marwar ka itihas | मारवाड़ का संपूर्ण इतिहास | जोधपुर का इतिहास हिंदी में | marwar history
Telegram Channel Link :- https://t.me/volcanorasacademy राठौड़ वंश:- राजस्थान के राठौड़ों की उत्पत्ति के संबंध मं विभित्र मत हैं। मुणोत ने इन्हें कत्रौज के शासक जयचन्द गड़हवाल का वंषज माना है दयालदास की बीकानेर रा राठौड़ौ री ख्यात, जोधपुर की ख्यात, पृथ्वीराज रासौ आदि में भी इसी मत का समर्थन किया गया है जबकि पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा इन्हें बदायु के राठोडों का वंषज मानते है। कुछ इतिहासकार इन्द्र दक्षिण के राष्ट्रकूटों से उत्पन्न मानते है। परन्तु अधिकांष इतिहासकार मुहणात नैणसी के मत के पक्षधर है । इनके अनुसार जब मुहम्मद गौरी ने 1193 ई. मे कत्रौज पर आक्रमण कर राठौड़ जयचन्द गहड़वाल को हराकर उसका राज समाप्त कर दिया तक कुछ वर्षाे बाद जयचन्द्र के पौत्र सीहाजी अपने कुछ राठौड़ सरादारों के साथ 13वीं सदी में राजस्थान का गये और पाली के उत्तर-पश्चिम में अपना छोटा सा राज्य स्थापित किया। सीहा के उत्तराधिकारियों ने धीर-धीरे अपने का विस्तार किया। इस प्रकार राव सीहा मारवाड़ के राठौड़ वंश के संस्थापक एवं आदि पुरूष थे। राव चूडा : राव सीहा के वंषज वीरमदेव का पुत्र राव चूडा इस वंष का प्रथम प्रतापी षासक हुआ, जिसने माॅडू के सूबेदार से मंडोर दुर्ग छीनकर उसे अपनी राजधानी बनाया। उसने अपना राज्य विस्तार नाडौल, डीडवाना, नागौर आदि क्षेत्रों तक कर लिया। राव चूॅडा द्वारा अपने ज्येष्ट पुत्र को अपना उत्तराधिकारी न बनाये जाने पर उनका ज्येष्ट पुत्र रणमल मेवाड़ नरेष महाराणा लाखा की सेवा मंे चला गया । वहा उसने अपनी बहन हंसाबाई का विवाह राणा लाखा से इस षर्त पर किया की उसने उत्पत्र पुत्र ही मेवाड़ का उत्तराधिकारी होगा।कुछ समय पष्चात रणमल ने मेवाड़ की सेना लेकर मंडोर पर आक्रमण किया और सन् 1426 में उसे अपने अधिकार में ले लिया । महाराणा लाखा के बाद उनके पुत्र मोकल तथा उनके बाद महाराणा कुंभा के अल्पवयस्क काल तक मेवाड़ के षासन की देखरेख रणमल के हाथों में ही रही। परंतु कुछ सरदारों के बहकावे में आकर महाराणा कुंभा ने सत् 1438 ई. में रणमल की हत्या करवा दी । राव जोधा (1438-1489 ई.) अपने पिता रणमल की हत्या हो जाने के तुरंत बाद उनके पुत्र राव रोधा चुपचाप मेवाड़ से निकल भगा परंतु मेंवाड़ की सेना ने स्व. महाराणा मोकल के ज्येष्ठ भ्राता रावत चूॅडा के नेतृत्त्व में उनका पीछा किया औश्र मंडोर के किले पर मेवाड़ का अधिकार कर लिया। राव जोधा ने सन् 1453 ई. मे पुनः मडोर एवं आसपास के क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया। सन् 1459 में राव जोधा चिडि़याटूॅक महाड़ी पर जोधपुर दुर्ग (मेहरानगढ़) का निर्माण करवाया और इसके पास वर्तमान जोधपुर षहर बसाया। उनके समय जोधपुर राज्य का अत्यधिक विस्तार हो चुका था। 1489 में राव जोधा की मृत्यु हो गई। राव मालदेव (1531-1562): अपने पिता राव गांगाजी की मृत्यु के बाद राव मालदेव 5 जून, 1531 को जोधपुर को सिंहासन पर बिठाने में पूरी सहायता प्रदाान की । उन्होने सन्् 1541 में बीकानेर नरेष राव जैतसी को हरा बीकानेर पर अधिकार कर लिया। मुगल बादषाह हूमायॅॅू षेरषाह सूरी से हारने के बाद इनकी सहायता लेने के उद्देष्य से 1542 ई. में मारवाड़ आया था। राव मालदेव ने उसका उचित सत्कार कर सहायता का वचन दिय परंतु बाद में हुमायूॅ अमरकोट की तरफ चला गया। गिरि सुमेल युद्ध -1543 1543 ई. में दिल्ली के अफगान बादषाह षेरषाह सूरी ने मालदेव पर चढ़ाई की। जैतारण जिला पाली के निकट गिरि-सुमेल नामक स्थान पर जनवरी, 1544 में दानों की सेनाओं के मध्य युद्ध हुआ जिसमें षेरषाह सूरी की बड़ी कठिनाई से विजय हुई। तब उसने कहा था कि ‘‘मुट्टी भर बाजरी के लिए मैनंे हिन्दुस्तान की बादषाहत खो दी होती ।‘‘ इस युद्ध मंे मालदेव के सबसे विष्वसस्त वीर सेनानायक जैता एंव कूॅपा मारे गए थे । इसके बाद षेरषाह के दुर्ग पर आक्रमण कर अपना अधिकार कर लिया तथा वहाॅ का प्रबन्ध खवास खाॅ को संभला दिया। मालदेव ने कुछ समय बाद पुनः समस्त क्षेत्र पर अपना अधिकार लिया था। 7 नवम्बर, 1562 को उसकी मृत्यु हो गई। मालेव न केवल एक योद्धा एवं प्रतापी षासक ही था बल्कि एक भवन निर्माता भी था। उसने पोकरण का किला, कालकोट किला (मेड़ता), सोजत, सारन, रीया आदि किलों का निर्माण करवाया। राव चन्द्रसेन (1562-1581 ई.) राव चन्द्रसेन मारवाड नरेश राव मालव के छठे पुत्र थे। इनका जन्म 16 जलाई, 1541 को हुआ। राव मालदेव के देहान्त के बाद उन्हों की इच्छानुसार उनका कनिष्ठ पुत्र राव चन्द्रसेन 1562 में जोधपुर की गद्दी पर बैठा। उस समय राव चंद्रसेन के तीनों बडे़ भाइयों में सबसे बडे़ भाई रामसिंह अपनी जागीर गूॅदोच में, दूसरे रायमल्ल सिवाना में और तीसरे उदयसिंह फलोदी में थे। इस राज्यारोहण से असंतुष्ट सामंतों ने राव चंद्रसेन के भाइयों मंे कलह उत्पत्र कर दी । सन् 1563 में राव चन्द्रसेन ने अपने भाई रामंसिह पर चढ़ाई की । राम अपनी विजय की आषा न देखकर नागौर के षाही हाकिम हुसैन कुली बेग के पास चला गया और सहायता मांगी ।राव चंद्रसेन व उनके भाइयों की कलह का लाभ मुगल बादषाह अकबर न उठाया। अकबर ने नागौर में अपने हाकिम हुसैनकुली बेग को राव चंद्रसेन पर चढ़ाई कर जोधपुर का किला छीनने का आदेश दिया। युद्ध के दौरान राव चंद्रसेन परिवार सहित महल से चले गए 1564 ई. मं जोधपुर किले पर मुगल सेना का अधिकार हो गया।

MARWAR RIYASAT PART 01 राठौड़ किसके वंशज हैं? राव सीहा rathore

Epi. 05 राठौड़ वंश मारवाड़ , जोधपुर | Rathore Rajput Dynasty Jodhpur By Rajveer sir Springboard

Ep : 5 I Jain Philosophy: An Introduction I Dr Vikas Divyakirti

पहाड़ पर लद्दाख की ऐतिहासिक मस्जिद, जिसे औरंगज़ेब ने बनवाया था| Shams Tabrez Qasmi Millat Times

बीकानेर का इतिहास ( राठौड़ वंश ) Part = 1 GURUKUL OFFLINE CLASS By Subhash Charan Sir

बंटवारे से बर्बादी तक: पाकिस्तान की अनकही दास्तान | Untold Stories of Pakistan

"अस्तित्व"Astitva बॉलीवुड सुपरहिट लव स्टोरी रोमेंटिक फिल्म | तब्बू और नम्रता, मोहनीश, स्मिता, सुनील

राजा भोज की असली कहानी || The Real History of Raja Bhoj

What Secrets Lie Inside Rajasthan’s Forgotten Palaces? — Documentary - AMP

Rajputs I Warriors of Punjab I Origin, Tribes & Area Complete List राजपूतों का संपूर्ण इतिहास

Subhash Charan - राठौड़ वंश | Rajasthan History | Patwar Special | By Subhash Charan

राजस्थान इतिहास । मारवाड़ रियासत के महत्वपूर्ण प्रश्न । rajasthan marwar riyasat questions

प्रताप के बाद मेवाड़ को योग्य राजा मिला ? | महाराणा अमर सिंह | rajveer sir | The Desi Human

मारवाड़ का इतिहास एवं बीकानेर का इतिहास Important MCQs | Rajasthan History #34 | Saahas Batch🔥

Rajasthan History Series : History of Bikaner Part -1 ( बीकानेर का इतिहास भाग -1 ) By Rajveer Sir

किन्नर ने किया बर्बाद मुग़ल साम्राज्य | mughal empire | राजवीर सर | rajveer sir | The Desi Human

REET, PSI, PATWAR || HISTORY || #Rathore_dynasty of #Marwar || KAILASH CHOUDHARY

मेवाड़ का इतिहास (Important MCQs) | Rajasthan History #22 | Saahas Batch🔥 | Bharat Sir

मारवाड़ का इतिहास ll Rajasthan History ll Rajasthan GK For REET, Patwari 2022 ll

