हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए I दुष्यंत कुमार @ShriPrashant

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

Jis tan lagya Ishq Kamal Discussion Part-2 (जिस तन लगिया इश्क़ कमाल)
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तीन युवा और तीन सवाल: पढ़ाई, कैरियर, परिवार || आचार्य प्रशांत (2021)
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Kabir Saheb ke Dohe । कबीर साहब के दोहे । Part 2
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चलना है दूर मुसाफिर / Chalna Hai Dur Musafir II Kabir Saheb
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हिंदी कविता : दुष्यंत कुमार - हो गयी है पीर पर्वत सी : मनोज बाजपेयी in Hindi Studio w Manish Gupta
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तुम पहले भी मुझे पहचान नहीं पाए, तुम आज भी मुझे जान नहीं रहे || आचार्य प्रशांत (2022)
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खलक सब रैन का सपना, समझ मन कोई नहीं अपना ॥  कबीर साहब
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Ho gai hai peer parvat si pighlni chahiye | हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए | Dushyant Kumar Poem
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उड़ जाएगा हंस अकेला।। कबीर साहब
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"हो गई है पीर पर्वत-सी"-कवि दुष्यंत कुमार-सप्रसंग व्याख्या -॥STUDY WITH ANJU MADAM॥
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तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे। कबीर साहब
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संवाद # 318: Sanskrit scholar exposes pseudoscience peddlers
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कबीर साहब के दोहे
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उनके लिए, जिन्हें ऊँची ज़िन्दगी चाहिए || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश (2022)
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उनके लिए, जिन्हें ऊँची ज़िन्दगी चाहिए || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश (2022)

Main Kavita Hoon | Ho Gayi Hai Peer | Kavita Seth | Dushyant Kumar
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He who worships Ram wins in this world / Kabir Saheb's new song
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अब हम गुम हुए, गुम हुए, गुम हुए /भजन - बाबा बुल्लेशाह, दोहे - संत कबीरदास
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Saye Me Dhoop | Part 01| Dushyant Kumar | Manoj Muntashir | Signatures of Hindi Poetry
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मोको कहां ढूंढे रे बंदे। कबीर साहब
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राम नाम कड़वा लागे, मीठा लागे दाम।। #acharyaprashant #spirituality #climatechange #education #poet
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