ऐसा मंदिर जिसके कपाट सिर्फ 1 दिन के लिए खुलते हैं || वंशी नारायण मंदिर उत्तराखंड || Bansi Narayan ||
चमोली जिले के उर्गम घाटी में स्थित भगवान विष्णु के वंशीनारायण मंदिर जो सिर्फ रक्षा बंधन के मौके पर कपाट खुलते है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 12 किमी तक पैदल चलना होता है। यह देवभूमि उत्तराखंड का अकेला ऐसा मंदिर है जो मात्र एक दिन के लिए रक्षाबंधन के दिन खुलता है और कुंवारी कन्याओं के साथ ही विवाहिताएं वंशीनारायण को राखी बांधने के बाद ही भाइयों की कलाई पर स्नेह की डोर बांधती है ||| #urgamvalley #Bansinarayan #kalpeshwar narad ji ka mandir vanshinarayan temple vanshi narayan temple vanshi narayan temple uttarakhand bansinarayan temple bansi narayan temple bansi narayan temple uttarakhand sal me sirf ek din khulne wala mandir saal me sirf ek din khulne wala mandir saal me sirf ek din khulne wala mandir uttarakhand नारद मंदिर नारद मंदिर उत्तराखंड #uttrakhand #uttrakhandtemple #uttrakhandtourism #naradha #naradmuni #temple पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण पांडव काल में हुआ था। कातयूरी शैली में बने 10 फिट ऊंचे इस मंदिर का गर्भ वर्गाकार है। जहां भगवान विष्णु चर्तुभुज रूप में विद्यमान है। वंशी नारायण मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर की प्रतिमा में भगवान नारायण और भगवान शिव दोनों के ही दर्शन होते हैं। नारद जयंती 2022 narada jayanti 2022 #naradmuni #naradmunileela #naradmunileela #naradmunigyani narad temple bansi narayan narad temple uttarakhand narad muni jayanti मान्याता है कि इस मंदिर में देवऋषि नारद 364 दिन भगवान नारायण की पूजा अर्चना करते हैं और यहां पर मनुष्यों को पूजा करने का अधिकार सिर्फ एक दिन के लिए ही है, एक बार राजा बलि ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वह उनके द्वारपाल बने। भगवान विष्णु ने राजा बलि के इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और वह राजा बलि के साथ पाताल लोक चले गए। भगवान विष्णु के कई दिनों तक दर्शन न होने कारण माता लक्ष्मी परेशान हो गई और वह नारद मुनि के पास गई। नारद मुनि के पास पहुंचकर उन्होंने माता लक्ष्मी से पूछा के भगवान विष्णु कहां पर है। जिसके बाद नारद मुनि ने माता लक्ष्मी को बताया कि वह पाताल लोक में हैं और द्वारपाल बने हुए हैं। नारद मुनि ने माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु को वापस लाने का उपाय भी बताया । उन्होंने कहा कि आप श्रावण मास की पूर्णिमा को पाताल लोक में जाएं और राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांध दें। रक्षासूत्र बांधने के बाद राजा बलि से वापस उन्हें मांग लें। इस पर माता लक्ष्मी ने कहां कि मुझे पाताल लोक जानें का रास्ता नहीं पता क्या आप मेरे साथ पाताल लोक चलेंगे। इस पर उन्होंने माता लक्ष्मी के आग्रह को स्वीकार कर लिया और वह उनके साथ पाताल लोक चले गए। जिसके बाद नारद मुनि की अनुपस्थिति में कलगोठ गांव के जार पुजारी ने वंशी नारायण की पूजा की तब से ही यह परंपरा चली आ रही है। रक्षाबंधन के दिन कलगोठ गांव के प्रत्येक घर से भगवान नारायण के लिए मक्खन आता है। इसी मक्खन से वहां पर प्रसाद तैयार होता है। कातयूरी शैली में बने 10 फिट ऊंचे इस मंदिर का गर्भ भी वर्गाकार है। जहां भगवान विष्णु चर्तुभुज रूप में विद्यमान है। इस मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर की प्रतिमा में भगवान नारायण और भगवान शिव दोनों के ही दर्शन होते हैं। ये मंदिर वर्ष के 365 में से केवल एक दिन के लिए मानवों के लिए खोला जाता है? बाकी के 364 दिन एक देवता इस मंदिर में भगवान को आराधना करतें है। कौन है ये देवता और भारत में कहां है ये विचित्र मंदिर जानतें है इस वीडियो में.. सिर्फ एक दिन के लिए खुलने वाले इस मंदिर का नाम है- बंसी नारायण मंदिर और ये मंदिर है देवभूमि उत्तराखंड में। ये मंदिर गढ़वाल के चमोली क्षेत्र में उर्गम घाटी से 12 किमी दूर स्थित है। लोकमान्यता है कि इस मंदिर देवऋषि_नारद 364 दिन भगवान_नारायण की पूजा अर्चना करते हैं। देवऋषि सिर्फ एक दिन के लिए कहीं जातें है और उसी दिन यहां पर मनुष्यों को पूजा करने का अधिकार प्राप्त होता है। नारद मुनि एक दिन के लिये कहाँ जातें है? ये हम आगे जानेंगे। यह मंदिरदेवभूमि उत्तराखंड का अकेला ऐसा धाम है जो मात्र एक दिन के लिए रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय के साथ खुलता है। सूर्यास्त होते ही मंदिर के कपाट एक साल के लिए फिर से बंद कर दिए जातें है। लेकिन इस एक दिन की प्रतीक्षा महिलाएं बेसब्री के साथ करती है। कुंवारी कन्याओं के साथ ही विवाहिताएं भी भगवान वंशीनारायण को राखी बांधने के लिए इस दिन का इंतज़ार करती है। चमोली जिले के ऊंचे हिमालय क्षेत्र में स्थित वंशीनारायण मंदिर तक पहुंचना भी कोई हंसी-खेल नहीं है। जिला मुख्यालय गोपेश्वर से उर्गम घाटी तक वाहन से पहुंचा जा सकता है। किंतु इसके बाद आगे का लगभग 12 किलोमीटर का रास्ता पैदल ही नापना पड़ता है। पांच किलोमीटर दूर तक फैले मखमली घास के मैदानों को पार कर सामने नजर आता है प्रसिद्ध पहाड़ी शैली कत्यूरी में बना वंशीनारायण मंदिर। दस फुट ऊंचे मंदिर में भगवान की चतुर्भुज मूर्ति विराजमान है। माना जाता है कि इस धाम में आकर भगवान के राखी बांधने से स्वयं श्रीहरि भाई बनकर महिलाओं की रक्षा करते हैं। अब हम जान लेतें है कि नारदमुनि जब वर्ष के 364 दिन यहां भगवान की आराधना करतें है तो एक दिन के लिए वो कहाँ चले जातें? रक्षाबंधन के दिन कलगोठ गांव के प्रत्येक घर से भगवान नारायण के लिए मक्खन आता है। इसी मक्खन से वहां पर प्रसाद तैयार होता है। भगवान वंशी नारायण की फूलवारी में कई दुर्लभ प्रजाति के फूल खिलते हैं। इस मंदिर में श्रावन पूर्णिमा पर भगवान नारायण का श्रृंगार भी होता है। इसके बाद गांव के लोग भगवान नारायण को रक्षासूत्र बांधते हैं। मंदिर में ठाकुर जाति के पुजारी होते हैं। मंदिर के पास ही भालू गुफा भी स्थित है। उत्तराखंड के सुरम्य स्थान पर विराजित इस अद्भुत धाम की ये जानकारी आपको अच्छी लगे तो वीडियो को आगे शेयर कर दे.. धन्यवाद.!!

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