श्री हित चतुरासी जी पद- (13-24) श्री हित हरिवंश 🌸

🌹जै जै श्री हित हरिवंश 🌹 Shri Hit Chaturasi Ji ✨ Subscribe 🌸 ।।13।। नन्द के लाल हरयौ मन मोर । हौं अपने मोतिन लर पोवत, काँकर डारि गयौ सखि भोर ।। बंक विलोकनि चाल छबीली, रसिक शिरोमणि नन्द किसोर । कहि कैसे मन रहत श्रवण सुनि, सरस मधुर मुरली की घोर ।। इंदु गोविन्द वदन के कारण, चितवन कौं भये नैंन चकोर । (जै श्री ) हित हरिवंश रसिक रस जुवती, तू लै मिलि सखि प्राण अकोर ।।13।। ।।14।। अधर अरुन तेरे कैसे कै दुराऊँ, रवि शशि शंक भजन कियौ अपवस, अध्बुध रंगन कुसुम बनाऊँ ।। सुभ कौसेय कसिव कौस्तुभमणि, पंकज-सुतन लेे अंगनि लुपाऊँ । हरषित इन्दु तजत जैसे जलधर, सो भ्रम ढूँढि कहाँ हों पाऊँ ।। अम्बुन दम्भ कछू नहीं व्यापत, हिमकर तपै ताहि कैसे कैं बुझाऊँ । (जै श्री) हित हरिवंश रसिक नवरग पिय, भृकुटि भौंह तेरे खंजन लराऊँ।।14।। ।।15।। अपनी बात मोसौं कहि री भामिनी, औंगी मौंगी रहति गरव की माती । हौं तोसौं कहत हारी, सुनिरी राधिका प्यारी, निशि कौ रंग क्यों न कहत लजाती ।। गलित कुसुम बैनी, सुनिरी सारग-नैंनी, छूटी लट अचरा बदत अरसाती । अधर निरंग रँग रच्यौरी कपोलन, जुवति चलति गजगति अरुझाती ।। रहसि रमी छबीले, रसन बसन ढीले, शिथिल कसनि कंचुकी उर राती ।। सखी सौं सुनी श्रवन, वचन मुदित मन, चलि हरिवंश भवन मुसिकाती ।।15।। ।16।। आज मेरे कहे चलौ मृगनैंनी । गावत सरस जुवति मंडल में, पिय सौं मिलैं भलें पिकबैंनी।। परम प्रवीण कोक-विद्या में, अभिनय निपुन लाग-गति लैनी । रूपरासि सुनि नवल किशोरी, पल-पल घटत चाँदनी रैनी ।। (जै श्री ) हित हरिवंश चली अति आतुर, राधारवन सुरत सुख दैनी। रहसि रभस आलिंगन चुम्बन, मदन कोटि कुल भई कुचैनी ।16।। ।।17।। आजु देखि ब्रज-सुन्दरी मोहन बनी केलि । अंस-अंस बाहु दै, किशोर जोर रूप रासि, मनौ तमाल अरुझि रही सरस कनक बेलि ।। नव निकुंज भ्रमर गुंज, मंजु घोष प्रेम पुंज, गान करत मोर पिकनि अपने सुर सों मेलि । मदन मुदित अंग-अंग, बीच-बीच सुरत रंग, पल-पल हरिवंश पिवत नैंन चषक झेलि।।17।। ।।18।। सुनि मेरौ वचन छबीली राधा । तैं पायौ रससिंधु अगाधा ।। तू वृषवानु गोप की बेटी । मोहनलाल रसिक हँसि भेटी ।। जाहि बिरंचि उमापति नाये । तापै तैं वन-फूल बिनाये ।। जो रस नेति नेति श्रुति भाख्यौ । ताकौ तैं अधर सुधारस चाख्यौ ।। तेरौ रूप कहत नहिं आवै । (जै श्री) हित हरिवंश कछुक जस गावै ।।18।। ।। 19 ।। खेलत रास रसिक ब्रज-मंडन । जुवतिन अंस दिये भुज दंडन ।। सरद विमल नभ चन्द्र विराजै । मधुर-मधुर मुरली कल बाजै ।। अति राजत घनश्याम तमाला । कंचन-बेलि बनी ब्रजबाला ।। बाजत ताल मृदंग उपंगा । गान मथत मन कोटि अनंगा ।। भूषण बहुत विविध रंग सारी । अंग सुघंग दिखावत नारी ।। बरसत कुसुम मुदित सुरयोषा । सुनियत दिवि दुंदुभि कल घोषा ।। (जै श्री) हित हरिवंश मगन मन श्यामा । राधारवन सकल सुख धामा ।। 19 ।। ।।20।। मोहनलाल के रसमाती । वधू गुपत-गोवत कत मोसौं, प्रथम नेह सकुचाती ।। देखी सँभार पीत पट ऊपर, कहाँ चूनरी राती । टूटी लर लटकत मोतिन की, नख बिधु अंकित छाती ।। अधर-बिंब खंडित मषि मंडित, गंड चलति अरुझाती । अरुण नैंन घूमत आलस जुत, कुसुम गलित लटपाती ।। आजु रहसि मोहन सब लूटी, विविध आपुनी थाती । (जै श्री) हित हरिवंश वचन सुनी भामिनि, भवन चली मुसकाती ।।20।। तेरे नैंन करत दोउ चारी । अति कुलकात समात नहीं कहुँ मिले हैं कुंज विहारी ।। विथुरी माँग कुसुम गिरि गिरि परैं, लटकि रही लट न्यारी । उर नख रेख प्रकट देखियत हैं, कहा दुरावति प्यारी ।। परी है पीक सुभग गंडनि पर, अधर निरँग सुकुमारी । (जै श्री) हित हरिवंश रसिकनी भामिनि, आलस अँग अँग भारी ।।21।। नैंननिं पर वारौं कोटिक खंजन । चंचल चपल अरुन अनियारे, अग्र भाग बन्यौ अंजन ।। रुचिर मनोहर बंक बिलोकनि, सुरत समर दल गंजन । (जै श्री)हित हरिवंश कहत न बनै छबि, सुख समुद्र मन रंजन ।। 22।। राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल । तौं निजु भजन कनक तन जोवन, लियौ मनोहर मोल ।। अधर निरंग अलक लट छूटी, रंजित पीक कपोल । तूँ रस मगन भई नहिं जानत, ऊपर पीत निचोल ।। कुच जुग पर नख रेख प्रकट मानौं, संकर सिर ससि टोल । (जै श्री) हित हरिवंश कहत कछू भामिनि, अति आलस सौं बोल ।। 23 ।। आजु गोपाल रास रस खेलत, पुलिन कलपतरु तीर री सजनी । सरद विमल नभ चंद विराजत, रोचक त्रिविध समीर री सजनी ।। चंपक बकुल मालती मुकुलित, मत्त मुदित पिक कीर री सजनी । देसी सुघंग राग रँग नीकौ, ब्रज जुवतिनु की भीर री सजनी ।। मघवा मुदित निसान बजायौ, व्रत छाँड़यौ मुनि धीर री सजनी । (जै श्री)हित हरिवंश मगन मन स्यामा, हरति मदन घन पीर री सजनी ।। 24 ।।

श्रीहित चौरासी पद गान (24-36) ✨ महाराज जी के श्रीमुख वाणी से अमृतमयी भक्ति 🙏 #Vrindavan #HitChaurasi
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Shri Hit Chaturasi Ji (Verse 1-12) Shri Hit Harivansh 🌸
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राधावल्लभ श्री हरिवंश नाम कीर्तन | Radhavallabh Shri Harivansh Naam Kirtan
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ये कथा सुनकर रोते हुए नाम जप करने लग जाओगे ! // Shri Hit Premanand Ji Maharaj
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 अहो लड़ेती! इतनी मोपै कृपा करो बलि जाऊँ || 🌸भोरी सखी पद 🌸 || 🌼 श्रीहित हरिवंश 🌼
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आज ठाकुरजी ने आज बड़ों उधम मचयों 😄 |  यह लीला सुनकर आप भी हँस पड़ेंगे! 😂 | लाल जू की नौका-विहार लीला
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Radha Vallabh Shree Harivansh 🌸🏵️(unplugged) track 2 Kirtan @BhajanMarg #premanandjimaharaj
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हिंदी Lyrics के साथ संगीतमय श्री हित चतुरासी जी का सामूहिक गायन राधा केलि कुँज
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श्री हित 84 जी की ऐसी अदभुत व्याख्या 😍 श्री इंद्रेश जी द्वारा..!
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भक्त नामावली / Bhakt Namavali with lyrics -  Vrindavan Sankirtaniyas 9915283309
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Shrihit Chaurasi Pad Gaan (36-48) ✨ Amritmayi devotion from the mouth of Maharaj Ji 🙏 #Vrindavan ...
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क्यों करें निरंतर नाम जप ? क्या सिर्फ "राधा" नाम जप से होगी भगवत्प्राप्ति ? #premanandjimaharaj
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हिंदी Lyrics के साथ संगीतमय श्री हित चतुरासी जी(Chaturasi Ji)का सामूहिक गायन | राधा केलि कुँज
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Jay Jay Radha Vallabh Shri Harivansh - Krishna Bhajan | Radhavallabh Shri Harivansh Naam Jap
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श्री हित हरिवंश महाप्रभु चरित्र कथा । Indresh Upadhyay Katha
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गोविंद दास ठाकुरजी को संगीत सिखाते सिखाते डाट रहे है और किशोरी जी ये देखकर हस रही है
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इस स्तुति को सुनने से अवश्य होंगे राधावल्लभ के दर्शन | Shri Vrindavan dham | Shri Hit Harivansh
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Shri Hit Chaurasi Ji Paath | Hit Chaurasi Pad 1-84 #SHRIHITCHAURASI #hitchaurasi #shrihitharivansh
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हित चौरासी पद गायन संख्या (12- 24) तक सुनिए महाराज जी के मुख से 🌸🌸🙏 #hitambrishji #radhavallabh
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हिंदी Lyrics के साथ संगीतमय श्री हित चतुरासी जी (Chaturasi Ji) का सामूहिक गायन - राधा केलि कुँज
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