उठ जाग मुसाफिर – क्या हमने अपने निज स्वरूप को पहचाना? आचार्य अर्जुन जी @shrirajanswami @SPJIN

क्या हमने अपने निज स्वरूप को पहचाना? जो सोवत है वो खोवत है, जो जागत है सो पावत है। वक्ता-आचार्य अर्जुन जी श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ 18वां वार्षिकोत्सव चल्यो जुग जाए री सुध बिना, सुध बिना सुध बिना सुध बिना। किरन्तन २१/१ इस चर्चा में श्री जी जीव को उसके शुद्ध स्वरुप की पहचान करने को प्रेरित कर रहे है। इस संसार में आकर जीव बेसुध होकर खुद को भूल जाता है। जिस भी शरीर को धारण करता है, उसी को सत्य मानता है। अक्षरब्रह्म की इच्छा से प्रकट हुए इस मोहसागर के जीवों को श्री जी बताना चाहते हैं की एक दिन महाप्रलय में त्रिगुणात्मक पिंड ब्रह्माण्ड और स्वप्न समान सारी सृष्टि का विनाश हो जायेगा तो क्या कभी सोचा है की जीव कहाँ रहेगा ?आत्मा का घर कहाँ है ? आज तक इन प्रश्नों के उत्तर किसी ने नहीं दिए। एक कुलजम वाणी ही ऐसा न्यारा ज्ञान लेकर समस्त प्राणिओं को मुक्ति देनी आयी है। ऊपर तले माहे बाहेर, खोज्या कैयों जन। नेहेचल न्यारा सबन से,ए ठौर न पाई किन।। ये दिव्य ज्ञान तभी काम कर पायेगा यदि दिल देकर इसके मायने समझे जाएँ। 'उठ जाग मुसाफिर भोर भयो रैन जात क्यों सोवत है , जो सोवत है वो खोवत है, जो जागत है सो पावत है।' नोट: कृपया हमारे "SPJIN" चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें (आप यहाँ क्लिक करके सब्सक्राइब करें - https://goo.gl/maqz3p) । आध्यात्मिक चर्चा, भजन - कीर्तन के इस अपार सागर रुपी चैनल के द्वारा आत्मा - परमात्मा, सतगुरु, मानव जीवन के परम लक्ष्य, ध्यान - समाधि, नैतिक मूल्यों आदि विषयों में अपना ज्ञान और बढ़ाएं । यहाँ पर नए वीडियो नियमित रूप से अपलोड होते रहते हैं । तो देखते रहिये , सीखते रहिये व दूसरों के साथ शेयर भी करते रहिये । प्रणाम जी । Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.rajan.swami   Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Twitter:   / raajanswami   Website: https://www.spjin.org Email: [email protected] WhatsApp: +91-7533876060 Thanks for watching the video. Please SUBSCRIBE and press the Bell icon. Find more about us at: https://www.spjin.org श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये। Free e-Books to Download related to Shri Tartam Vani and Chitwani, also you can order books in Print copies from Shri Prannath Gyanpeeth, Sarsawa (+91 70881 20381). 1. परिकरमा + सागर + सिनगार + खिलवत टीका https://www.spjin.org/assets/files/pa... https://www.spjin.org/assets/files/sa... https://www.spjin.org/assets/files/si... https://www.spjin.org/assets/files/kh... 2. NIJANAND YOG (निजानन्द योग) - Collection of 60 Invaluable FAQs https://www.spjin.org/assets/files/ni... 3. CHITWANI MARGDARSHAN (चितवनि मार्गदर्शन) - Smallest and Best ever Pocket Guide to Meditation https://www.spjin.org/assets/files/ch... 4. DHYAN KI PUSHPANJALI (ध्यान की पुष्पाञ्जलि) - Detailed Question-Answer Sessions transcribed in this unique pearl of spiritual wisdom https://www.spjin.org/assets/files/dh... आत्मिक दृष्टि से परमधाम, युगल स्वरुप तथा अपनी परआत्म को देखना ही चितवनि (ध्यान) है। चितवनि के बिना आत्म जागृति संभव नहीं है। संसार की अब तक की प्रचलित सभी ध्यान पद्धतियाँ निराकार-बेहद से आगे नहीं जाती हैं। तारतम ज्ञान के प्रकाश में मात्र निजानन्द योग ही परमधाम ले जा सकता है। प्रियतम अक्षरातीत की चितवनि में इतना आनन्द है कि उसके सामने संसार के सभी सुख मिलकर भी कहीं नहीं ठहरते। यही कारण है कि ध्यान का आनन्द पाने के लिये ही राजकुमार सिद्धार्थ, महावीर, भर्तृहरि आदि ने अपने राज-पाट को छोड़ दिया और वनों में ध्यानमग्न रहे। बेहद मण्डल - इस प्राकृतिक जगत् से परे वह बेहद मण्डल है, जिसे योगमाया का ब्रह्माण्ड कहते हैं। चारों वेदों में इसे चतुष्पाद विभूति के रूप में वर्णित किया गया है। इस मण्डल में अक्षर ब्रह्म के चारों अन्तःकरण (मन, चित, बुद्धि तथा अहंकार) की लीला होती है, जिन्हें क्रमशः अव्याकृत, सबलिक, केवल और सत्स्वरूप कहते हैं। परमधाम - बेहद मण्डल से परे वह स्वलीला अद्वैत परमधाम है, जिसके कण-कण में सच्चिदानन्द परब्रह्म की लीला होती है। यह अनादि है, अनन्त है और सच्चिदानन्दमय है। जिस प्रकार सागर अपनी लहरों से तथा चन्द्रमा अपनी किरणों लीला करता है, उसी प्रकार अक्षरातीत भी अपनी अभिन्न स्वरूपा अंगरूपा आत्माओं के साथ अद्वैत लीला करते हैं, जो अनादि है और इसमें कभी अलगाव नहीं होता है। वेदों ने इसी परमधाम के सम्बन्ध में “त्रिपादुर्ध्व उदैत्पुरुष” अर्थात् परब्रह्म योगमाया से परे है, कहकर मौन धारण कर लिया। मुण्डकोपनिषद् ने भी 'दिव्य ब्रह्मपुर' शब्द का प्रयोग तो किया, किन्तु उसे बेहद मण्डल (केवल ब्रह्म) में मान लिया। कुरआन में मेयराज के वर्णन के द्वारा संकेत किये जाने पर भी मुस्लिम जगत अभी इसकी वास्तविकता से बहुत दूर है। श्री प्राणनाथजी की अलौकिक तारतम वाणी में इस परमधाम की शोभा, लीला एवं आनन्द का विशद रूप में वर्णन किया गया है, जिसका सुख किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।

चल्यो जुग जायेरे सुध बिना। आचार्य अर्जुन जी
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श्री बीतक साहेब चर्चा - दिवस 29- अष्ट पोहोर की सेवा । आचार्य अशोक जी - #SPJIN
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#श्री निजानंद संप्रदाय - (श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म) | परना (पन्ना) परमधाम  | Shri Prannathji Mandir #
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देखिये कैसे स्वामी जी ने इन के सारे सवालों का जवाब दिया है अब उन महाराज की बलि बंद होगई है
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हमारी सुरता किसमें रमण कर रही है ? @SPJIN @shrirajanswami
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तारतम वाणी के आधार पर घर वापसी का शंखनाद । परम पूज्य आचार्य महाराजश्री
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संसार का छलावा और वास्तविक आनंद की खोज | बतन बिसारी रे छले किए हैरान | @shrirajanswami @SPJIN
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राजजी को कैसे पुकारें By Shri Rajan Swami Ji | Shri Prannath Ji -  @SPJIN
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China’s Secret | The Most Unbelievable Megaprojects in China | 4K Travel Documentary
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What Happened After Mahabharata? | The Untold Journey of the Pandavas to Heaven | EPIC SHORT FILM
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I Spent 90 Days Building, Cooking and Surviving in the Rainforest: Solo Bushcraft (Full)
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भ्रान्तिनाशनम् ग्रंथ की रचना का उद्देश्य क्या है?  @SPJIN @shrirajanswami
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तपस्वी सुमेध की कथा भाग-01 महापंडित पूज्य भिक्षु प्रियदर्शी थेरो जी के श्रीमुख से.... #harmony
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भेष नहीं, भाव बदलने से अध्यात्म मिलता है। @shrirajanswami @SPJIN
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श्री सतगुरू बीतक साहेब जी Episode 71 by Sumit Ji - रामानंद जी की छाया सिद्धि, पर रोग ले लिया तिल्ली।
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Swami Kailashanand Giri ने सनातन पर Rahul Dev की बोलती बंद कर दी! |Dharm Sankat
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Deep Relaxation Music | Calm Music for Stress Relief & Healing Meditation | Zen Garden Chill
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Today's Holy Rosary Tuesday, June 16, 2026 | Find peace in the midst of your storms
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श्री जी नाम पर आक्षेप लगा रहे हैं सुर्यनारायण जी और सुंदर साथ को भ्रमित करने का प्रयास किया है
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