Maa Mansa Devi, Maa Chandi Devi aur Bilkeshwar Mahadev Ki Ansuni Kahaniyan | Haridwar Documentary
हरिद्वार की पहचान माँ गंगा से है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि माँ गंगा के दोनों किनारों पर खड़े दो पर्वत हर दिन हज़ारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर क्यों आकर्षित करते हैं? एक ओर है बिल्व पर्वत, जहाँ विराजती हैं माँ मनसा देवी. दूसरी ओर है नील पर्वत, जहाँ विराजती हैं माँ चण्डी देवी और इन्हीं दोनों पर्वतों के बीच, बिल्व पर्वत की तलहटी में स्थित है भगवान शिव का प्राचीन बिल्केश्वर महादेव मंदिर, जहाँ मान्यता है कि माँ पार्वती देवी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तीन हज़ार वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. इस डॉक्यूमेंट्री में जानिए: • बिल्केश्वर महादेव मंदिर का इतिहास, इसके नाम की उत्पत्ति और गौरी कुंड की जीवित परंपराएँ। • माँ मनसा देवी के दो दिव्य स्वरूप, महिषासुर मर्दिनी और विष कन्या का रहस्य। • मन्नत के धागों की परंपरा और चारधाम यात्रा से पहले माँ मनसा देवी के दर्शन का महत्व। • शुंभ-निशुंभ के वध की कथा और माँ चण्डी देवी को चामुंडा नाम कैसे मिला। • नील पर्वत पर स्थित चण्डी देवी मंदिर का इतिहास, आस्था और मान्यताएँ। इस यात्रा में हमारे साथ हैं श्री महंत रविंद्र पुरी जी (अध्यक्ष- माँ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट, हरिद्वार), माँ मनसा देवी मंदिर के मुख्य पुजारी श्री महेश कुमार दुबे जी, तथा बिल्केश्वर महादेव मंदिर के व्यवस्थापक जी, जो इन सिद्ध पीठों का इतिहास, परंपराएँ और आध्यात्मिक महत्व विस्तार से साझा करते हैं. मंदिरों तक कैसे पहुँचें: हवाई मार्ग- निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून है, जो हरिद्वार से लगभग 38 किलोमीटर दूर स्थित है। वहाँ से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से हरिद्वार पहुँचा जा सकता है। रेल मार्ग- हरिद्वार जंक्शन रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और लखनऊ से सीधा जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग- हरिद्वार, दिल्ली से NH 334 के माध्यम से लगभग 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दिल्ली, देहरादून और ऋषिकेश से नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। हरिद्वार पहुँचने के बाद: बिल्केश्वर महादेव मंदिर: हरिद्वार रेलवे स्टेशन के निकट, बिल्व पर्वत की तलहटी में स्थित है। यहाँ पैदल या ऑटो से आसानी से पहुँचा जा सकता है। माँ मनसा देवी मंदिर: बिल्व पर्वत की चोटी पर स्थित इस सिद्ध पीठ तक पहुँचने के तीन प्रमुख मार्ग हैं: 1. हर की पौड़ी से सीढ़ी मार्ग 2. रेलवे स्टेशन की ओर से सड़क मार्ग 3. रोपवे (उड़नखटोला) माँ चण्डी देवी मंदिर: नील पर्वत की चोटी पर स्थित इस मंदिर तक दो प्रमुख मार्ग हैं: 1. चंडीघाट से लगभग 3 किलोमीटर का पैदल चढ़ाई मार्ग 2. नजीबाबाद रोड स्थित बेस स्टेशन से रोपवे (उड़नखटोला)

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