उच्छिष्ट गणपति कवच की महिमा और रहस्य । हिंदी अनुवाद सहित । uchchisht ganpati kavach benifits
उच्छिष्ट गणपति कवच की महिमा और रहस्य । हिंदी अनुवाद सहित । uchchisht ganpati kavach benifits@Manmathbhaktiofficial हमारे चैनल पर आपको सनातन शास्त्रसम्मत तंत्र,मंत्र,यंत्र, वास्तु,ज्योतिष,आध्यात्मिक ज्ञान,देवी देवताओं और पूजा साधना के गूढ़ रहस्य,समस्या समाधान,उपाय,टोटके आदि मिलेंगे।अच्छा लगे तो सब्सक्राइब अवश्य करें और निरन्तर हमसे जुड़े रहें।हम सनातन परंपरा को मूल मानकर मानव मात्र के कष्ट निवारण हेतु प्रतिबद्ध हैं। पं.अखिलेश औदिच्य वास्तु-ज्योतिष प्रभाकर मन्त्र विशेषज्ञ एवं परा विद्या साधक अमोघ शक्ति आध्यात्मिक ज्योतिष केंद्र,बेगूं(राजस्थान) Whatsapp - 7568974754 / 9928787550 Phonepe/Gpay - 9928787550 Website - www.amoghshakti.in Facebook - / mahakosh.maruti Instagram - / amogh_shakti_astro Mail id - [email protected] Please subscribe our new channel for bhakti sangeet MANMATH BHAKTI / @manmathbhaktiofficial ।। श्री उच्छिष्ट गणपति कवच ।। ऋषिः मे गणकः पातु शिरसि च निरंतरम्। त्राहि मां देवि गायत्री छन्द ऋषिः सदामुखे।। हृदये मां पातु नित्य उच्छिष्टगण देवता। गुह्ये रक्षतु तत् बीजं स्वाहा शक्तिः च पादयोः।। काम कीलकं सर्वांगे विनियोगः च सर्वदा। पार्श्व द्वये सदा पातु स्वशक्तिं गणनायकः।। शिखायां पातु तत्-बीजं भूमध्ये तार बीजकम्। हस्ति वक्त्रः च शिरसि लम्बोदर ललाटके।। उच्छिष्टो नेत्रयोः पातु कर्णौ पातु महात्मने। पाश-अंकुश महाबीज नासिकायां च रक्षतु।। भृतीश्वरः परः पातु आस्यं जिहां स्वयं वपुः। तत् बीजं पातु मां नित्यं ग्रीवायां कण्ठ दर्शके।। गं बीजं च तथा रक्षेत् तथा त्वग्रे च पृष्ठके। सर्वकामः च हृत् पातु पातु मां च करद्वये।। उच्छिटाय च हृदये वहिन बीजं तथा उदरे। माया बीजं तथा कट्यां द्वा-ऊरु सिद्धि दायकः।। जघायां गणनाथः च पादौ पातु विनायकः। शिरसि पाद पर्यन्तं उच्छिष्ट गणनायकः।। आपाद मस्तकांतं च उमापुत्रः च पातु माम्। दिश: अष्टौ च तथाकाशे पाताले विदिशाष्टके।। अहिर्निशं च मां पातु मद चंचल लोचनः। जलेऽनले संग्रामे दुष्ट कारागृहे वने च। राजद्वारे घोरपथे पातुं मां गणनायक:।। शिवपुत्र सदापातु पातु मां सुर अर्चितः। गजाननः सदापातु गणराजः च पातु माम्।। सदाशक्ति रतः पातु मां काम विह्वल। सर्वाभरण भूषाढ्यः पातु मां सिन्दुर अचिंतः।। पंचमोदकरः पातु पातु मां पार्वती सुतः। पाश अंकुश धरः पातु पातु मां च धनेश्वरः।। गदाधरः सदा पातु पातु मां काममोहितः। नग्ननारी रतः पातु पातु मां च गणेश्वर।। अक्षय वरदः शक्तियुक्त: सदापातु। भालचंद्र सदापातुं नाना रत्न विभूषितम।। उच्छिष्ट गणनाथः च मदाघूर्णित लोचनः। नारीयोनि रसास्वादः पातु मां गजगणकः।। प्रसन्न वदनः पातु पातु मां च किरीट धृक्। जटाधरः सदा पातु पातु मां च भग वल्लभः।। पद्मासन स्थितः पातु रक्त वर्ण च पातु माम्। नग्न साम पद उन्मत्तः पातु मां गण दैवतः।। वामांगे सुन्दरी युक्तः पातु मां मन्मथ प्रभुः। क्षेत्र प्रवसितः पातु मां श्रुति पाठकः।। भूषणाढ्यस्तु मां पातु नाना भोग समन्वितः। स्मिताननः सदा पातु श्रीगणेश कुलान्वितः।। श्रीरक्त चन्दन मयः सुलक्षण गणेश्वरः। श्वेतार्क गणनाथश्च हरिद्रा गणनायक:।। परिभद्र गणेशः च पातु सप्त गणेश्वर। प्रवाल गणाध्यक्षो गजदन्तो गणेश्वर:।। हरबीजं गणेश च भदाक्ष गणनायकः। दिव्य औषधि समुद्भूतो गणेश चिन्तितप्रदः।। लवणस्य गणाध्यक्षो गोमयस्य गणेश्वर:। तण्डुलाक्ष गणाध्यक्षो मृत्तिका गणनायक।। स्फटिकाक्ष गणाध्यक्ष रुद्राक्ष गण देवतः। नवरत्नगणेशःच आदिदेव गणेश्वरः।। मयूर वाहन: पातुं पातुं मां मूषकासनः । पातु मां सर्वदा देवो देव दानव पूजितः।। त्रैलोक्य पूजितो देवः पातु मां च विभुः प्रभु। रंगस्थ सदा पातु सागरस्य सदाऽवतु। भूमिस्थं च सदा पातु पातालस्थं च पातु माम्।। अन्तरिक्षे सदा पातु आकाशस्थ सदावतु। चतुष्पधे सदा पातु त्रिपथस्थं च पातु माम्।। बिल्वस्थं च वनस्थं च पातु मां सर्वतः स्थितम्। राजद्वार स्थितं पातु पातु मां शीघ्र सिद्धिदः।। भवानी पूजितः पातु ब्रह्म विष्णु शिवाचितः। इदम् तु कवचं देवि पठनात् सर्वसिद्धिदम्।। उच्छिष्ट गणनाथस्य समंत्र कवचं परम्। स्मरणात् भूपतित्वं च लभते सांगतां ध्रुवम्।। वाचा: सिद्धिकरं शीघ्र परसैन्य विदारणम्। प्रातः मध्यान्ह सायाने दिवा रात्रौ पठेत् नरः।। चतुर्थ्या दिवसे रात्रौ पूजने मानदायकम्। सर्वसौभाग्यदं शीघ्रं दारिद्रय आणंव घातकम्।। सुदार सुप्रजा सौख्यं सर्वसिद्धि करं नृणाम्। जले उनले ऽनिलेऽरण्ये सिंधु तीरे सरित् तटे।। श्मशाने दूरदेशे च रणे पर्वत गहूवरे। राजद्वारे भये घोरे निर्भयो जायते ध्रुवम्।। सागरे च महाशीते दुर्भिक्षे दुष्ट संकटे। भूत-प्रेत पिशाच आदि यक्ष राक्षसजे भये।। राक्षसी यक्षिणी क्रूर शाकिनी डाकिनी भये। राजमृत्यु हरं 'देवि' कवचं कामधेनुवत्।। अनन्तफलदं देवि तथाऽमोघं च पार्वति। कवचेन बिना मंत्रं यो जपेत् गणनायकम्।। इह जन्मनि पापिष्ठो जन्मान्ते मूषको भवेत्। इति परम रहस्यं देव- दैवार्चितस्य कवच।। मुदितं- एतत् पार्वतीशेन देव्यै। पठति स लभते वै भक्ति तो भक्तवर्यः। प्रचुर सकल सौख्यं शक्तिपुत्र प्रसादात्।। #astrology #astrologer #numerologist #vastu #vastuexpert #vedikastrologe #astrologerinindia #bestindianastrologer #gemstones #pukhraj #amoghshakti #akhileshaudichya #bluesaphire#jyotish #ruby #panna #rashifal #astrotips #vastutips #vasturemedies #vastuupay #astrologyupay #totke #lalkitabketotke #saralupay #mantrasadhna #vastushastra#horoscope#mantra #tantra #hindi #hindu #dharm #ramayan #mahabharat #shiva #ram #hanuman #khatushyam #bhajan

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