वट सावित्री व्रत कथा | बड़ पूजन अमावस्या की संपूर्ण कथा | Vat Savitri Vrat Katha in Hindi |
वट सावित्री व्रत कथा ( बड़ पूजन अमावस्या ) मद्र देश के राजा अश्वपति के यहां पुत्री सावित्री का जन्म हुआ। सावित्री ने सत्यवान की कीति सुनकर मन से उसे अपना पति मान लिया था। राजा ने भी हां भरदी। जब यह बात नारदजी को मालूम हई तो वे राजा अश्वपति से जाकर बोले- राजन् सत्यवान गुणसम्पन्न व धर्मात्मा अवश्य है. लेकिन वह अल्पायु है, केवल एक वर्ष बाद ही उसकी मृत्यु हो जाएगी। नारदजी की बात सुन राजा अश्वपति उदास हो गया। विचार करके सारी बात अपनी पुत्री सावित्री को कह सुनाई। पर सावित्री मानी नहीं, विवाह करवाना पड़ा। सावित्री ने नारदजी से सत्यवान की मृत्यु का समय मालूम कर लिया। सावित्री के सास-ससुर नेत्रहीन थे। सावित्री ने ससुराल पहुंचते ही सास-ससुर की सेवा करना शुरू कर दिया। उसने जब जाना कि पति की मृत्यु का समय नजदीक है, तब सावित्री ने तीन दिन पूर्व से ही उपवास शुरू कर दिया। मृत्यु के दिन नित्य की भांति सत्यवान लकड़ी काटने जाने लगा, तब सावित्री भी सास-ससुर की आज्ञा से सत्यवान के साथ चली गई। सावित्री जंगल में जाकर लकड़ी काटने लगी और सत्यवान एक पेड़ की छांव में सो गया। वहां सांप ने सत्यवान को काट लिया। सावित्री पति को गोद में लेकर रोने लगी, - इतने में उधर से शंकर जी व पार्वती निकले। सावित्री ने उनके पैर - पकड़ कर कहा कि आप मेरे पति को जीवित कर दो। तब उन्होंने कहा आज बड़ पूजा की अमावस है। तू बड़ की पूजा कर तेरा पति जीवित हो जाएगा। बड़ के पत्तों के गहने बनाकर पहन, वो हीरे मोती के हो जाएंगे। तब सावित्री ने बड़ की पूजा की। तभी धर्मराज के दूत सावित्री के पति को ले जाने के लिए आए, उसको देवी-विधान सुनाया, उसकी निष्ठा और पतिप्रेत को देखकर उन्होंने सावित्री को वर मांगने को कहा। सावित्री बोली- मेरे सास-ससुर वनवासी व अंधे हैं, उन्हें आप ज्योति प्रदान करें। यमराज ने तथास्तु कहा और सावित्री से लौट जाने को कहा। यमराज की बात सुनकर सावित्री ने कहा- महाराज जहां पति वही पत्नी कहते हुए पीछे-पीछे चल दी। यह देखकर यमराज ने उसे और वर मांगने को कहा। सावित्री बोली- मेरे ससुर का राज्य छिन गया है, वह उन्हें पुनः प्राप्त हो। यमराज ने यह वर देकर सावित्री को लौट जाने को कहा परंतु सावित्री ने पीछा नहीं छोड़ा तब यमराज ने तीसरा वर मांगने को कहा तो सावित्री ने शत् पुत्रवती होने का वरदान मांग लिया। यमराज ने बोला, "तथास्तु"। सावित्री फिर भी पीछे-पीछे चली तो यमराज बोले अब क्या चाहती हो। सावित्री बोली- मुझे पुत्रवती होने का वचन देकर आप मेरे पति को तो लिये जा रहे हैं। तब यमराज को अपनी भूल ज्ञात हुई तथा वचन रखने के लिए सत्यवान के प्राण वापस कर दिए। सावित्री उस बड़ के पेड़ के पास आई जहां उनके पति का मृत शरीर पड़ा था। उसमें जीवन का संचार हुआ तथा सत्यवान उठकर बैठ गया और घर आकर देखा तो माता-पिता को भी दिव्यज्योति वाला व राजवैभवयुक्त पाया। इसके बाद सत्यवान-सावित्री ने सौ पुत्रों के साथ चिरकाल तक अखंड सौभाग्य व राज्य सुख को प्राप्त किया। जिस तरह सावित्री को पुत्र सुख व अखंड सौभाग्य दिया भगवान वैसा सभी को दे। वट सावित्री व्रत कथा (बड़ पूजन अमावस्या) हिंदू धर्म का एक पवित्र व्रत है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। माता सावित्री की अटूट भक्ति, पतिव्रता धर्म और यमराज से सत्यवान के प्राण वापस लाने की अद्भुत कथा इस व्रत का महत्व बताती है। इस कथा को सुनने और पढ़ने से परिवार में सुख, शांति, संतान सुख और वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है। 🌿🙏✨ #वटसावित्रीव्रत, #वटसावित्रीकथा, #बड़पूजनअमावस्या, #सावित्रीसत्यवान, #VatSavitriVrat, #VatSavitriKatha, #हिंदूकथा, #व्रतकथा, #धार्मिककथा, #अखंडसौभाग्य, #पति_दीर्घायु, #सनातनधर्म, #पूजाविधि, #व्रत_महत्व, #Bhakti, #IndianFestival, #HinduFestival, #Spirituality, #Puja, #DevotionalStory

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