Jagjit & Chitra Singh - Tujhko Dariyadili Kee Qasam Saaqiya-(Pakistan-'79).
Tujhko Dariyadili Kee Qasam Saaqiya (Saba Afghani) by Jagjit & Chitra Singh. (Live in Pakistan-1979 - Side-1, Vol-1). ( साझा किए गए अन्य वर्शन’स: 09 मार्च, 2021-(योउर चोइस): • Jagjit & Chitra Singh - Tujhko Dariyadili ... 10 मार्च, 2021-(पाकिस्तान-1979): • Jagjit & Chitra Singh - Tujhko Dariyadili ... 27 सितम्बर, 2022-(पाकिस्तान-1979): • Jagjit & Chitra Singh - Tujhko Dariyadili ... ) Lyrics in Hindi and English:- तुझको दरियादिली की क़सम साक़िया -(सबा अफ़गानी) - जगजीत & चित्रा सिंह. (लाइव इन पाकिस्तान-1979 - साइड-1, वाल्यूम-1). संगीत : जगजीत सिंह. (एक अन्तरे की ख़राब ध्वनि के लिए खेद है). वादकों का परिचय....... तुझको दरियादिली की क़सम साक़िया तुझको दरियादिली की क़सम साक़िया साक़िया.. साक़िया.. साक़िया..... तुझको दरियादिली की क़सम साक़िया मुस्तक़िल दौर पर दौर चलता रहे (मुस्तक़िल = चिरस्थाई, निरंतर, लगातार) रौनक़-ए-मैक़दा रौनक़-ए-मैक़दा यूँ ही बढ़ती रहे रौनक़-ए-मैक़दा यूँ ही बढ़ती रहे एक गिरता रहे इक सम्भलता रहे रौनक़-ए-मैक़दा यूँ ही बढ़ती रहे रौनक़-ए-मैक़दा यूँ ही बढ़ती रहे एक गिरता रहे इक सम्भलता रहे रौनक़-ए-मैक़दा... सिर्फ शबनम ही शान-ए-गुलिस्ताँ नहीं (शबनम = ओस) (शान-ए-गुलिस्ताँ = बग़ीचे की शान) सिर्फ शबनम ही शान-ए-गुलिस्ताँ नहीं शोला-ओ-गुल का भी दौर चलता रहे सिर्फ शबनम ही शान-ए-गुलिस्ताँ नहीं शोला-ओ-गुल का भी दौर चलता रहे अश्क भी चश्म-ए-पुरनम से बहते रहें (अश्क = आँसू) (चश्म-ए-पुरनम = भीगी हुई आँखें) अश्क भी चश्म-ए-पुरनम से बहते रहें और दिल से धुआँ भी निकलता रहे अश्क भी चश्म-ए-पुरनम से बहते रहें अश्क भी चश्म-ए-पुरनम से बहते रहें और दिल से धुआँ भी निकलता रहे सिर्फ शबनम ही शान-ए-गुलिस्ताँ नहीं शोला-ओ-गुल का भी दौर चलता रहे तेरे कब्ज़े में है ये निज़ाम-ए-जहाँ (निज़ाम-ए-जहाँ = दुनिया का प्रबंध) तेरे कब्ज़े में है ये निज़ाम-ए-जहाँ तू जो चाहे तो सहरा बने गुलसिताँ (सहरा = रेगिस्तान) (गुलसिताँ = बग़ीचा) तेरे कब्ज़े में है ये निज़ाम-ए-जहाँ तू जो चाहे तो सहरा बने गुलसिताँ हर नज़र पर तेरी फूल खिलते रहें हर नज़र पर तेरी फूल खिलते रहें हर इशारे पे मौसम बदलता रहे हर नज़र पर तेरी फूल खिलते रहें हर नज़र पर तेरी फूल खिलते रहें हर इशारे पे मौसम बदलता रहे तेरे चेहरे पे ये तेरे चेहरे पे ये तेरे चेहरे पे ये तेरे चेहरे पे ये ज़ुल्फ़ बिखरी हुई ज़ुल्फ़ बिखरी हुई तेरे चेहरे पे तेरे चेहरे पे ये ज़ुल्फ़ बिखरी हुई नींद की गोद में सुबह निखरी हुई तेरे चेहरे पे ये ज़ुल्फ़ बिखरी हुई सरगम... तेरे चेहरे पे ये ज़ुल्फ़ बिखरी हुई नींद की गोद में सुबह निखरी हुई तेरे चेहरे पे ये ज़ुल्फ़ बिखरी हुई ज़ुल्फ़ बिखरी हुई ज़ुल्फ़ बिखरी हुई तेरे चेहरे पे ये ज़ुल्फ़ बिखरी हुई नींद की गोद में सुबह निखरी हुई और इस पर सितम ये अदाएं तेरी और इस पर सितम ये अदाएं तेरी और इस पर सितम ये अदाएं तेरी दिल है आख़िर कहाँ तक सम्भलता रहे और इस पर सितम ये अदाएं तेरी दिल है आख़िर कहाँ तक सम्भलता रहे सिर्फ शबनम ही शान-ए-गुलिस्ताँ नहीं शोला-ओ-गुल का भी दौर चलता रहे सिर्फ शबनम... इस में ख़ून-ए-तमन्ना की तासीर है (तासीर = प्रभाव, असर) इस में ख़ून-ए-तमन्ना की तासीर है ये वफ़ा-ए-मोहब्बत की तस्वीर है इस में ख़ून-ए-तमन्ना की तासीर है ये वफ़ा-ए-मोहब्बत की तस्वीर है ऐसी तस्वीर बदले ये मुमकिन नहीं ऐसी तस्वीर बदले ये मुमकिन नहीं रंग चाहे ज़माना बदलता रहे ऐसी तस्वीर बदले ये मुमकिन नहीं ऐसी तस्वीर बदले ये मुमकिन नहीं रंग चाहे ज़माना बदलता रहे सिर्फ शबनम ही शान-ए-... वो हो शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के गुलहा-ए-तर (शम्म-ए-फ़रोज़ाँ = प्रकाशमान चिराग़) वो हो शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के गुलहा-ए-तर दोनों से ज़ीनत-ए-अंजुमन है मगर (ज़ीनत-ए-अंजुमन = महफ़िल की शोभा) वो हो शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के गुलहा-ए-तर दोनों से ज़ीनत-ए-अंजुमन है मगर ए 'सबा' ए 'सबा' अपनी अपनी ए 'सबा' अपनी अपनी ये तक़दीर है वो हो शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के गुलहा-ए-तर दोनों से ज़ीनत-ए-अंजुमन है मगर ए 'सबा' अपनी अपनी ये तक़दीर है कोई हो सेज पर कोई जलता रहे ए 'सबा' अपनी अपनी ये तक़दीर है ए 'सबा' अपनी अपनी ये तक़दीर है कोई हो सेज पर कोई जलता रहे सिर्फ शबनम ही शान-ए-गुलिस्ताँ नहीं शोला-ओ-गुल का भी दौर चलता रहे अश्क भी चश्म-ए-पुरनम से बहते रहें और दिल से धुआँ भी निकलता रहे... (सबा अफ़गानी) ---------------------- Tujhko Dariyadili Kee Qasam Saaqiya- (Saba Afghani) - Jagjit &-Chitra Singh. (Live in Pakistan-1979 - Side-1, Vol.-1). Music : Jagjit Singh. (Poor audio of one couplet is regretted). ( Other versions shared on: March 09, 2021-(Your Choice): • Jagjit & Chitra Singh - Tujhko Dariyadili ... March 10, 2021-(Pakistan-1979): • Jagjit & Chitra Singh - Tujhko Dariyadili ... September 27, 2022-(Pakistan-1979): • Jagjit & Chitra Singh - Tujhko Dariyadili ... ) Introduction of Musicians……. Tujhko dariyadili kee qasam saaqiya Saaqiya.. Saaqiya.. Saaqiya….. Tujhko dariyadili kee qasam saaqiya Mustaqil daur par daur chalta rahe Ronaq-e-maikada Ronaq-e-maikada yoon hee badhti rahe Ronaq-e-maikada yoon hee badhti rahe Aik girta rahe ik sambhalta rahe Ronaq-e-maikada yoon hee badhti rahe Ronaq-e-maikada yoon hee badhti rahe Aik girta rahe ik sambhalta rahe Ronaq-e-maikada… Sirf shabnam hee shaan-e-gulistan naheen Sirf shabnam hee shaan-e-gulistan naheen Shola-o-gul ka bhi daur chalta rahe Sirf shabnam hee shaan-e-gulistan naheen (For the remaining lyrics of this and the other couplets, please see the Hindi lyrics above or in the main video). (Saba Afghani) ============ Many more ghazals, @ URL:: / @scsharmaisback This is a Non-Profit Channel. No copyright infringement is intended. Viewers are welcome to interact through mail on: [email protected].

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