सालासर बालाजी की सबसे पवित्र जगह | मोहनदास जी महाराज की समाधि
बोलिए श्री बाला जी महाराज की जय….. दोस्तों सालासर बालाजी के दर्शन तो लाखों शर्धालु करते हैं... लेकिन मंदिर के मुख्य द्वार के सामने ही परम भक्त श्री मोहनदास जी महाराज की समाधि स्थित है और उसके बिल्कुल पास उनकी बहन कानी बाई की समाधि है। मान्यता है कि बहन कानी बाई के देहावसान के बाद, विक्रम संवत 1850 में मोहनदास जी महाराज ने स्वयं जीवित समाधि धारण की थी। समाधि स्थल के पास ही एक पवित्र अखंड धूनी आज भी निरंतर प्रज्वलित है। कहा जाता है कि इस धूनी की शुरुआत स्वयं मोहनदास जी महाराज ने की थी। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इसकी पवित्र भस्म कष्टों को दूर करती है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करती है। अब बात करते हैं मंदिर के इतिहास की। सालासर बालाजी का दिव्य प्राकट्य विक्रम संवत 1755 में हुआ। इसके कुछ वर्षों बाद, विक्रम संवत 1759 में भक्त शिरोमणि श्री मोहनदास जी महाराज ने यहां भव्य मंदिर का निर्माण करवाया और मंदिर की सेवा-पूजा अपने भांजे उदय राम जी को सौंप दी। तभी से उनके वंशज आज तक बालाजी महाराज की सेवा करते आ रहे हैं। जीवित समाधि लेने से पहले मोहनदास जी महाराज ने बालाजी से एक विशेष प्रार्थना की थी। उन्होंने आशीर्वाद मांगा कि उदय राम जी और उनके वंशज गृहस्थ जीवन में रहते हुए सदैव बालाजी की पूजा, सेवा और आराधना करते रहें तथा दीर्घायु हों। मान्यता है कि बालाजी ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार की। वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी, विक्रम संवत 1850 की प्रातः बेला में, भक्त शिरोमणि श्री श्री 1008 मोहनदास जी महाराज ने जीवित समाधि धारण की। यह घटना आज भी सालासर की सबसे पवित्र और प्रेरणादायक परंपराओं में गिनी जाती है। आज भी सालासर धाम में प्रतिदिन एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। प्रातःकाल बालाजी की आरती से पहले मोहनदास जी महाराज और कानी दादी की समाधि पर आरती एवं भोग लगाया जाता है। इसी प्रकार संध्या आरती से पहले भी भाई-बहन की समाधि का पूजन होता है, उसके बाद ही बालाजी महाराज की आरती संपन्न होती है। समाधि स्थल पर एक ऐतिहासिक शिलालेख भी स्थापित है, जिसे उदय राम जी द्वारा विक्रम संवत 1852 में बनवाया गया था। यह शिलालेख आज भी इस स्थान के इतिहास और परंपरा का मौन साक्षी बना हुआ है। अगली बार जब भी आप सालासर बालाजी के दर्शन करने जाएं, तो केवल मंदिर के ही नहीं, बल्कि भक्त शिरोमणि श्री मोहनदास जी महाराज की इस पवित्र जीवित समाधि के भी दर्शन अवश्य करें। क्योंकि सालासर की यह कहानी, बालाजी की महिमा जितनी ही अद्भुत और प्रेरणादायक है। अगर आपने भी सालासर बालाजी के दर्शन किए हैं, तो कमेंट में "जय सालासर बालाजी" जरूर लिखिए। और ऐसे ही मंदिरों और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक कथायें लेकर आते रहेंगे, वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले।

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