पतिव्रता का अंग | Pativrata ka Ang | Amargranth Sahib by Sant Rampal Ji Maharaj

पतिव्रता का अंग | Pativrata ka Ang | Amargranth Sahib by Sant Rampal Ji Maharaj गरीब, पतिब्रता तिन जानिये, नाहीं आंन उपाव। एके मन एके दिसा, छांडै़ भगति न भाव।।1।। गरीब, पविव्रता सो जानिये, नाहीं आन उपाव। एकै मन एकै दिसा, दूजा नहीं लगाव।।2।। गरीब, पतिब्रता सो जानिये, मानें पीव की आन। दूजे सें दावा नहीं, एकै दिसा धियान।।3।। गरीब, पतिब्रता सो जानिये, मानें पीव की कांन। पीव भावै सोई करें, बिन अग्या नहिं खान।।4।। गरीब, पतिब्रता सो जानिये, चरण कंवल में ध्यान। एक पलक भूले नहीं, आठौं वखत अमान।।5।। गरीब, पतिब्रता सो जानिये, जानै अपना पीव। आंन ध्यान सै रहत होइ, चरण कमल में जीव।।6।। गरीब, पतिब्रता सो जानिये, जानैं अपना कंत। आंन ध्यान सें रहत होइ, जो धार्या सो मंत।।7।। गरीब, पतिब्रता सोई लखो, जानै अपना कंत। आंन ध्यान सै रहत होइ, गाहक मिलै अंनत।।8।। गरीब, पतिब्रता कै बरत हैं, अपने पीव सूं हेत। आंन उपासी बौह मिलें, जिनसैं रहै संकेत।।9।। गरीब, पतिब्रता सो जानिये, जाके दिल नहिं और। अपने पीव के चरण बिन, तीन लोक नहिं ठौर।।10।। गरीब, पतिब्रता कै बरत में, कदे न परि है भंग। उनका दुनिया क्या करै, जिनके भगति उमंग।।11।। गरीब, पतिब्रता परहेज है, आंन उपास अनीत। अपने पीव के चरण की, छाड़त ना परतीत।।12।। गरीब, पतिब्रता कै ब्रत है, दूजा दोजिख दुंद। अपने पीव के नाम से, चरण कमल रहि बंध।।13।। गरीब, पतिब्रता प्रसंग सुनि, जाका जासैं नेह। अपना पति छांड़ै नहीं, कोटि मिले जे देव।।14।। गरीब, पतिब्रता प्रसंग सुनि, जाकी जासैं लाग। अपना पति छांडै़ नहीं, पूरबले बड़भाग।।15।। गरीब, पतिब्रता प्रसंग सुनि, जाकी जासैं लाग। अपना पति छांडै़ नहीं, ज्यूं चकमक में आग।।16।। गरीब, पतिब्रता पीव के चरण की, सिर पर रज लै डार। अड़सठि तीरथ सब किये, गंगा न्हान किदार।।17।। गरीब, पतिब्रता पीव के चरण की, सिर पर रज लै राख। पतिब्रता का पति पारब्रह्म है,सतगुरु बोले साख।।18।। गरीब, पतिब्रता पति प्रणाम करें, रहे पति कूं पूज। पतिब्रता पारब्रह्म पाव ही, सतगुरु कूं लै बूझ।।19।। गरीब, पतिब्रता को प्रणाम करे, पतिब्रता कूं मिल धाय। पतिब्रता दीदार करि, चैरासी नहिं जाय।।20।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, कोटिक होंहि अचूक। और दुनी किस काम की, जैसा सिंभल रूख।।21।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, कोटिक मिलैं कुटिल। और दुनी किस काम की, जैसी पाहन सिल।।22।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, धर अंबर धसकंत। संत न छांड़े संतता, कोटिक मिलैं असंत।।23।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, साखी चंदर सूर। खेत चढे सें जानिये, को कायर को सूर।।24।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, साखी चंदर सूर। खेत चढे सें जानिये, किसके मुख पर नूर।।25।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, जाका यौंहि सुभाव। भगति हिरंबर उर धरें, भावै सरबस जाव।।26।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, तन मन धन सब जाव। नाम अभयपद उर धरै, छाड़ै भगति न भाव।।27।। गरीब, पतिब्रता चूके नहीं, तन मन जावौं सीस। मोरध्वज अरपन किया, सिर साटे जगदीश।।28।। गरीब, पतिब्रता प्रहलाद है, एैसी पतिब्रता होई। चैरासी कठिन तिरासना, सिर पर बीती लोइ।।29।। गरीब, राम नाम छांड्या नहीं, अबिगत अगम अगाध। दाव न चुक्या चैपटे, पतिब्रता प्रहलाद।।30।। गरीब, कौन कंवल अनभै उठें, कौन कंवल घर थीर। कौन कंवल में बोलिये, कौन कंवल जल नीर।।31।। गरीब, मूल कंवल अनभै उठें, सहंस कमल घर थीर। कंठ कंवल में बोलिये, त्रिकुटि कंवल जल नीर।।32।। गरीब, कहां बिंद की संधि है, कहां नाड़ी की नीम। कहां बजरी का द्वार है, कहां अमरी की सीम।।33।। गरीब, त्रिकुटि बिंद की संधि है, नाभी नाड़ी नीम। गुदा कंवल बजरी कही, मूलिही अमरी सीम।।34।। गरीब, कहां भँवर का बास है, कहा भँवर का बाग। कौन भँवर का रूप है, कौन भँवर का राग।।35।। गरीब, हिरदे भँवर का बास है, सहंस कंवल दल बाग। उजल हिरंबर रूप है, अनहद अबिगत राग।।36।। गरीब, निस वासरि कै जागनै, हासिल बड़ा नरेस। नाम बंदगी चित धरौ, हाजरि रहना पेस।।37।। गरीब, सुरति सिंहासन लाईये, निरभय धूनी अखंड। चित्रगुप्त पूछें नहीं, जम का मिटि है दंड।।38।। गरीब, ऐसा सुमरन कीजिये, रोम रोम धुनि ध्यान। आठ बखत अधिकार करि, पतिब्रता सो जान।।39।। गरीब, तारक मंत्र चित्त धरौ, सूख्म मंत्र सार। अजपा जाप अनादि है, हंस उतरि है पार।।40।। गरीब, अंजन मंजन कीजिये, कुल करनी करि दूर। साहेब सेती हिलमिलौ, रह्या सकल भरपूर।।41।। गरीब, हरदम मुजरा कीजिये, यौंह तत्त बारंबार। कुबुधि कटे कांजी मिटे, घण नामी घनसार।।42।। गरीब, अजब हजारा पुहुप है, निहगंधी गलतान। पांच तत्त नाहीं जहां, निरभय पद प्रवान।।43।। गरीब, सत पुरूष साहेब धनी, है सो अकल अमान, पूर्ण ब्रह्म कबीर का पाया हम अस्थान।।44।। गरीब, नेस निरंतर रमि रह्या, प्रगट क्या दिखलाइ। दास गरीब गलतान पद, सहजै रह्या समाइ।।45।। __________________________________________ अधिक जानकारी के लिए विज़िट करें: https://jagatgururampalji.org ________________________________________ संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा प्राप्त करने के लिए या अपने नजदीकी नामदीक्षा केंद्र का पता करने के लिए हमे +91 82228 80541 नंबर पर कॉल करें | ________________________________________ For more videos Follow Us On Social Media Facebook :   / satlokashram   Twitter :   / satlokchannel   Youtube :    / satlokashram   Instagram :   / satlokashram001   Website : http://supremegod.org Website SA NEWS : https://sanews.in Watch Interviews:-    / satruestoryofficial  

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