महाभारत भाग 24, बिना गर्भधारण के धर्मराज युधिष्ठिर का जन्म कैसे हुआ ?
इससे पहले के भाग देखने के लिए चैनल Playlist में जाएं महाराज पाण्डु को वन जाना, और धृतराष्ट को कार्यकारी राजा बनाना महाराज पाण्डु अपने दोनों पत्निओ के साथ वन के तरफ प्रस्थान करते हैं , वही दूसरी तरफ धृतराष्ट को हस्तिनापुर का कार्यकारी राजा बनाया जाता। शकुनी बहुत आनंदित होता है क्योंकि उसकी इच्छा थी की मेरे बहनोई श्री ही हस्तिनापुर का राजा बने। महाराज पाण्डु सन्यासी जीवन जीने के लिए वन जाते है तो एक केवल शकुनी ही है जो खुश होता है बाकि पुरे हस्तिनापुर के प्रजाजन और महाराज पाण्डु के परिवाज सब दुखी और हतास थे। राजमाता सत्यवती को रो-रो कर बुरा हाल था , पितामह भीष्म का भी एहि हाल था। और चिंता भी था की हस्तिनापुर के राजसिंहासन रिक्त हो गया है। पाण्डु को वन जाने के 15 वर्ष बाद हस्तिनापुर से एक सन्देश आता है की गान्धारी को प्रसव नहीं हो रहा है उसे 15 माह से अधिक हो गर्वधारण किये हुए। फिर भी अभी प्रसव नहीं हुआ , जबकि स्त्री को प्रसव 9 माह में हो जानी चाहिए। धृतराष्ट बहुत ही गुस्से में अपनी गान्धारी के पास आते है और प्रसव करने का ज़िद करता है क्योंकि धृतराष्ट को एक उत्तराधिकारी चाहिए। गान्धारी बस रोटी रहती है पति की बात सुन कर , पति कहता है की यदि तुम मुझे संतान नहीं दे सकती तो मुझे कसीस और स्त्री से संतान प्राप्त करना हो। और बोलता है की जिस भगवान ने तुझे 100 पुत्रो का वरदान दिया था पूछो उससे की अब तक मेरा पहला बच्चा भी जन्म नहीं ले रहा है , 100 का पता नहीं। धृतराष्ट पुत्र की लालसा को पूरा करने के लिए उसने गान्धारी के मुख्य परिचारिका शुख्दा के साथ वैवाहिक संबंध बनता है। यह खबर पाण्डु को जब मिला तो वह अति दुखी होता है , सोचता है की यह क्या विपत्ति आ पड़ा है कुरुवंश में , पाण्डु को चिंता में देखे कुन्ती पूछती है क्या बात आर्य आप इतने चिंता में क्यों हैं ? फिर पाण्डु सारी बाटे बताती है , यह जानकर कुन्ती को बहुत दुःख होता है। पाण्डु बोलता है की हस्तिनापुर का राजा कोण बनेगा ? मैं तो तुम्हे पुत्र नहीं दे सकता कुन्ती। फिर कुंती अपने बारे में महाराज पाण्डु को बताती है की मुझे ऋषि दुर्भाषा ने एक मंत्र दिया था था जिसके द्वारा मैं किसी भी देवता को बुलाकर उस देवता वाला अंश का पुत्र प्राप्त कर सकता हूँ। यह बात सुनते ही महाराज पाण्डु अति खुश हो जाते है , और कुन्ती को बोलते है की तुम धर्मराज यमराज को बुला कर हमारे लिए पुत्र प्राप्त करो कुन्ती जो हस्तिनापुर का भविष्य बने एक धर्मी राजा बने। पति के कहने पर कुन्ती एक पुत्र की प्रति करती है जिसका नाम युधिष्ठिर होता है

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