गया विष्णुपद मंदिर |Vishnu Mandir | Gaya #vlog #travel #gaya #facts #dp
#vlog #travel #facts #bihar #vishnu #gaya करीब 30 साल पहले जब गया गया था, तो इस शहर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उस समय घूम-फिर कर घर आ गया। गया से ज्यादा समय यहां के करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोधगया घूमने में गुजरा था। तीन दिन यहां रहने के दौरान जब गया के बारे में और जानकारी मिली, तब पता चला कि क्यों हिंदू धर्म में इस शहर की इतनी मान्यता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी स्थान पर दैत्य गयासुर की छाती पर पांव रख कर उसका वध किया था। जब भगवान विष्ण ने गयासुर को अपने पांव से धरती के अंदर धकेला तो इस चट्टान पर उनके पांव के चिन्ह बन गए। विष्णुपद मंदिर में भगवा के पदचिह्नों का श्रृंगार रक्त चंदन से किया जाता है। इस पर गदा, चक्र, शंख अंकित किए जाते हैं। विष्णुपद मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इंदौर की रानी देवी अहिल्या बाई होल्कर ने 1787 में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। विष्णुपद मंदिर को सोने को कसने वाले पत्थर कसौटी से बनाया गया है। मंदिर के शीर्ष पर 50 किलो सोने का कलश और 50 किलो सोने की ध्वजा लगी है। गर्भगृह में 50 किलो चांदी का छत्र और 50 किलो चांदी का अष्टपहल है। मंदिर के गर्भगृह के द्वार को चांदी से बनाया गया है। इस मंदिर की ऊंचाई करीब सौ फीट है। सभा मंडप में 44 स्तंभ हैं। 54 वेदियों में से 19 वेदी विष्णपुद में ही हैं, जहां पर पितरों के मुक्ति के लिए पिंडदान होता है। पितृपक्ष के अवसर पर यहां तर्पण के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। इस दौरान यहां काफी भीड़ रहती है। बताया जाता है कि यहां तर्पण करने के बाद भगवान विष्णु के चरणों के दर्शन करने से सभी दुखों का नाश होता है और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर परिसर में कई और छोटे-छोटे मंदिर हैं। यहां कई जैन-मंदिर भी हैं। यहां विदेशी पर्यटक भी काफी संख्या में आते हैं। पवित्र फल्गू नदी के किनारे पर स्थित इस शहर के बारे में कहा जाता है कि भगवान राम ने यहां अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था। इसीलिए यहां हिंदू धर्म के श्रद्धालु पिंडदान के लिए आते हैं। फल्गू नदी के बारे में प्रचलित एक कथा के अनुसार वनवास के क्रम में भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण ने यहां विश्राम किया था। उस दौरान पिंडदान का समय होने के कारण प्रभु राम जरूरी सामान का इंतजाम करने चले गये। माता सीता उनकी प्रतीक्षा में बैठी हुई थी कि महाराज दशरथ सहित उनके पूर्वज प्रकट हुए और पिंडदान करने को कहा। उस समय माता सीता के पास पिंडदान के लिए कुछ नहीं था, तो उन्होंने नदी किनारे से रेत उठाकर पिंडदान कर दिया। वहां पर मौजूद एक गाय, यज्ञ की अग्नि, एक पेड़, फल्गू नदी और एक ब्राह्मण इस कर्म के साक्षी बने। लेकिन जब भगवान राम आए तो पिंडदान की वस्तु के लोभ में वृक्ष को छोड़कर सभी पिंडदान किए जाने की बात से मुकर गए। इस पर माता सीता को क्रोध आ गया और उन्होंने वृक्ष को छोड़ सभी को श्राप दे दिया। माता सीता के श्राप के बाद से ही फल्गु नदी की धारा भीतर ही भीतर बहती है। फल्गू का जल केवल वर्षा-ऋतु में ही बहता हुआ दिखाई देता है। माता सीता ने यहां महाराज दशरथ को फल्गु नदी के बालू से पिंड अर्पित किया था, जिसके बाद से यहां बालू से बने पिंड देने का महत्व है। यहां पिंडदान के लिए आने वाले लोग जब नदी की बालू को हाथ से हटाते हैं तो पानी निकलता है। यहां सालों भर पिंडदान होता है। सीता माता ने जहां पिंडदान किया वहां सीता कुंड स्थित है। बताया जाता है कि सीता माता ने यहां स्नान किया था। यहां पर एक छोटा-सा मंदिर भी है। यहां आने वाले श्रद्धालु इस कुंड में स्नान करते हैं। सीता माता ने जिस पेड़ को श्राप नहीं दिया वह आज भी अक्षय वट के रूप में यहां मौजूद है। कहा जाता है कि माता सीता ने इस अक्षय वट को अमर होने का वरदान दिया और कहा कि किसी भी मौसम में उसका एक पत्ता तक नहीं झड़ेगा। विष्णुपद मंदिर के निकट स्थित इस अक्षय-वट के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यह धरती का सबसे पुराना जीवित वृक्ष है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। Follow for updates on Social Links -------------------- ►INSTAGRAM www.instagram.com/daanpetifilmspvtltd/ -------------------- ►FACEBOOK www.facebook.com/daanpetifilms -------------------- ►LINKEDIN www.linkedin.com/company/31288550/admin/ ------------------- ►SUBSCRIBE US ON YT https://www.youtube.com/c/dpplaydaanp... ------------------- CONTACT: [email protected] Thank you so much for watching it! See you next time! 💫 Ps. Like, comment and share. It helps out a bunch regarding algorithm! Pps. Subscribe!! Ppps. Do hit the bell icon you awesome subscriber, or else YouTube won't notify you of them new uploads sigh

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