जैहि विधि तोहि अति लागौं प्यारी | भोरी सखी पद 423 | श्री हित हरिवंश जी
जैहि विधि तोहि अति लागौं प्यारी, सो गुन तैसी रहन दीजिये, करुणा कोर निहारी। 🌸🙏 भोरी सखी के इस अत्यंत करुणामय पद में साधिका श्री स्वामिनी जी से विनय करती है — “जिस प्रकार मैं आपको प्रिय लगूँ, उसी प्रकार मुझे अपना बना लीजिए।” यह पद पूर्ण समर्पण, दीनता और कृपा-याचना का अद्भुत उदाहरण है। पद 423 — भोरी सखी जैहि विधि तोहि अति लागौं प्यारी। सो गुन तेरी रहन दीजिये, करुणा कोर निहारी॥ हौं तो तेरे हाथ बिकानी, तू इक राखन हारी। तेरी सहज रीझ नित चाहौं, और सौं काज कहारी॥ कोटि प्राण तेरे पग पर वारौं, छिन हू देखि छटारी। भोरी दृग भरि दरसन दीजै, माँगौं गोद पसारी॥ यदि यह पद आपके हृदय को स्पर्श करे, तो चैनल से जुड़कर इस रसधारा को अधिक से अधिक प्रेमी जनों तक पहुँचाने में सहयोग करें। राधे राधे! 🌸 #जैहिविधितोहिअतिलागौंप्यारी #भोरीसखी #पद423 #हितहरिवंश #राधावल्लभ #राधारानी #विरहभाव #भजन #कृष्णभक्ति #भक्तिरस

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