भगवान शिव द्वारा अवतार सिद्धान्त निरुपण #मानसगान #RamcharitManas

पुनि पुनि प्रभु पद कमल गहि जोरि पंकरुह पानि। बोलीं गिरिजा बचन बर मनहुँ प्रेम रस सानि॥119॥ भावार्थ:-बार- बार स्वामी (शिवजी) के चरणकमलों को पकड़कर और अपने कमल के समान हाथों को जोड़कर पार्वतीजी मानो प्रेमरस में सानकर सुंदर वचन बोलीं॥119॥ चौपाई : ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी॥ तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरूप जानि मोहि परेऊ॥1॥ भावार्थ:-आपकी चन्द्रमा की किरणों के समान शीतल वाणी सुनकर मेरा अज्ञान रूपी शरद-ऋतु (क्वार) की धूप का भारी ताप मिट गया। हे कृपालु! आपने मेरा सब संदेह हर लिया, अब श्री रामचन्द्रजी का यथार्थ स्वरूप मेरी समझ में आ गया॥1॥ नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा॥ अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड़ नारि अयानी॥2॥ भावार्थ:-हे नाथ! आपकी कृपा से अब मेरा विषाद जाता रहा और आपके चरणों के अनुग्रह से मैं सुखी हो गई। यद्यपि मैं स्त्री होने के कारण स्वभाव से ही मूर्ख और ज्ञानहीन हूँ, तो भी अब आप मुझे अपनी दासी जानकर-॥2॥ प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू॥ राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी॥3॥ भावार्थ:-हे प्रभो! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो जो बात मैंने पहले आपसे पूछी थी, वही कहिए। (यह सत्य है कि) श्री रामचन्द्रजी ब्रह्म हैं, चिन्मय (ज्ञानस्वरूप) हैं, अविनाशी हैं, सबसे रहित और सबके हृदय रूपी नगरी में निवास करने वाले हैं॥3॥ नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू। मोहि समुझाइ कहहु बृषकेतू॥ उमा बचन सुनि परम बिनीता। रामकथा पर प्रीति पुनीता॥4॥ भावार्थ:-फिर हे नाथ! उन्होंने मनुष्य का शरीर किस कारण से धारण किया? हे धर्म की ध्वजा धारण करने वाले प्रभो! यह मुझे समझाकर कहिए। पार्वती के अत्यन्त नम्र वचन सुनकर और श्री रामचन्द्रजी की कथा में उनका विशुद्ध प्रेम देखकर-॥4॥ दोहा : हियँ हरषे कामारि तब संकर सहज सुजान। बहु बिधि उमहि प्रसंसि पुनि बोले कृपानिधान॥120 क॥ भावार्थ:-तब कामदेव के शत्रु, स्वाभाविक ही सुजान, कृपा निधान शिवजी मन में बहुत ही हर्षित हुए और बहुत प्रकार से पार्वती की बड़ाई करके फिर बोले- ॥120 (क)॥ सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल। कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड़॥120 ख॥ भावार्थ:-हे पार्वती! निर्मल रामचरितमानस की वह मंगलमयी कथा सुनो जिसे काकभुशुण्डि ने विस्तार से कहा और पक्षियों के राजा गरुड़जी ने सुना था॥120 (ख)॥ सो संबाद उदार जेहि बिधि भा आगें कहब। सुनहु राम अवतार चरति परम सुंदर अनघ॥120 ग॥ भावार्थ:-वह श्रेष्ठ संवाद जिस प्रकार हुआ, वह मैं आगे कहूँगा। अभी तुम श्री रामचन्द्रजी के अवतार का परम सुंदर और पवित्र (पापनाशक) चरित्र सुनो॥120(ग)॥ हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित। मैं निज मति अनुसार कहउँ उमा सादर सुनहु॥120 घ॥ भावार्थ:-श्री हरि के गुण, मान, कथा और रूप सभी अपार, अगणित और असीम हैं। फिर भी हे पार्वती! मैं अपनी बुद्धि के अनुसार कहता हूँ, तुम आदरपूर्वक सुनो॥120 (घ)॥ चौपाई : सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए॥ हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥1॥ भावार्थ:-हे पार्वती! सुनो, वेद-शास्त्रों ने श्री हरि के सुंदर, विस्तृत और निर्मल चरित्रों का गान किया है। हरि का अवतार जिस कारण से होता है, वह कारण 'बस यही है' ऐसा नहीं कहा जा सकता (अनेकों कारण हो सकते हैं और ऐसे भी हो सकते हैं, जिन्हें कोई जान ही नहीं सकता)॥1॥ राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी॥ तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना॥2॥ भावार्थ:-हे सयानी! सुनो, हमारा मत तो यह है कि बुद्धि, मन और वाणी से श्री रामचन्द्रजी की तर्कना नहीं की जा सकती। तथापि संत, मुनि, वेद और पुराण अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार जैसा कुछ कहते हैं॥2॥ तस मैं सुमुखि सुनावउँ तोही। समुझि परइ जस कारन मोही॥ जब जब होई धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥3॥ भावार्थ:-और जैसा कुछ मेरी समझ में आता है, हे सुमुखि! वही कारण मैं तुमको सुनाता हूँ। जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं॥3॥ चौपाई : करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी॥ तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥4॥ भावार्थ:-और वे ऐसा अन्याय करते हैं कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता तथा ब्राह्मण, गो, देवता और पृथ्वी कष्ट पाते हैं, तब-तब वे कृपानिधान प्रभु भाँति-भाँति के (दिव्य) शरीर धारण कर सज्जनों की पीड़ा हरते हैं॥4॥ दोहा : असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु। जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु॥121॥ भावार्थ:-वे असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने (श्वास रूप) वेदों की मर्यादा की रक्षा करते हैं और जगत में अपना निर्मल यश फैलाते हैं। श्री रामचन्द्रजी के अवतार का यह कारण है॥121॥ चौपाई : सोइ जस गाइ भगत भव तरहीं। कृपासिंधु जन हित तनु धरहीं॥ राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका॥1॥ भावार्थ:-उसी यश को गा-गाकर भक्तजन भवसागर से तर जाते हैं। कृपासागर भगवान भक्तों के हित के लिए शरीर धारण करते हैं। श्री रामचन्द्रजी के जन्म लेने के अनेक कारण हैं, जो एक से एक बढ़कर विचित्र हैं॥1॥ जनम एक दुइ कहउँ बखानी। सावधान सुनु सुमति भवानी॥ द्वारपाल हरि के प्रिय दोऊ। जय अरु बिजय जान सब कोऊ॥2॥ भावार्थ:-हे सुंदर बुद्धि वाली भवानी! मैं उनके दो-एक जन्मों का विस्तार से वर्णन करता हूँ, तुम सावधान होकर सुनो। श्री हरि के जय और विजय दो प्यारे द्वारपाल हैं, जिनको सब कोई जानते हैं॥2॥ शेष यहाँ: https://hindi.webdunia.com/religion/r...

रामायण भाग 12 से 22 तक  All India Radio
▶︎

रामायण भाग 12 से 22 तक All India Radio

शिव भजन || Pujya Bhaishree Rameshbhai Oza || Shiva Ashtakam || Lingaashtakam || Shiv mantra
▶︎

शिव भजन || Pujya Bhaishree Rameshbhai Oza || Shiva Ashtakam || Lingaashtakam || Shiv mantra

आज पुर्णिमा को सुनें | चंद्र देव 108 नाम | Chandra Dev 108 Name | होगी सभी मनोकामना पूर्ण
▶︎

आज पुर्णिमा को सुनें | चंद्र देव 108 नाम | Chandra Dev 108 Name | होगी सभी मनोकामना पूर्ण

अत्रि मुनि कृत श्री राम स्तुति...  I Pujya Prembhushanji Maharaj I AURAIYA U.P. I
▶︎

अत्रि मुनि कृत श्री राम स्तुति... I Pujya Prembhushanji Maharaj I AURAIYA U.P. I

Balkand | Doha 26 Se 55 Tak | Shriramcharitmanas | Ramayan | Dusara Masparayan
▶︎

Balkand | Doha 26 Se 55 Tak | Shriramcharitmanas | Ramayan | Dusara Masparayan

जय राम रमा रमनं समनं l Jai Ram Rama Ramnam Shamnam I Sri Ramcharitmanas l Madhvi Madhukar
▶︎

जय राम रमा रमनं समनं l Jai Ram Rama Ramnam Shamnam I Sri Ramcharitmanas l Madhvi Madhukar

तुलसी रामायण  | Tulsi Ramayana  -  Shri Ramcharitmanas | Bal Kand (Part 1) | Mukesh
▶︎

तुलसी रामायण | Tulsi Ramayana - Shri Ramcharitmanas | Bal Kand (Part 1) | Mukesh

कबीर भजन | Re Man, Kahe Bhatake Bavare?
▶︎

कबीर भजन | Re Man, Kahe Bhatake Bavare?

भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य संवाद | Shiv Parvati Samvad Rajan Ji Maharaj
▶︎

भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य संवाद | Shiv Parvati Samvad Rajan Ji Maharaj

श्री कालिदासकृत मंगलाष्टक पाठ | Shri Kalidas Krit Mangal Ashtakam
▶︎

श्री कालिदासकृत मंगलाष्टक पाठ | Shri Kalidas Krit Mangal Ashtakam

रामचरितमानस Ramcharitmanas - Ramayan Siddh Chaupai | Ram Bhajan | Siya Ram May Sab Jag Jani
▶︎

रामचरितमानस Ramcharitmanas - Ramayan Siddh Chaupai | Ram Bhajan | Siya Ram May Sab Jag Jani

रामचरितमानस Ramcharitmanas - Ramayan Siddh Chaupai | Bhakti Song | Ram Bhajan | Ram Charit Manas
▶︎

रामचरितमानस Ramcharitmanas - Ramayan Siddh Chaupai | Bhakti Song | Ram Bhajan | Ram Charit Manas

सोमवार के दिन अपने घर में ये सुंदरकांड चलाकर रख देना कर्ज खत्म, बीमारी खत्म और धन वर्षा शुरू
▶︎

सोमवार के दिन अपने घर में ये सुंदरकांड चलाकर रख देना कर्ज खत्म, बीमारी खत्म और धन वर्षा शुरू

जय राम रमा रमनं समनं | Jai Ram Rama Ramnam | शिवजी ने प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी पर इसे गाया था
▶︎

जय राम रमा रमनं समनं | Jai Ram Rama Ramnam | शिवजी ने प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी पर इसे गाया था

आज की कथा श्री राम कथा सफलता पाने के लिए संघर्ष करना क्यों जरूरी है महिलाएं ध्यान से जरूर सुने
▶︎

आज की कथा श्री राम कथा सफलता पाने के लिए संघर्ष करना क्यों जरूरी है महिलाएं ध्यान से जरूर सुने

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् | मृत्युंजय हिरेमठ | सौराष्ट्र सोमनाथम् | Dwadash Jyotirlinga Stotram
▶︎

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् | मृत्युंजय हिरेमठ | सौराष्ट्र सोमनाथम् | Dwadash Jyotirlinga Stotram

मंगल भवन अमंगल हारी | Ramayan Chaupayi | सम्पूर्ण रामायण कथा | Ravi Raj | Ram Katha 2026
▶︎

मंगल भवन अमंगल हारी | Ramayan Chaupayi | सम्पूर्ण रामायण कथा | Ravi Raj | Ram Katha 2026

POWERFUL RAMA mantra to remove negative energy - Shri Rama Rameti Rameti Mantra - (3 hours)
▶︎

POWERFUL RAMA mantra to remove negative energy - Shri Rama Rameti Rameti Mantra - (3 hours)

बंदउँ गुरु पद पदुम परागा रामायण चौपाइयां |Bandaun Guru Pad Ramayan|Bandaun pratham Mahisur charna
▶︎

बंदउँ गुरु पद पदुम परागा रामायण चौपाइयां |Bandaun Guru Pad Ramayan|Bandaun pratham Mahisur charna

SHREE KRISHNA GOVIND HARE MURARE I SHREE KRISHNA SANKIRTAN श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे -संकीर्तन
▶︎

SHREE KRISHNA GOVIND HARE MURARE I SHREE KRISHNA SANKIRTAN श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे -संकीर्तन