हे वर्धमान सागर गुरुवर | महा-सल्लेखना गौरव गाथा | भव्य जैन श्रद्धांजलि गीत
🙏 जय जिनेन्द्र 🙏 दिगम्बर जैन श्रमण परंपरा के महान गौरव, वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री १०८ शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण गुरु परंपरा के पंचम पट्टाधीश, समाधि सम्राट *आचार्य श्री १०८ वर्धमान सागर जी महाराज* के पावन संयममयी जीवन और उनकी पवित्र यम सल्लेखना समाधि की महिमा गाता हुआ एक अत्यंत दिव्य, ऊर्जावान और भव्य विशेष श्रद्धांजलि भजन। यह रचना सिद्धक्षेत्र कुंथलगिरि की पावन धरा पर ५ जुलाई २०२६ को संपन्न हुई उनकी समाधि, कोल्हापुर के निमशिरगांव में उनका जन्म (पायगोंडा), इचलकरंजी में मुनि दीक्षा और कोथली में आचार्य पदारोहण के गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत, संगीतमय वर्णन करती है। इस प्रस्तुति को सुनकर प्रत्येक भक्त का मन वैराग्य और गुरु भक्ति के आनंद में डूब उठेगा। 📜 LYRICS (भजन के बोल): [Chorus] हे वर्धमान सागर गुरुवर... शत शत नमन तुम्हें, संयम की पावन मूरत, वंदन वंदन तुम्हें। शांतिसागर की गुरु परंपरा, तुमने सदा निभाई है, कुंथलगिरी के कण-कण में, गौरव की गाथा छाई है। [Verse 1] निमशिरगांव की पावन धरती, कोल्हापुर का वो आंगन, अडगोंडा मुरुदेवी के घर, जन्मा था इक रूप अनुपम। बी.ए. बी.एड. शिक्षा पाकर, पायगोंडा नाम कहलाया, सांसारिक सुख छोड़ के मन में, अनुपम वैराग्य जगाया। [Chorus] हे वर्धमान सागर गुरुवर... शत शत नमन तुम्हें, संयम की पावन मूरत, वंदन वंदन तुम्हें। [Verse 2] इचलकरंजी की पावन भूमि, मुनि दीक्षा का संकल्प हुआ, गुरु शांतिसागर के हाथों, जीवन शिव-मार्ग को अर्पण हुआ। कठिन परीषह हंसकर झेले, तप की पावन भट्टी में तपे, नग्न दिगंबर मुद्रा धारी, जो रात-दिवस बस आत्म जपे। [Chorus] हे वर्धमान सागर गुरुवर... शत शत नमन तुम्हें, संयम की पावन मूरत, वंदन वंदन तुम्हें। [Verse 3] कोथली की पावन माटी पर, आचार्य पद का मान मिला, वर्धमान सागर बनकर फिर, जिन शासन का सूर्य खिला। संघ नायक बन करुणा बांटी, जन-जन को सन्मार्ग दिया, विद्वत्ता और आत्मानुशासन से, सबको पावन प्यार दिया। [Chorus] हे वर्धमान सागर गुरुवर... शत शत नमन तुम्हें, संयम की पावन मूरत, वंदन वंदन तुम्हें। [Verse 4] आया जब अंतिम समय निकट, यम सल्लेखना महाव्रत ठाना, चौबीस जून की पावन सुबह, आत्म-शुद्धि का नियम माना। कुंथलगिरी सिद्धक्षेत्र चुना, अंतिम पल का वो साथ चुना, समता भाव से शुद्धातम को, निज का केवल सत्य माना। [Chorus] हे वर्धमान सागर गुरुवर... शत शत नमन तुम्हें, संयम की पावन मूरत, वंदन वंदन तुम्हें। [Verse 5] नश्वर काया छोड़ के स्वामी, आत्म-लीन कल्याण किया, भविष्य में पाओगे सिद्धासन, भव्य जीवों ने ध्यान किया। सच्चे दिगंबर संत हो तुम, समता का मार्ग सिखा गए, संयम और तप की अमिट छाप, इस जग पर तुम छोड़ गए। [Outro] जय जय गुरुवर... जय जय गुरुवर... आचार्य वर्धमान सागर महाराज की... जय! समाधि सम्राट की... जय! यदि आपको यह पावन प्रस्तुति पसंद आई हो, तो वीडियो को LIKE और SHARE ज़रूर करें और जिनशासन की प्रभावना व ऐसे ही भक्तिमय जैन भजनों के लिए हमारे चैनल को SUBSCRIBE करना न भूलें।#AcharyaVardhmanSagar #Samadhi #Sallekhna #Kunthalgiri #JainBhajan #Jainism #DigambarJain #VardhmanSagarJi #TributeSong #SunoAI #JainLyrics #BhaktiSong #Jinbhakti

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भव्य मंगल प्रवेश में सुनिए—पट्टाचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज ने इंदौर के बारे में क्या कहा?

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જૈન સ્તવન ઓડિયો આલ્બમ | Jain Stavan Audio Album | जैन स्तवन | 4 JainSongs | Krunali Jain (Bhavsar)

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रत्नों की न वेदी हैं ll आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज पूजन ll प्रतिभामंडल न्यास द्वारा रचित

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14-07-2026 पण्ह पुच्छा शंका समाधान आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ।। इंदौर म. प्र. ।।

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जिस काम को करने में बड़े-बड़े इंजीनियर फेल हो गए आचार्य श्री ने वह चुटकियों में कर दिखाया

सुनिए क्या बोले छोटे विद्यासागर महाराज जी अचानक पहुंचे मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज ससंघ से मिलने

