Kangra Fort | कांगड़ा किला: हिमालय की शान I Kangra ka Itihaas | Kangra Valley | Kangra Weather

Located 215 km from Shimla, the Kangra Fort was built at the confluence of River Beas’ tributaries, the Banganga and Patalganga, Said to be constructed in the shape of an ear or ‘Kaan’ in Hindi, it is known to give the whole valley its name - Kangra, from ‘Kaangarh'. Due to its location and strong fortification, there is a local Pahari saying that ‘Whoever holds the Kangra Fort, holds the Hills’. Let’s take you on its fascinating journey. 0:00 - Introduction 0:13 - Kangra Ghati 0:52 - Kangra Qile Ki Mool Jankari 1:58 - Qile Ke Nirman Ki Anjani Dastan 2:31 - Pehla Videshi Hamla 2:58 - Sunehre Daur Ka Sakshi 3:23 - Sansar Chand Ka Uday 4:09 - Kangra Rajya Ka Patan 4:55 - Angrezon Ke Haathon Mein Aana 5:20 - Kangra Mein Bhookamp 5:48 - Qile Mein Tabahi 6:16 - Kangra Rajya Ke Vanshaj 6:37 - Museum Ka Nirman 7:06 - Kangra Qila Ka Vartman हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा घाटी भौगौलिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत जीवंत और भरपूर हैI इनकी खुशनुमा पहाड़ियों में मौजूद जगहें यहाँ के इतिहास और धरोहर को सम्पूर्ण बनाते है, जिनमें से प्रमुख है कांगड़ा किला I इस किले को हिमालय पर्वत श्रंखला में सबसे मज़बूत और चौड़े किले होने का दर्जा हासिल है I शिमला से लगभग 215 किलोमीटर दूर कांगड़ा किला, बानगंगा और पातालगंगा नदियों ने संगम पर स्थित है I मनुष्य कान के आकार में बनें इस किले ने पूरे घाटी को ‘कानगढ़” शब्द से ‘कांगड़ा” नाम दिया हैI इसको नगरकोट, भीमकोट और सुसर्मापुरा आदि नामों से भी पुकारा जाता हैI इसकी मज़बूत किलेबंदी और भवनों की वजह से एक स्थानीय लोकुक्ति प्रचलित थी, कि जिसके पास कांगड़ा किला है, उसके कब्जे में यहाँ मौजूद सभी पहाड़ हैंI दिलचस्प बात ये है, कि इसको खजाने का पिटारा भी कहा जाता है, जहां पर कई शासक अपने खजाने किले के भीतर मौजूद मंदिरों में चढ़ावे के तौर पर भेजा करते थे I इस किले से जुड़े कई अनजाने ऐतिहासिक पहलू हैं I आईये, आपको इसके सफ़र पर ले चलते हैं I कांगड़ा किला कटोच साम्राज्य का गढ़ था I इस साम्राज्य का ज़िक्र हमें ‘मार्कंडेय पुराण’ जैसे प्राचीन ग्रन्थों में मिलता हैI वहीँ ‘महाभारत’ में इनके एक राजा सुसरमा का उल्लेख मिलता हैI माना जाता है, कि कांगड़ा किले को उसके शुरूआती दौर पर वही लेकर आये थे, जिसके कारण कई तथ्यों में इस किले का नाम सुसर्मापुरा मिलता है I कांगड़ा किले पर पहला विदेशी हमला सन 1009 में महमूद गजनी द्वारा हुआ था, जिसने किले के कई निवासियों को मारकर यहाँ मौजूद खजाने को लूटा I चौदहवीं शताब्दी के अंत तक हमलों का सिलसिला तब खत्म हुआ, जब राजा मेघचन्द्र कटोच की सेना ने तैमुर की कोशिश को नाकाम किया I सन 1556 में कांगड़ा किला मुग़ल सल्तनत के तहत तब आया, जब तत्कालीन कटोच राजा धरमचंद ने तीसरे मुग़ल बादशाह अकबर के सामने आत्मसमर्पण कियाI फिर ये किला अकबर के नवरत्नों में से एक बीरबल की जागीर के तहत आयाI मगर अट्ठारहवीं शताब्दी में जब मुग़ल सल्तनत का पतन हो रहा था, तब मौके का फायदा उठाकर, धरमचंद के वंशज संसारचंद ने सिख मिसलों में से एक कन्हैया मिसल के साथ मिलकर कांगड़ा किले में कटोच राज का पुनर्गठन किया I इनके शासनकाल के दौरान, कटोच साम्राज्य जम्मू तक फैलाI ये साम्राज्य प्रशासन, कला और वास्तुकला जैसे पहलूओं में समृद्ध बना I इनकी छाप आज भी पहाड़ी शैली के चित्रों में, और तिरा सुजानपुर जैसे महलों में आज भी देखा जा सकता है I संसारचंद के शासन को कांगड़ा इतिहास में सुनेहरा दौर कहा जाता है I सन 1849 में आंगल-सिख युद्ध में हारने के बाद, सिखों ने कांगड़ा किला अंग्रेजों को दिया, और ये उनका गढ़ सन 1857 के बाद भी रहा, जिस दौरान कई किलों को या तो वीरान छोड़ा गया या फिर ध्वस्त किया गया थाI मगर 4 अप्रैल सन 1905 को कांगड़ा में आये 7.8 की तीव्रता के एक ज़ोरदार भूकम्प ने इसके शहरों कांगड़ा, धर्मशाला और मैकलियोडगंज में ऐसी भारी तबाही मचाई, कि इसके झटके लाहौर तक महसूस किये गये थे! इसमें करीब 30,000 लोग मारे गए थे, और काफी जानमाल को नुक्सान भी पहुंचा! इस भूकम्प ने कांगड़ा किले को भी नहीं बक्शा, जहां पर हुई तबाही ने इसको उसके मूल रूप से काफी छोटा कर दिया था, जिसके कारण अंग्रेज़ भी यहाँ से चले गएI दुर्भाग्य ये है, कि यदि 1905 का भूकम्प न आता, तो आज शायद ग्वालियर और कुम्भलगढ़ के किलों की तरह कांगड़ा किला भी भारत के सबसे विशाल किलों में गिना जाता! 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद कटोच साम्राज्य के वंशज आगे चलकर हिमाचल प्रदेश के प्रगति के लिए सक्रिय रहे I आज भी वो किले के भीतर देवी अम्बिका और आदिनाथ जैसे देवी-देवताओं को पूजने के लिए यहाँ आते हैं I कांगड़ा किले के पुनर्निर्माण के दौरान, संसारचंद और कटोच साम्राज्य के अन्य शासकों की वस्तुएं और उनसे सम्बधित कलाकृतियों को जमा करके वर्तमान महाराजा संसारचंद चाँद कटोच संग्राहलय में आम जनता के लिए लगवाया गया था, जो किले के ठीक बगल में है I यहाँ पर कटोच शासकों के शाही इतिहास से जुड़े पहलूओं से लोग रूबरू होते हैंI आज कांगड़ा किला भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन है, जिसने सन 2019 में भारत की धरोहर और स्मारकीय सम्पदा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, यहाँ पर विश्व धरोहर दिवस का आयोजन किया था I आज कांगड़ा किला हिमालयी क्षेत्रों के इतिहास के प्रतिनिधित्व के तौर पर कांगड़ा घाटी की शान बढ़ाता हैI Please subscribe to the channel and leave a comment below! =============== Join us at https://www.livehistoryindia.com to rediscover stories that are deeply rooted in our history and culture. Also, follow us on - Twitter:   / livehindia   Facebook:   / livehistoryindia   Instagram:   / livehistoryindia   ===============

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