लौकी को लगाने का सही तरीक़ा, ज़्यादा उत्पादन देने वाली क़िस्म, बीमारियाँ एवं रोकथाम || Bottle-guard
लौकी की खेती के लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है. इसकी बुआई गर्मी एवं वर्षा के समय में की जाती है. यह पाले को सहन करने में बिलकुल असमर्थ होती है. इसकी खेती विभिन्न प्रकार की भुमि में की जा सकती हैं किन्तु उचित जल धारण क्षमता वाली जीवांश्म युक्त हल्की दोमट भुमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गयी हैं #bottlegourd #agriculture #farming काशी गंगा लौकी की इस किस्म को अधिक पैदावार देने के लिए तैयार किया गया है | यह लगभग 400 से 450 क्विंटल के आसपास प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पैदावार देती है | इसमें हरे तथा सामान्य आकार के फल होते है, यह लम्बाई में एक से डेढ़ फीट तक लम्बे होते है | लौकी की यह किस्म बीज रोपाई के 50 से 55 दिन बाद फल देना आरम्भ कर देते है | नरेंद्र रश्मि किस्म के पौधे पौधों की इस किस्म में फल वजन में लगभग एक किलो तक के होते है | इसमें फल हल्के रंग के होते है, तथा बीज रोपाई के लगभग 60 दिन बाद पौधों में फल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते है | इसमें प्रति हेक्टयेर 300 क्विंटल का उत्पादन होता है | अर्को बहार लौकी की इस किस्म को बारिश और गर्मियों के मौसम में उगाया जाता है | इस किस्म के फल सीधे व माध्यम आकार होते है तथा रंग में हल्के हरे होते है | इसमें एक फल का वजन लगभग एक किलो तक का होता है | बीज रोपाई के 50 से 60 दिन के उपरांत इसके फल तोड़ाई के लिए तैयार हो जाते है | पैदावार के मामले में यह लगभग 450 से 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देता है| काशी बहार यह लौकी की एक संकर किस्म है, यह अधिक पैदावार वाली किस्म होती है | जिसमे प्रति हेक्टेयर 520 क्विंटल के आसपास उपज होती है | यह गरमी तथा बारिश दोनों ही मौसम में उगाई जाने वाली किस्म है | इसमें पौधों की प्रारंभिक गांठो पर ही फल लगना शुरू हो जाते है | बीज रोपाई के लगभग 60 दिन बाद इसके फल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते है | इसमें लौकी सामान्य आकार तथा हरे रंग की होती है | इसके अतिरिक्त भी लौकी की कई किस्मे पायी जाती है, जो कि कम समय में अधिक पैदावार देती है | खेत की जुताई का तरीका लौकी की फसल को करने से पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई कर लेनी चाहिए, जिससे खेत में की गयी पुरानी फसल के सारे अवशेष नष्ट हो जाये | इसके बाद खेत की गहरी जुताई कर देनी चाहिए गहरी जुताई के लिए पलाऊ या तवे वाले हलो का उपयोग करना चाहिए | इसके बाद खेत में रोटावेटर को चलवा कर मिट्टी में मौजूद मिट्टी के ढेलो को तोड़ उन्हें भुरभुरा और समतल बना दे | मिट्टी के समतल हो जाने के पश्चात् खेत में लौकी के पौधों को लगाने के लिए क्यारियों को तैयार कर ले | क्यारी धोरे नुमा तथा 10 से 15 फीट दी दूरी पर बनाये, इसके अतिरिक्त बॉस की लकड़ियों का जाल बना कर भी इसकी खेती को किया जा सकता है | इसके बाद खेत में बानी क्यारियों में उचित मात्रा में गोबर की खाद और उवर्रक को डालकर अच्छे से मिला दे | इस प्रक्रिया को पौधों की रोपाई के लगभग 20 दिन पहले की जानी चाहिए | पौधों को कैसे तैयार करे यदि आप चाहे तो सीधे बीजो को खेत में लगाकर भी इसकी खेती कर सकते है | इसके लिए आपको तैयार की गयी नालियों में बीजो को लगाना होता है | बीजो की रोपाई से पहले तैयार की गयी नालियों में पानी को लगा देना चाहिए उसके बाद उसमे बीज रोपाई करना चाहिए | लौकी की जल्दी और अधिक पैदावार के लिए इसके पौधों को नर्सरी में तैयार कर ले फिर सीधे खेत में लगा दे| पौधों को बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन पहले तैयार कर लेना चाहिए | इसके अतिरिक्त बीजो को रोग मुक्त करने के लिए बीज रोपाई से पहले उन्हें गोमूत्र या बाविस्टीन से उपचारित कर लेना चाहिए | इससे बीजो में लगने वाले रोगो का खतरा कम हो जाता है, तथा पैदावार भी अधिक होती है | बीजो की रोपाई का सही समय और तरीका खेत में बीजो की रोपाई से पहले खेत में तैयार की गयी क्यारियों को पानी से भर देना चाहिए इसके बाद बीजो की रोपाई क्यारियों में दोनों तरफ मेड के अंदर करना चाहिए | बीजो की रोपाई में प्रत्येक बीज के बीच दो से तीन फ़ीट की दूरी होना आवश्यक होता है | एक हेक्टेयर खेत में लगभग दो किलो बीज की जरूरत होती है | यदि आप पौधों की सहायता से इसकी खेती को करना चाहते है तो इसके लिए पौधों को खेत में हल्का सा गड्डा कर उसमे लगा देना चाहिए | इसके बाद उसे मिट्टी से अच्छी तरह से दबा देना चाहिए | पौधों को खेत में लगाने से पहले नर्सरी में 20 से 25 दिन पहले बीजो तो तैयार कर लिया जाता है |

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