सुनते ही दृष्टि खुलेगी ईशावास्योपनिषद कक्षा 6 #meditation #dhyana
"🔴 Meditation goes Live daily at 3:58 AM IST | 6:30 PM ET (US) | 3:30 PM PT (US) | 8:30 AM Sydney" Line 2: "Missed it live? This replay is up immediately — no waiting." तत एजति तत न एजति तत दूरे तत उ अन्तिके, तत अन्तः अस्य सर्वस्य तत सर्वस्य अस्य उ बाह्यतः तत = वे ; एजति = चलते हैं; तत = वे ;न = नहीं ; एजति = चलते हैं ; तत = वे ; दूरे = दूर हैं; तत = वे ;उ अन्तिके = अत्यन्त निकट हैं ;तत = वे; अन्तः= भीतर हैं ; अस्य = इस; सर्वस्य = समस्त में है; तत = वे; सर्वस्य = समस्त; अस्य = इस ;उ बाह्यतः = बाहर भी हैं. वह चलता भी है, वह नहीं भी चलता है, वह बहुत दूर भी है और अत्यन्त निकट भी है। वह भीतर ही है और बाहर भी है। kATHOPANISHAD. श्लोक - 15 अशब्दम अस्पर्शम अरूपम अव्ययम तथा अरसम नित्यम अगन्धवत च यत अनादि अनन्तम महतः परम ध्रुवम निचाय्या तत मृत्युमुखात प्रमुच्यते अशब्दम अस्पर्शम अरूपम अव्ययम = शब्दरहित, स्पर्श रहित, रूप रहित, अविनाशी तथा अरसम, नित्यम, अगन्धवत च यत = और रसरहित नित्य गन्ध रहित और जो अनादि, अनन्तम, महतः, परम ध्रुवम = अनादि अनन्त महत से परे अपरिवर्तनीय निचाय्या तत मृत्युमुखात प्रमुच्यते = जान कर उसे मृत्यु मुख से मुक्त हो जाता (आत्मा के 11 मुख्य भाव व्यक्त किए गए हैं ) अगर आप 60 दिन की ब्रह्म मुहूर्त ध्यान के मॉनिटरिंग कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं तो इस पुस्तक को प्राप्त करें जिससे आपका स्वतः उसमे पंजीकरण हो जायेगा। पुस्तक प्राप्त करते ही आपका enrolment अपने आप Monitoring कार्यक्रम में हो जाएगा और आगे के निर्देश प्राप्त होंगें। https://dineshji.com/product-hard-cop... Email [email protected] Website https://dineshji.com सूर्योदय से पूर्व का समय ब्रह्म मुहूर्त के नाम से जाना जाता है। यह वह अद्भुत चमत्कारिक पल होते हैं जिनके सदुपयोग के द्वारा मनुष्य अपने भीतर बहुत कुछ विकसित और बदल सकता है। इसे अमृत बेला यूँ ही नहीं कहा जाता, इन क्षणों में प्रकृति शान्त और जागृत होती है। सूक्ष्म ऋषि सत्ताएं ज्ञानियों के अनुसार इस समय एक विशेष प्रवाह प्रसारित करती हैं। वह प्रवाह अनेकों स्तरों पर हमारे पूरे जीवन को प्रभावित करता है। इतना ही नहीं और भी बहुत कुछ। ध्यान एक अवस्था है जिसकी तैयारी मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन आचरण से हो कर ही जाती है। कहते हैं न की जो भाव जीव के भीतर उसके अंतिम क्षण में होता है वही उसके अगले जन्म का आधार बनता है। यहाँ एक भाव समझने योग्य महत्वपूर्ण है की वह अंतिम क्षण का भाव भी सम्पूर्ण जीवन की तैयारी का ही परिणाम होता है , ठीक उसी प्रकार ध्यान भी एक लम्बी तैयारी की फलश्रुति है। श्रीमद भगवद गीता से अधिक सुंदर स्वरूप में यह बोध और अन्य कहाँ प्राप्त होता है। इस सम्पूर्ण विवेचना को आप एक अध्यापक की कक्षा जान कर ही पढ़ना। #gitaonline

आत्मा का स्वरूप | ईशावास्योपनिषद कक्षा 5 #meditation #dhyana #ishaupanishad

15th Jul ब्रह्म मुहूर्त ध्यान तत्व संतुलन @0358 Brahma Muhurta Dhyana #meditation #dhyana

ईशावास्योपनिषद् : आत्मबोध की ओर प्रथम कक्षा 1 #upanishads #vedanta #adhyatma #vedicwisdom

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