तुलसी, भारतेंदु, प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी से लेकर आज तक सृजित हर उस शब्द की खबर, हर उस सृजन का लेखा, जिससे बन रहा हमारा साहित्य, गढ़ा जा रहा इतिहास, बन रहा हमारा वर्तमान व समाज I साहित्य, सृजन, शब्द, साहित्यकार व साहित्यिक हलचलों से लबरेज दिलचस्प चैनल Sahitya Tak. तुरंत सब्स्क्राइब करें व सुनें दादी मां के किस्से कहानियां ही नहीं, आज के किस्सागो की कहानियां, कविताएं, शेरो-शायरी, ग़ज़ल, कव्वाली, और भी बहुत कुछ I Sahitya Tak - Welcome to the rich world of Hindi Literature. From books to stories to poetry, essays, novels and more, Sahitya Tak is a melting pot where you will keep abreast of what's the latest in the field of literature. We also delve into our history and culture as we explore literary gems of yesteryears from Surdas, Kabir, Tulsi, Bhartendu, Premchand, Prasad, Nirala, Dinkar, Mahadevi, etc. To know more about how literature shapes our society and reflects our culture subscribe to Sahitya Tak for enriching stories, poems, shayari, ghazals, kawali and much more. Subscribe Sahitya Tak now. Follow us on Facebook: / sahityatakoffical

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