#इत्ती-सी ख़ुशी//'तुलसी पंछिन के पिये,घटे न सरिता नीर। धरम करें धन न घटे,जो सहाय रघुबीर।'
#कल्पनामनोरमा #KalpanaManorma कल्पना मनोरमा का जन्म ४ जून, १९७२ को उत्तर प्रदेश में हुआ। कानपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में परास्नातक किया, जम्मू यूनिवर्सिटी से बी.एड. पुन: इग्नू से एम.ए (हिंदी साहित्य) किया। हिंदी अध्यापन से जुड़ी रहीं फिर वहाँ से स्वैक्षिक सेवानिवृत्ति ले ली। कुछ समय तक जी. बी. पी पब्लिकेशन हाउस में बतौर सीनियर एडिटर कार्य सम्हाला अब साहित्य सृजन में संलग्न हैं। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—प्रथम नवगीत संग्रह -"कबतक सूरजमुखी बनें हम", "बाँस भर टोकरी", “नदी सपने में थी” काव्य संग्रह तथा “चिड़िया का कहना सुनो” लघुकथा संग्रह शीघ्र प्रकाश्य। विशेष: ब्लॉग ‘कस्तूरिया’ का कुशल संचालन व संपादन. प्राप्त सम्मान- दोहा शिरोमणि 2014 सम्मान, वनिका पब्लिकेशन द्वारा (लघुकथा लहरी सम्मान 2016), वैसबारा शोध संस्थान द्वारा (नवगीत गौरव सम्मान 2018), प्रथम कृति पर- सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा (सूर्यकान्त निराला 2019 सम्मान ) आचार्य सम्मान (जैमिनी अकादमी पानीपत हरियाणा, 2021)

रोना किसी को सीखना नहीं पड़ता और हँसी सीखने में उम्र निकल जाती है। कल्पना मनोरमा की कहानी।

कल्पना मनोरमा की कहानी–आखिरी मोड़ पर | Story by Dr Kalpana Manorma | Audio Story | हिन्दी कहानी

जीवन के आखिरी दौर में एक स्त्री के मनःस्थिति को उकेरती,नारी मन की एक एक परतों को खोलती कहानी....

सपनों से भरी मीनू अपनेही घरके आईने की किरचों मे लहूलुहान थी,उसके सपनों और उम्मीदों के पर नोंच डालेगए

Anthai Gehraiyaan | Hindi Story by Mannu Bhandari | Sahitya Vihar | Hindi kahani

समझौते की शादी या रिश्तों का इम्तिहान : अनुबंध

सुषमा मुनीन्द्र की कहानी-दर्द ही जिसकी दास्ताँ रही | #SushmaMunindrakikahani

अगर डायन सच है तो ओझा भी सच।इससे पहले कि हमको डायन बनाता लोग,हम ओझा का रुप धर लिए।करलो,जो करना हो।

#परिणय#मालती जोशी की लिखी लम्बी कहानी| घर घर की कहानी कमोवेश वही.....सामाजिक पारिवारिक कहानी

बच्चियों के अविभावकों के लिए ये महत्तवपूर्ण कहानी....लेखक:नवनीत मिश्र

जीवन का अवरोह तभी सुकून देता हैजब उसके आरोह का इतिहास सधा रहाहो,नहींतो ढलान पर अक्सर चाल बिगड़ जातीहै

जाही विधि राखे राम ताही विधि रहिए।लेकिन बेटी को फिर भाग्य के विरुद्ध खड़ा करने केलिए वे कृतसंकल्प थे

मेरी लड़ाई उस पुरुष से है जो स्त्री को दोयम दर्जे का समझता है,अपनी पत्नी को कमतर आंकता है।

#रजनी गुप्त की कहानी-कतरनें || Story by Rajni Gupt || Audio Story || हिन्दी कहानी

रोज रोज के तबादलों से तंग,ललिता ने आखिर एक नया सबक सीखा.....

घर चलाने वाली औरत की अनकही सच्चाई | एक क्रांति सीमित-सी

भीष्म साहनी की प्रसिद्ध कहानी- ओ हरामज़ादे | प्रवासी होने के बाद देश की याद किस तरह तड़पाती है....

बहुओं ने देखा... ससुराल का कड़वा सच | ऑक्टोपस के घेरे में | नीलम कुलश्रेष्ठ की कहानी

एक फूल वसंत/अकेली ज़माने से जूझती जब मंजिल तक पहुँच ही गयी तब क्यों उसने विवाह से इंकार कर दिया?...

