कृष्णा अग्निहोत्री की कहानी-मैं जिंदा हूँ | Author-Krishna Agnihotri | Audio Story | हिन्दी कहानी
#कृष्णाअग्निहोत्रीकीकहानियाँ #KrishnaAgnihotrikikahani #KrishnaAgnihotrikikahaniyan #Hindikahani #HindiLiterature #HindiAudiobook #ClassicStories #HindiWriter #Indianwriter कृष्णा अग्निहोत्री-- जन्म : 8 अक्टूबर, 1934 को नसीराबाद (राजस्थान) में माता-पिता के साथ कर्मस्थली खंडवा (म.प्र.) विवाह : उ.प्र. कानपुर में कार्यकाल : प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, शासकीय कन्या महाविद्यालय, खंडवा योग्यता : एम.ए. हिन्दी, अंग्रेजी, पी.एच.डी. प्रकाशित पुस्तकें : कहानी-संग्रह : टीन के घेरे, गलियारे, विरासत, नपुंसक, दूसरी औरत, पारस, सर्पदंश, पंछी पिंजरे के, जिंदा आदमी, जै सियाराम, अपने-अपने कुरुक्षेत्र, ये क्या जमीं है दोस्तों, जीना-मरना, मान भी जा सांझी, याहि बनारसी रंग बा, एक पाती ऐसी भी। कहानी-समग्र : कठौती (तीन भाग में)। उपन्यास : बात एक औरत की, ट्परेवाले, अभिषेक, टेसू की टहनियाँ, जोधा-मीरा, नीलोफर, बित्ता भर की छोकरी, कुमारिकाएँ, बौनी परछाइयाँ, नानी अम्मा मान भी जाओ, कौन नहीं अपराधी, आना इस देश, प्रशस्तेकर्माणी, पुरवाई। आत्मकथा : लगता नही है दिल मेरा, और-और-औरत। रिपोर्ताज : भीगे मन रीते तन। समीक्षा : स्वातंत्रयोत्तर हिन्दी कहानी व कहानीकार, वर्तमान परिवेश और राष्ट्रीय चिंतन। बच्चों के कहानी-संग्रह : अपना हाथ जगन्नाथ, समय की कीमत, अक्षरों की हड़ताल, एक था रॉबी, सूर्यतपा, गुलगुले। डायरी : अफसाने अपने कहानी अपनी।

जो जितना झुकता है उसे,उससे अधिक झुकाया जाता है यह समाज का अलिखित सनातनी नियम है.....

#"के"#शिवानी की कहानी#हिन्दी साहित्य:सीमा सिंह#अगर आप शिवानी के प्रसँशक हैं तो ये कहानी जरूर सुनिए

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