श्री साँवलिया जी प्राकट्य स्थल मंदिर चित्तौड़गढ़ | 4K | दर्शन 🙏
श्रेय: संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल लेखक - रमन द्विवेदी भक्तों नमस्कार! प्रणाम! सादर नमन और अभिनन्दन.... भक्तों आज हम आपको अपने यात्रा कार्यक्रम “दर्शन” के माध्यम से एक ऐसे अद्भुत पौराणिक तीर्थस्थल का दर्शन करने जा रहे हैं जहां स्नान करने से लोहा गल जाता है। भक्तों हम बात कर रहे हैं चित्तौड़गढ़ संवलिया जी मंदिर की.... मंदिर के बारे में: भक्तों संवलिया जी नाम से प्रसिद्ध, सांवलिया जी प्राकट्य स्थल मंदिर चित्तौड़गढ सॆ उदयपुर् की ओर राष्ट्रीय राजमार्ग 76 पर 28 कि. मी. दूर स्थित है। ये मंदिर अपनी सुन्दरता व विशेषताओं के कारण हजारों तीर्थ यात्रियों के आकर्षण के केंद्र बने हैं। इन मंदिरों में हमेशा दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है। इतिहास: भक्तों श्री सांवलिया जी प्राकट्य स्थल नाम से प्रसिद्ध इस स्थान से सांवलिया सेठ की तीन मूर्तियों के प्राकट्य और उनके इतिहास को लेकर दो लोककथाएँ प्रसिद्ध हैं। पहली लोककथा: भक्तों संवलियाँ जी से जुड़ी पहली लोककथा के अनुसार- वर्ष 1840 में, भोलाराम गुर्जर नाम के एक दूधवाले ने बागुंड गाँव के छापर में भूमि के अंदर भगवान श्री कृष्ण की तीन दिव्य मूर्तियाँ दबी होने का सपना देखा। खुदाई के बाद सपने में देखी गई भगवान श्री कृष्ण की तीनों मूर्तियाँ प्रकट हुईं। तीनों मूर्तियों में से एक मूर्ति को मंडफिया ले जाया गया, दूसरी को भादसोड़ा और तीसरी मूर्ति को बागुंड गाँव के छापर में, उसी स्थान पर प्रतिष्ठित किया गया जहां तीनों मूर्तियाँ प्रकट हुई थीं। मंडफिया, भादसोड़ा और छापर तीनों स्थानों पर मंदिर बनाए गए। ये तीनों मंदिर परस्पर 5 किमी की दूरी में स्थित हैं। ये तीनों ही मंदिर सांवलिया जी के नाम से प्रसिद्ध हैं। दूसरी लोककथा: भक्तों संवलिया जी से जुड़ी दूसरी लोककथा के अनुसार- सांवलियाँ जी नाम से प्रसिद्ध भगवान कृष्ण की तीनों मूर्तियाँ, उन नागा साधुओं द्वारा आमंत्रित की गयी थीं, जो सैकड़ों वर्ष पूर्व मुगल आक्रांताओं के डर से बागुंड गाँव में समाधिस्थ हो गए थे। कालांतर जहां तीनों नागा साधू समाधिस्थ हुये थे वहाँ एक बबूल का एक वृक्ष उग आया। सन 1840 में तत्कालीन मेवाड राज्य द्वारा उदयपुर से चित्तोड़ जाने के लिए कच्ची सड़क बनाई जा रही थी। बागुन्ड गाँव में उगा वो बबूल का वृक्ष सड़क निर्माण में बाधक बन रहा था। जब उस बबूल के वृक्ष को काटकर उसकी जड़ें खोदी जाने लगीं तो भगवान कृष्ण की (सांवलिया स्वरुप में) 3 मूर्तियाँ प्रकट हुईं। इसीलिए बांगुड़ के इस जगह को सांवलिया जी प्राकट्य स्थल नाम से जाना जाता है। आरती पूजा: भक्तों सांवलिया जी प्राकट्य मंदिर में मंगला आरती सुबह 5 बजे, शृंगार आरती 8 बजे, बालभोग आरती 11 बजे, मध्यान्ह शयन 12 बजे से 2 बजे, उत्थापन दोपहर 2 बजे, संध्या आरती सूर्यास्त के बाद और रात्रि शयन 11 बजे निर्धारित है। मंदिर खुलने का समय: भक्तों सांवलिया जी प्राकट्य मंदिर को सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिया जाता है। जो दोपहर 12 से 2 छोडकर, रात्रि के 11 बजे तक खुला रहता है। देवझूलनी एकादशी मेला: भक्तों सांवलिया मंदिर का शिलान्यास के पूर्व से ही यहाँ देवझूलनी एकादशी का उत्सव बहुत ही भव्यतापूर्ण ढंग से मनाया जाता है। इस अवसर पर यहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी, एकादशी व द्वादशी को 3 दिवसीय विशाल मेला लगता है। एकादशी के दिन भादसोड़ा व बागुंड से भगवान के बाल रूप की शोभा यात्रा निकली जाती है, इसमे हजारों धर्मप्रेमी उल्लास के साथ भाग लेते है। दोनों शोभायात्राएं प्राकट्य स्थल मंदिर पहुँचने के बाद एक विशाल जुलूस में परिवर्तित हो जाती है। फिर भगवान का विशेष अभिषेक और पूजन किए जाते हैं। त्यौहार और उत्सव: भक्तों संवलिया जी मंदिर में हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, महा-शिवरात्रि, होली, फूलडोल महोत्सव, नवरात्रि, राम-नवमी, हनुमान जयंती, हरियाली अमावस्या, ब्रह्मष्टमी, गणेश चतुर्थी, जलझूलनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी), दीपावली और अन्नकूट आदि सभी त्योहार बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। नजदीकी दर्शनीय स्थल: भक्तों आवरी संवलिया जी मंदिर के नजदीक रावत बाघसिंह का स्मारक,जयमल और कल्लाजी की छतरी,पत्ताजी की छतरी,तुलजाभवानी मंदिर, तोपखाना, भामाशाह की हवेली,बनवीर की दीवार,नौलखा भण्डार,श्रृंगार चंवरी,कुम्भा महल,फतहप्रकाश महल संग्रहालय,सतबीस देवरी जैन मंदिर,कुम्भश्याम मंदिर और मीरा मंदिर,घी तेल की बावड़ी,जटाशंकर महादेव का मंदिर,विजय स्तम्भ,महासती स्थल,समिधेश्वर मंदिर,गौमुख,खातण रानी का महल,भाक्सी, चतरंग तालाब, राजटीला, मृगवन,मोहर मगरी,गौरा बादल की हवेली,अद्भुतजी का मंदिर,भीमलत जलाशय और मंदिर, सूरजपोल दरवाजा,साईदास का स्मारक,कीर्ति स्तम्भ,बाणमाता और अन्नपूर्णा माता का मंदिर,राघवदेवजी की छतरी,रतनसिंह के महल और जलाशय, कुकड़ेश्वर कुंड आदि दर्शनीय स्थल हैं यदि आप सैर सपाटा पसंद करते हैं तो इन स्थलों के पर्यटन का लुत्फ उठा सकते हैं। भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! 🙏 इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। 🙏 Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #devotional #hinduism #sanwaliyajitemple #temple #travel #vlogs #krishna #rajsthan

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