गरीब लकड़हारे का सपना हुआ सच | मोहन और उसके सपनों का ठेला | Emotional Cartoon Story
गरीब लकड़हारे का सपना हुआ सच | मोहन और उसके सपनों का ठेला | Emotional Cartoon Story पहाड़ों की तलहटी में बसे एक छोटे से गाँव में सूरज की पहली किरण के साथ ही संघर्ष शुरू हो जाता था। वहीं एक कच्चे मकान में रहता था सोहन (मोहन)। सोहन स्वभाव से बेहद सरल और संतोषी था, लेकिन उसकी जेब खाली थी। उसके पास न तो कोई पुश्तैनी जायदाद थी और न ही शहर में कोई ऊंची पहुँच। बस एक अटूट सपना था—अपने परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकालने का। दिन भर वह दूसरों के खेतों में पसीना बहाता और शाम को जब सूरज ढलने लगता, तो थका-हारा घर लौटता। मगर घर का माहौल उसके शरीर की थकान से ज्यादा भारी था। उसकी पत्नी काव्या (मीना) स्वभाव की बहुत तेज थी। आर्थिक तंगी ने उसके स्वभाव में कड़वाहट भर दी थी। "देखो काव्या, आज बाज़ार से आटा और दाल ले आया हूँ," सोहन ने झोला रखते हुए कहा। काव्या ने झोले की तरफ तिरछी नज़र से देखा और चिढ़कर बोली, "राशन तो ले आए, पर ये बताओ कि बटुए में क्या बचा? अगले हफ्ते का खर्चा कैसे चलेगा?" सोहन ने धीरे से कहा, "बस कुछ ही सिक्के बचे हैं, बाकी सब सामान में लग गए।" काव्या का पारा चढ़ गया, "यही तो तुम्हारी समस्या है! कमाई अठन्नी और खर्चा रुपया। कब तक ऐसे दर-दर की ठोकरें खाओगे? कोई ढंग का काम क्यों नहीं ढूंढते जहाँ चार पैसे ज्यादा मिलें? पर तुम्हें तो बस इसी मिट्टी में सड़ना है।" सोहन लाचारी से बोला, "तो मैं क्या करूँ? तुम ही कोई रास्ता दिखा दो।" "अब रास्ता भी मैं ही बताऊं? जाओ, कम से कम चूल्हे के लिए कुछ सूखी लकड़ियां ही ढूँढ लाओ। खाली बैठने से तो अच्छा है," काव्या ने झुंझलाते हुए कहा। बेचारा सोहन बिना एक शब्द बोले कुदाल उठाई और जंगल की ओर चल पड़ा। वह दिमागी तौर पर इतना परेशान था कि उसे होश ही नहीं रहा कि वह हाथ में क्या लेकर जा रहा है। रास्ते में उसे गाँव का एक पुराना परिचित रवि मिला। रवि ने उसे हैरानी से देखा और पूछा, "अरे सोहन भाई! इस तपती दोपहर में जंगल की तरफ कहाँ जा रहे हो?" सोहन ने लंबी सांस ली और कहा, "क्या बताऊं भाई, घर की किच-किच से बचने के लिए लकड़ियां काटने जा रहा हूँ।" रवि ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा। सोहन ने चिढ़कर पूछा, "इसमें हंसने की क्या बात है?" "भाई, तुम लकड़ियां काटने जा रहे हो या खेत जोतने? जरा अपने हाथ तो देखो, कुल्हाड़ी की जगह फावड़ा लेकर जंगल जा रहे हो!" रवि की हंसी रुक ही नहीं रही थी। सोहन ने अपने हाथ की ओर देखा और अपना सिर पीट लिया। "धत तेरी की! जल्दबाजी और परेशानी में गलत औजार उठा लाया। अब वापस गया तो काव्या का तांडव शुरू हो जाएगा। जो है, इसी से काम चलाना पड़ेगा।" रवि ने उसे पास बुलाकर कहा, "सोहन, तू कब तक ऐसे ही भागता रहेगा? एक मशवरा दूँ? गाँव के लोग अब पुराने खाने से ऊब चुके हैं। तू कोई खाने-पीने का छोटा-मोटा स्टॉल (ठेला) क्यों नहीं लगा लेता? कम लागत में अच्छा काम शुरू हो सकता है।" सोहन ने कुछ देर सोचा, फिर कहा, "विचार तो बुरा नहीं है, पर अभी लकड़ियां काट लूँ, फिर सोचूंगा।" जंगल के गहरे सन्नाटे में एक पुराने पुल के पास सोहन रुक गया। उसे डर लग रहा था, पर काव्या के गुस्से का खौफ जंगली जानवरों से ज्यादा था। उसने मन ही मन कहा, "काश! मैंने रवि की बात मान ली होती। इस डरावने जंगल से तो अच्छा बाज़ार की भीड़ में ठेला लगाना है।" उसने जैसे-तैसे कुछ सूखी लकड़ियां इकट्ठा कीं, उन्हें फावड़े से ही तोड़ने की नाकाम कोशिश की और अंत में गट्ठर बांधकर घर की ओर चल दिया। घर पहुँचते ही काव्या ने फिर मोर्चा संभाल लिया। "इतनी देर? क्या जंगल में मंगल कर रहे थे? सूरज ढल गया, अब खाना कब बनेगा?" सोहन ने हांफते हुए कहा, "जंगल में डर लग रहा था, इसलिए संभल-संभल कर चल रहा था।" काव्या ने कटाक्ष किया, "डर? क्या जंगल में भूत मिल गया था?" सोहन ने हिम्मत जुटाकर कहा, "भूत नहीं, तुम्हारे गुस्से से डर लग रहा था। वैसे काव्या, मैं सोच रहा था कि तुम सही कह रही हो। क्यों न मैं बाज़ार में खाने का एक ठेला लगा लूँ? कुछ नया, जो इस गाँव में न हो।" काव्या का गुस्सा थोड़ा ठंडा हुआ। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "चलो, कम से कम अकल तो आई। यह लकड़ियां ढोने से तो हजार गुना बेहतर है। पर बेचोगे क्या?" सोहन अगले दिन बाज़ार गया यह जानने के लिए कि लोगों की पसंद क्या है। वहां उसने दो नौजवानों को बातें करते सुना। एक ने कहा, "भाई, ये समोसे-जलेबी खाकर बोर हो गया हूँ। शहर में वो जो गोल बन के बीच में टिक्की डालकर देते हैं... क्या कहते हैं उसे?" दूसरा बोला, "हाँ भाई, बर्गर! पर यहाँ गाँव में वो स्वाद कहाँ मिलेगा? उसके लिए तो 20 किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ेगा।" सोहन के कान खड़े हो गए। उसे अपना "आइडिया" मिल चुका था। वह सीधा रवि के पास गया और उसे घर ले आया। वीडियो पसंद आए तो Like, Share और Channel Subscribe करना न भूलें। #MohanAurUskeSapnoKaThela #HindiCartoon #MoralStory #EmotionalStory #VillageStory #CartoonKahani #MotivationalStory #PoorToRich #HindiAnimation #DesiCartoon #CartoonVideo #HeartTouchingStory #HindiStories #IndianCartoon #ViralCartoon #NikammaToon #YouTubeShorts #TrendingStory #CartoonSeries #InspiringStory

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