Bharat Me Badal Raha Afeem Ki Kheti Ka Tareeka|First Time Online Licence|
Bharat Me Badal Raha Afeem Ki Kheti Ka Tareeka|First Time Online Licence| Afeem Ki Kheti Ke Liye Online Licence|Afeem Ki Kheti Ka Naya Tareeka| #opium #opiumfarming #cps #concentratepoppystraw #governmentofindia #preventionofsmuggling #dipoleexpress #thedipoleexpress #onlinelicence #districtopiumofficer #afeemkikheti #posta #postakikheti अफीम की तस्करी (smuggling) पर लगाम लगाने और किसानों को तमाम परेशानियों से बचाने के लिए दो वर्ष पूर्व अफीम की खेती के तरीकों में किये गए बदलाव की सफलता को देखते हुए भारत सरकार ने इस बार सीपीएस प्रणाली (CPS system) से पोस्ता की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बाराबंकी जोन को ढाई हजार अतिरिक्त लाइसेंस देने का फैसला किया है.यही नही किसानों को लाइसेंस के लिए भटकना न पड़े और बिचौलियों के जाल में न फंसना पड़े लिहाजा सरकार ने पहली बार लाइसेंस जारी करने के लिए ऑनलाइन सिस्टम(online system) लागू किया है. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (ministry of finance) ने फसल सत्र 2021-22 में पोस्ता खेती की नीति में बड़ा बदलाव किया था. पोस्ता की खेती करने वाले किसानों को पहली बार दो प्रकार के लाइसेंस (license)जारी किए गए थे. पहले प्रकार के लाइसेंस के तहत किसानों को पोस्ता में चीरा लगाकर अफीम(opium gum) निकाल कर उसे सरकार को जमा करना था वहीं दूसरे प्रकार के लाइसेंस के तहत किसानों को बगैर रस निकाले सीधे डोडा को जमा करना था.इस डोडा को सीपीएस (Concentrate Poppy Straw)प्रणाली कहते हैं. यूपी के केवल 9 जिलों में होती है अफीम की खेती उत्तरप्रदेश में अफीम यानी पोस्ता की खेती केवल 9 जिलों बरेली ,बंदायू,शाहजहांपुर, लखनऊ ,बाराबंकी, अयोध्या,रायबरेली,मऊ और गाजीपुर में ही की जाती है.इसमें पूर्वी उत्तरप्रदेश के 6 जिलों लखनऊ, बाराबंकी,अयोध्या,रायबरेली, मऊ और गाजीपुर के लिए लाइसेंस बाराबंकी यूनिट से जारी होते हैं.जबकि पश्चिमी उत्तरप्रदेश के तीन जिलों बदायूं,बरेली और शाहजहांपुर के किसानों को बरेली यूनिट लाइसेंस जारी करती है.बाराबंकी यूनिट ने इस बार तकरीबन 5 हजार किसानों को लाइसेंस देने की तैयारी की है.जिसमे 01 हजार किसानों को अफीम के लिए और 04 हजार किसानों को सीपीएस सिस्टम के लाइसेंस जारी किए जाएंगे. इसके लिए किसानों को उनके मोबाइल पर मैसेज भेजे गए हैं. जिसके तहत किसान ऑनलाइन cbn.nic.in साइट पर जाकर कहीं से भी नियत फार्म पर आवेदन करेंगे.बाराबंकी यूनिट के अधिकारी उनकी जांच करेंगे और फिर किसानों को लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा.जिला अफीम अधिकारी लालाराम दिनकर ने बताया कि पूरे अक्टूबर माह लाइसेंस देने की प्रक्रिया चलेगी.दरअसल, पोस्ता के पौधे में निकले फल से निकलने वाला दूध जब जमकर पेस्ट बन जाता है तो उसे अफीम कहते हैं. अभी तक अफीम में कुछ रसायन मिलाकर उससे परंपरागत ढंग से एल्केलाइड्स (alkaloids) निकाले जाते हैं, जिनसे जीवन रक्षक दवाइयां (life saving drugs) बनाई जाती हैं. अब नई तकनीक के आ जाने से डोडा यानी पॉपीस्ट्रा (poppy straw) से एल्केलाइड्स निकाल लिए जाएंगे. इसके लिए अफीम की आवश्यकता नहीं होगी. जिला अफीम अधिकारी लालाराम दिनकर का कहना है कि इस नई नीति से अफीम या उससे जुड़े उत्पादों जैसे हेरोइन(heroine),मार्फीन (morphine) और निकोटीन (nicotine) की तस्करी (smuggling) रुकेगी. साथ ही ये किसानों के लिए भी आसान होगा.उन्हें अफीम की रखवाली का जोखिम भी नहीं उठाना होगा.अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक के जरिये डोडा से एल्केलाइड्स निकालने में आसानी के साथ खर्च भी कम आएगा.जिससे जीवन रक्षक दवाइयों के दाम कम हो जाएंगे. जिला अफीम अधिकारी ने बताया कि किसानों को लाइसेंस जारी करने के लिए अलग अलग कैटेगरी निर्धारित की गई हैं. इनको अफीम देने का लाइसेंस मिलेगा- 1-वे किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2022-23 में अफीम पोस्त की खेती की थी और उनकी मार्फीन की औसत उपज 4.2 किग्रा प्रति हेक्टेयर से कम नही थी. 2- वे किसान जिन्होंने वर्ष 2019-20 में फसल बोई हो और विभाग को अफीम जमा की हो लेकिन लाइसेंस मिलने के बाद वर्ष 2020-21,वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 में अधिकारियों की देखरेख में फसल जोतवा दी हो. 3-वे किसान जो वर्ष 2022-23 के लिए पात्र थे लेकिन किसी वजह से वो फसल नही बो सके. 4- पात्र वारिसान को लाइसेंस जारी होगा. इनको CPS लाइसेंस मिलेगा ऐसे किसान जिन्होंने फ़सल वर्ष 2022- 23 के दौरान सीपीएस की खेती की थी और उन्होंने डोडा भी जमा किया था. ऐसे किसान जिन्होंने फ़सल वर्ष- 2022-23 में पोस्त की खेती की थी और विभाग को अफीम जमा भी किया था लेकिन यह अफीम 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम थी. ऐसे किसान जो अफीम पोस्ते की खेती करने के लिए पात्र है लेकिन वे सीपीएस का लइसेंस चाहते हैं. ऐसे किसान जिन्होंने फ़सल वर्ष-2021-22 व 2022-23 में अपनी खड़ी फ़सल निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अधिकारियों की देख-रेख में जोतवा दी हो. ऐसे किसान जो फसल वर्ष 1998-99 से वर्ष 2022-2023 के दौरान इस आधार पर रद्द कर दिए गए थे कि उन्होंने घटिया किस्म की अफीम विभाग को जमा कराई थी लेकिन बाद में अफीम कारखानों में किए गए परीक्षण में पता चला कि उनमें मार्फ़ीन का अवयव 6 प्रतिशत से अधिक था.

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