रामानंद सागर कृत श्री कृष्ण भाग 42 - श्री कृष्ण और बलराम पहुँचे महर्षि संदीपनि के आश्रम

Ramanand Sagar's Shree Krishna Episode 42 - Shri Krishna and Balaram reached the ashram of Maharishi Sandipani ऋषि गर्ग श्रीकृष्ण और बलराम का यज्ञोपवीत संस्कार करते हैं। उनपर गंगाजल छिड़कते हैं और सूर्य की किरणों से उनके प्राण तेजोमय बनाते हैं। पिता वसुदेव और माताऐं देवकी व रोहणी अपने हाथों से पुत्रों को यज्ञोपवीत धारण कराती हैं। ऋषि गर्ग दोनों बालकों को ब्रह्मचर्य की शिक्षा देने के लिये उनसे प्रश्न करते हैं कि तुम दोनों किसके ब्रह्मचारी हो। श्रीकृष्ण और बलराम दोनों का उत्तर होता है कि हम गुरुदेव के ब्रह्मचारी हैं। इस पर ऋषि कहते हैं कि नहीं, सर्वप्रथम तुम दोनों ब्रह्मा के ब्रह्मचारी हो, इसके बाद अग्निदेव के और तदोपरान्त गुरु के ब्रह्मचारी हो। ऋषि गर्ग कहते हैं कि तुम मुझे तभी आचार्य पुकार सकते हो, जब तुम मेरे ज्ञान को अपने हृदय में धारण करोगे और मेरी वाणी से निकले हर वचन का पालन करोगे। प्रमादहीन रहकर ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करोगे। वह दिन में शयन न करने और वाणी पर संयम रखने की सीख भी देते हैं। यज्ञ को पूर्णाहुति के साथ यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न होता है। ब्रह्मचर्य के नियमों के अनुसार श्रीकृष्ण और बलराम को पहली भिक्षा माता से माँगनी होती है। अपने पुत्र को यूँ भिक्षा माँगते और उसकी झोली में अक्षत डालते हुए माता यशोदा और माता रोहणी द्रवित होती हैं। श्रीकृष्ण व बलराम भिक्षा में मिला अन्न ऋषि गर्ग को समर्पित करते हैं। ऋषि कहते हैं कि अब उन्हें विधिवत शिक्षा ग्रहण करने के लिये गुरु आश्रम जाना होगा। वसुदेव द्वारा पूछने पर ऋषि गर्ग कहते हैं कि वैसे तो विद्यार्जन के लिये सबसे उपयुक्त स्थान काशी है किन्तु वहाँ के सर्वश्रेष्ठ अध्यापक महर्षि सन्दीपनि किसी कारण से काशी छोड़ कर चले गये हैं और उन्होंने महाकाल की नगरी अवन्तिका यानि उज्जयनी के पास अपना आश्रम बना लिया है तो इन्हें वहीं जाकर उनसे प्रार्थना करनी चाहिये कि वह इन्हें विद्यादान दें। वसुदेव हर्षित होते हैं और कहते हैं कि मेरी बड़ी बहन अवन्तिका की राजमाता हैं, इससे श्रीकृष्ण और बलराम को कई सुविधाएं मिल जायेंगी। इसपर ऋषि गर्ग कहते हैं कि गुरु आश्रम में राजकुमार व अन्य बालक एक समान होते हैं। श्रीकृष्ण और बलराम को भूमि पर सोना होगा, नंगे पाव रहना होगा। गुरुदेव व गुरु माता की तमाम तरह से सेवा करनी होगी और आश्रम में जो मिल जाए, उसे खाकर सन्तुष्ट रहना होगा। ऋषि गर्ग जानते हैं कि वह जिन्हें ज्ञानार्जन के लिये भेज रहे हैं वे स्वयं नारायण व शेषावतार हैं। इसलिये वह आशीर्वाद में यह वचन बोलते हैं कि गुरु आश्रम में रहकर आपके वे सभी मनोरथ सिद्ध हो जाएं जिनके लिये आपने इस धरती पर जन्म लिया है। श्रीकृष्ण और बलराम भिक्षुक वेश में मथुरा से नंगे पाव चलते हुए अगली प्रातः अवन्तिका पहुचते हैं। वहाँ महाकाल मन्दिर मे भस्मारती होती है। मन्दिर के निकट ही महर्षि सन्दीपनि का आश्रम है जहाँ यज्ञ चल रहा है। श्रीकृष्ण और बलराम अपने कन्धों पर लकड़ियों का ढेर लेकर वहाँ पहुँचते हैं। यज्ञ उपरान्त महर्षि सन्दीपनि और उनकी पत्नी की दृष्टि उन पर पड़ती है। उन्हें देखकर दोनों के चित्त में अनुराग उत्पन्न होता है। महर्षि उनका परिचय पूछते हैं। श्रीकृष्ण अपना परिचय अपने कुल का उल्लेख करते हुए वसुदेव पुत्र के रूप में देते हैं और गुरु के चरणों की वन्दना करते हैं। बलराम भी अपने अनुज का अनुसरण करते हैं। महर्षि सन्दीपनि को जब यह पता चलता है कि भगवान शिव के शिष्य ऋषि गर्ग श्रीकृष्ण और बलराम को विद्या ग्रहण करने के लिये उनके पास भेजा है तो वह इसे अपना अहोभाग्य मानते हैं। गुरु सन्दीपनि अपनी पत्नी से उनके आश्रम में रहने की व्यवस्था करने को कहते हैं। श्रीकृष्ण व बलराम गुरु माता के चरणों में झुककर प्रणाम करते हैं। गुरुमाता कहती हैं कि श्रीकृष्ण को देखकर उन्हें अपना खोया पुत्र याद आ रहा है। गुरु माता सुदामा की कुटिया में श्रीकृष्ण और बलराम के रहने की व्यवस्था करती हैं। सुदामा अतिथेय भाव से उनका स्वागत करता है और जल से उनके चरण पखारता है। श्रीकृष्ण सुदामा के इस चरित्र से प्रभावित होते हैं और उसे अपना मित्रता प्रदान करते हैं। इस पर सुदामा कहता है कि मैं निर्धन ब्राहमणकुमार हूँ और मित्र के प्रति जो उत्तरदायित्व होते हैं, सम्भवतः मैं उनका निर्वाह नही कर पाऊँगा। तब श्रीकृष्ण उन्हें वचन देते हैं कि सुदामा को उनके लिये कुछ नहीं करना होगा, भविष्य में जब भी आवश्यकता होगी, मित्रधर्म का वे ही निर्वाह करेंगे। Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर Chief Asst. Director - Yogee Yogindar मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर Camera - Avinash Satoskar कैमरा - अविनाश सतोसकर Music - Ravindra Jain संगीत - रविंद्र जैन Lyrics - Ravindra Jain गीत - रविंद्र जैन Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव Cast / पात्र Sarvadaman D. Banerjee सर्वदमन डी. बनर्जी Swapnil Joshi स्वप्निल जोशी Ashok Kumar अशोक कुमार बालकृष्णन Deepak Deulkar दीपक डेओलकर Sanjeev Sharma संजीव शर्मा Pinky Parikh पिंकी पारिख Reshma Modi रेशमा मोदी In association with Divo - our YouTube Partner #shreekrishna #shreekrishnakatha #krishna

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