सहजयोग से आत्मसाक्षात्कार और सभी धर्मों की एकता || Shri Mataji Speech
सहजयोग से आत्मसाक्षात्कार और सभी धर्मों की एकता || Shri Mataji Speech सत्य की खोज करने वाले आप सभी साधकों को मेरा प्रणाम। सत्य अपने स्थान पर अडिग और अटल है, उसे न तो बदला जा सकता है और न ही हमारी कल्पना के अनुसार ढाला जा सकता है। यह हमारी बुद्धि से परे है, इसलिए हमें अपनी सीमित मानव चेतना से ऊपर उठना होगा। सभी धर्मों ने यही कहा है कि आत्मा का पुनर्जन्म और अंतर्मुखी परिवर्तन आवश्यक है, परंतु समय के साथ धर्ममार्तंडों ने हमें कर्मकांड और आडंबरों में फँसा दिया। धर्म को साधना का मार्ग बनाने के बजाय पैसों और सत्ता का साधन बना दिया गया। आज की स्थिति यह है कि लोग बिना समझे किसी भी गुरु या परंपरा का अनुसरण करने लगते हैं। संतोशी माता का उदाहरण लें, जिसे फिल्मों ने गढ़ा और लोग उसी की पूजा करने लगे। असल में संतोष का स्रोत स्वयं ईश्वर है, और जब वही संतोष है तो उसके लिए कोई अलग देवी की कल्पना कैसे हो सकती है? यही ढकोसला हर धर्म में फैला है। असल को छोड़कर नकली चीज़ों के पीछे मानव भागता रहा। कुंभ मेले में लाखों लोग स्नान करते हैं यह मानकर कि उनके पाप धुल जाएंगे, परंतु समाज में पाप कम होने के बजाय और बढ़ते जा रहे हैं। इससे लोगों में धर्म पर शंका उठना स्वाभाविक है। वस्तुतः कोई भी धर्म, कोई भी शास्त्र, कोई भी अवतार, योगी या संत गलत नहीं है; गलत वे लोग हैं जिन्होंने धर्म को अपने स्वार्थ के लिए बेच डाला। सत्ता और पैसे के नाम पर युद्ध और रक्तपात होते रहे, पर धर्म का सार कहीं खो गया। सहजयोग का उद्देश्य इन्हीं बंधनों से मुक्त करना है। सहजयोग में आने पर साधक समझता है कि सभी धर्म एक ही परमात्मा की ओर ले जाते हैं। सच्चे साधक को यह मानना होगा कि सब अवतार, सब धर्म, सब एक ही विश्वधर्म का अंग हैं। केवल किसी धर्म से जुड़ने से पाप नहीं रुकते, बल्कि आत्मा का प्रकाश भीतर जागृत होना चाहिए। जब तक यह परिवर्तन नहीं होता, सहजयोगी बनना केवल नाम मात्र है। सहजयोगी तब बनता है जब उसकी कुण्डलिनी जागृत होकर आत्मा का प्रकाश उसके हृदय और चित्त को आलोकित करता है। तब वह समर्थ बन जाता है – ज्ञान से परिपूर्ण, करुणा से ओत-प्रोत, और दूसरों को भी जागरण देने वाला। यही वह अवस्था है जिसे गीता में स्थितप्रज्ञ कहा, कुरान में वली, नानक साहब ने खालिस और बुद्ध ने बुद्ध कहा। पर यह तभी संभव है जब हम अपना हृदय निर्मल करें, ईर्ष्या और स्पर्धा का त्याग करें, और अहंकार को नम्रता से झुकाएँ। जब हृदय का कमल खिलता है तो उसका सुगंध पूरे संसार में फैलता है। तभी कुंडलिनी की शक्तियाँ पूर्ण रूप से कार्य करने लगती हैं और साधक का जीवन वास्तव में दिव्य बन जाता है। #सहजयोग #divinesahajyog #shrimataji #sahajayoga #sahajyog #श्रीमाताजीनिर्मलादेवी #आत्मसाक्षात्कार #निर्मल #कुण्डलिनी #चित्त #meditation #mataji #shrimatajispeech #sahajayogahindi #kundaliniawakening Shri Nirmala Mataji Sahajyog speech Shree nirmala mataji speech in Hindi Sahaja Yoga Meditation कुंडलिनी की शक्तियाँ || Divine Sahajyog Reference :- 1993-1205 ( completed || Divine Sahajyog SHARE & SUPPORT DIVINE SAHAJYOG THANKS 🙏🙏 DIVINE SAHAJYOG Also visit www.divinesahajyog.com More - Meditation At Home https://www.divinesahajyog.com/medita... Cosmic Role Of Sadashiva and Mahakali https://www.divinesahajyog.com/cosmic... https://www.divinesahajyog.com/innoce... ----------------------------------------------------------------------------- Some more video playlist Shri Nirmala Mataji Speech • Shri Mataji Speech Playlist | Kundalini Aw... Mantra Chakra Cleansing & Balancing • Playlist Sahaja Yoga Bhajans Shri Nirmala Mataji • सहज योग भजन | Shri Mataji Bhajans | Sahaja... Raag Mantras for Therapy Sahajyog • Sahajyog Raag Mantras | Healing Music for ... SahajaYoga Treatment • Sahaja Yoga Healing & Treatment | Kundalin... --------------------------------------------------------------------- SUBSCRIBE :- www.divinesahajyog.com ❤️ YouTube / @divinesahajyog 💙Facebook Page - / divinesahajyog 💚Facebook Page - / divinesahajyogyt 💜Instagram - / divinesahajyog 💙Website -www.divinesahajyog.com ---------------------------------------------------------------------------- Disclaimer: This channel DOES NOT promotes or encourages any activities and all content provided by this channel is meant for EDUCATIONAL PURPOSE only. Copyright Disclaimer: - Under section 107 of the copyright Act 1976, allowance is made for FAIR USE for purpose such a as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship and research. Fair use is a use permitted by copyright statues that might otherwise be infringing. Non- Profit, educational or personal use tips the balance in favor of FAIR USE

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