आज हम लग्न से छठे भाव में चन्द्र के परिणाम देखेंगे @share market
षष्ठ भावस्थ चन्द्र — १२ लग्नों अनुसार शास्त्रीय भावार्थ षष्ठ भाव शत्रु, ऋण, रोग, विवाद, सेवा, परिश्रम, प्रतियोगिता, संघर्ष तथा मातुल पक्ष का भाव है। यह उपचय भाव भी है, इसलिए यहाँ स्थित ग्रह संघर्ष के माध्यम से सफलता देते हैं। चन्द्रमा षष्ठ भाव में होने पर मन में चंचलता अवश्य ला सकता है, किन्तु यदि शुभबलयुक्त हो तो शत्रुओं पर विजय, सेवा-भाव, रोगों से उबरने की क्षमता तथा प्रतियोगिताओं में सफलता प्रदान करता है। १. मेषलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “मेषलग्ने षष्ठे चन्द्रः शत्रून् जित्वा सुखी भवेत्। धैर्ययुक्तः कर्मशीलः कीर्तिमान् च प्रजायते॥” अर्थ — मेष लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा संघर्षों पर विजय दिलाता है। जातक परिश्रमी तथा प्रतियोगी स्वभाव का होता है। २. वृषभलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “वृषलग्ने षष्ठे चन्द्रः ऋणरोगविनाशकृत्। सेवायां मानमाप्नोति धैर्यवान् च प्रजायते॥” अर्थ — वृषभ लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा सेवा, चिकित्सा अथवा परिश्रम के क्षेत्रों में सफलता देता है। शत्रुओं पर विजय मिलती है। ३. मिथुनलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “मिथुनस्य षष्ठे चन्द्रः बुद्ध्या शत्रून् विनाशयेत्। वाग्मी सेवापरो नित्यं जयभागी प्रजायते॥” अर्थ — मिथुन लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा बुद्धि और वाणी के बल पर विरोधियों पर विजय दिलाता है। ४. कर्कलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “कर्कटे षष्ठे चन्द्रः रोगपीडां विनाशयेत्। सेवाभावी जितक्रोधः सुखी चैव प्रजायते॥” अर्थ — कर्क लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा सेवा-भाव बढ़ाता है तथा रोगों से उबरने की क्षमता देता है। मानसिक दृढ़ता आवश्यक रहती है। ५. सिंहरग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “सिंहलग्ने षष्ठे चन्द्रः प्रतापी रिपुनाशकः। कर्मयोगी धैर्ययुक्तः यशस्वी च प्रजायते॥” अर्थ — सिंह लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा शत्रुओं पर विजय, प्रशासनिक क्षमता तथा संघर्ष में सफलता प्रदान करता है। ६. कन्यालग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “कन्यायां षष्ठे चन्द्रः चिकित्सायां विशारदः। सेवाधर्मरतः श्रीमान् जयवान् च प्रजायते॥” अर्थ — कन्या लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा चिकित्सा, सेवा, विश्लेषण तथा उपचार संबंधी कार्यों में सफलता देता है। ७. तुलालग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “तुलालग्ने षष्ठे चन्द्रः शत्रुमध्येऽपि धैर्यवान्। न्यायशीलः सुखी श्रीमान् जयभागी प्रजायते॥” अर्थ — तुला लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा न्यायप्रियता तथा धैर्य के बल पर विरोधियों पर विजय दिलाता है। ८. वृश्चिकलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “वृश्चिकस्य षष्ठे चन्द्रः धैर्यवान् रिपुमर्दनः। गूढयुक्त्या जयं प्राप्य मानवान् स्यान्न संशयः॥” अर्थ — वृश्चिक लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा रणनीति एवं धैर्य के द्वारा शत्रुओं पर विजय दिलाता है। व्यक्ति संघर्षशील होता है। ९. धनुलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “धनुषो षष्ठे चन्द्रः धर्मेण रिपुनाशकः। सेवाभावी जितेन्द्रियः कीर्तिमान् च प्रजायते॥” अर्थ — धनु लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा धर्मयुक्त आचरण से विरोधियों पर विजय तथा सेवा के क्षेत्र में सम्मान प्रदान करता है। १०. मकरलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “मकरे षष्ठे चन्द्रः श्रमेण जयमाप्नुयात्। रोगान् जित्वा सुखी श्रीमान् कर्मशीलः प्रजायते॥” अर्थ — मकर लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा कठिन परिश्रम के द्वारा सफलता तथा रोगों पर विजय प्रदान करता है। ११. कुम्भलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “कुम्भस्य षष्ठे चन्द्रः लोकसेवारतः सदा। शत्रून् जित्वा यशः प्राप्य सुखी चैव प्रजायते॥” अर्थ — कुंभ लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा समाजसेवा, परिश्रम तथा विरोधियों पर विजय का योग देता है। १२. मीनलग्ने षष्ठस्थः चन्द्रः “मीनलग्ने षष्ठे चन्द्रः दयालुः शत्रुनाशकः। सेवया लभते कीर्तिं पुण्यवान् च प्रजायते॥” अर्थ — मीन लग्न में षष्ठस्थ चन्द्रमा सेवा, करुणा तथा धैर्य के माध्यम से सफलता और सम्मान प्रदान करता है। शास्त्रीय सिद्धान्त “षष्ठस्थः शशी शत्रुहानिं सेवायां जयमेव च। रोगपीडां च दद्यात् वा शुभदृष्टौ विनाशयेत्॥” अर्थ — षष्ठ भाव में स्थित चन्द्रमा शत्रुओं पर विजय, सेवा एवं प्रतियोगिता में सफलता देता है। यदि पीड़ित हो तो मानसिक अशान्ति या रोगों की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, किन्तु शुभ प्रभाव होने पर उनसे मुक्ति भी दिलाता है। फलदीपिका “षष्ठगे शशिनि जातः शत्रुभिर्बहुधा युतः। धैर्येण तान् जयेत् पश्चात् सेवया मानमाप्नुयात्॥” अर्थ — षष्ठ भावस्थ चन्द्रमा प्रारम्भ में संघर्ष देता है, किन्तु धैर्य और परिश्रम से शत्रुओं पर विजय तथा सम्मान प्राप्त होता है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र “षष्ठभावगते चन्द्रे शत्रुरोगसमागमः।” अर्थ — षष्ठ भाव में स्थित चन्द्रमा शत्रु या रोग से संबंधित परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है, पर यदि चन्द्रमा बलवान हो तथा शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त हो, तो जातक उन बाधाओं पर विजय प्राप्त करता है। विशेष टिप्पणी: षष्ठ भाव उपचय भाव होने से यहाँ स्थित चन्द्रमा का फल समय के साथ बेहतर होता है। यदि चन्द्रमा शुभबलयुक्त हो तो चिकित्सा, सेवा, न्याय, प्रशासन, सेना, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है। #chandra #astrology #Jyotish #mahakal #dilipkoranne

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