#अपना-अपना भाग्य' | महत्वपूर्ण #प्रश्न-उत्तर | #Apna Apna Bhagya | Questions & Answers | With Audio
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर इस वीडियो में दिए गए हैं। 1. ‘नैनीताल की संध्या धीरे-धीरे उतर रही थी।’ I. नैनीताल की संध्या की विशेषताएँ बताइए| II. लेखक अपने मित्र के साथ कहाँ बैठा था और वह वहाँ बैठा-बैठा बोर क्यों हो रहा था और क्यों कुढ़ रहा था ? III. लेखक के मित्र को अचानक क्या दिखाई पड़ा? उसका परिचय दीजिए। IV. ज़रा-सी उम्र में लड़के की मौत से पहचान कैसे हो गई थी? 2. मैंने देखा कि कुहरे की सफेदी में कुछ ही हाथ दूर से एक काली सी मूर्ति हमारी तरफ आ रही थी। मैंने कहा-“होगा कोई।” तीन गज की दूरी से दिख पड़ा, एक लड़का, सिर के बड़े-बड़े बाल खुजलाता चला आ रहा था। नंगे पैर, नंगे सिर, एक मैली-सी कमीज़ लटकाए है। I. यहाँ पर किस बालक के संदर्भ में कहा गया है? उस समय उसकी क्या स्थिति थी? II. बालक ने अपने घर-परिवार के संबंध में क्या-क्या बताया? III. इस समय उस बालक के सामने कौन-सी समस्या थी? क्या उस समस्या का हल हो पाया? यदि नहीं तो क्यों? IV. इस कहानी के माध्यम से लेखक ने हमें क्या संदेश देना चाहा है? 3. बालक फिर आँखों से बोलकर मूक खड़ा रहा। आँखें मानो बोलती थीं- “यह भी कैसा मूर्ख प्रश्न है।” I. किस प्रश्न को सुनकर बालक मूक खड़ा रहा? उसकी आँखों ने क्या कह दिया ? II. अपने परिवार के बारे में बालक ने क्या बताया ? III. लेखक को बालक की किस बात को सुनकर अचरज हुआ? IV. लेखक और उनका मित्र बालक को कहाँ ले गए और क्यों? वकील साहब का पहाड़ी बालकों के संबंध में क्या मत था ? 4. “अजी ये पहाड़ी बड़े शैतान होते हैं। बच्चे-बच्चे में अवगुण छिपे रहते हैं - आप भी क्या अजीब हैं उठा लाए कहीं से-लो जी यह नौकर लो।” I. उपर्युक्त अवतरण में किस की बात की जा रही है? II. प्रस्तुत कथन के वक्ता का परिचय दें। III. लेखक और उनका मित्र उस बच्चे को वकील साहब के पास क्यों ले गए? IV. वकील साहब उस बच्चे को नौकर क्यों नहीं रखना चाहते थे? 5. “भयानक शीत है। उसके पास कम बहुत कम कपड़े …….?” ‘यह संसार है यार, मैंने स्वार्थ की फिलासाकी सुनाई।’ I. लेखक के मित्र की उदासी का कारण स्पष्ट करते हुए बताइए कि वे पहाड़ी बालक की सहायता क्यों नहीं कर सके? II. ‘यह संसार है यार'- वाक्य आजकल के मनुष्यों की किस प्रवृत्ति का द्योतक (प्रतीक) है? III. अपना-अपना भाग्य' कहानी में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए। IV. ‘अपना-अपना भाग्य'- कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए। 6. पर बतलाने वालों ने बताया कि गरीब के मुँह पर छाती, मुट्ठियों और पैरों पर बर्फ की हल्की-सी चादर चिपक गई थी, मानो दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने शव के लिए सफ़ेद और ठंडे कफ़न का प्रबंध कर दिया था। I. यहाँ पर गरीब किसे और क्यों संबोधित किया गया है? II. लड़के की मृत्यु का क्या कारण था? III. दुनिया की बेहयाई ढँकने के लिए प्रकृति ने शव के लिए सफ़ेद और ठंडे कफ़न का प्रबंध कर दिया था?- इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। IV. “अपना अपना भाग्य! कहानी के उद्देश्य पर विचार कीजिए।

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